एनएसओ सर्वे रिपोर्ट, देश में गुजरात के बाद सबसे कम बेरोजगारी मप्र में, फिर भी कमाई में पिछड़ा
मध्यप्रदेश में काम मांगने वालों को काम मिल रहा है, पर मेहनताना देश के औसत से कम है। एनएसओ (राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में काम चाहने वाले हर 100 में सिर्फ डेढ़ बेरोजगार हैं, जबकि देश में यह आंकड़ा 3.1% है। इस मामले में सिर्फ गुजरात (0.9%) ही मप्र से आगे है। 15 से 29 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर 4.2% है, जबकि देश में 9.9% है। लेकिन कमाई के मामले में तस्वीर उलट है। दिहाड़ी मजदूर (सरकारी सार्वजनिक कार्यों को छोड़कर) को प्रदेश में रोज औसतन 379 रुपए मिल रहे हैं, जबकि देश में 453 रुपए है। यानी हर दिन 74 रुपए कम। नियमित नौकरी वालों को हर महीने औसतन 20,548 रुपए मिलते हैं, जबकि देश में 22,699 रुपए है। काम पर जाने में धार सबसे आगे, भोपाल सबसे पीछे प्रदेश के 10 सबसे ज्यादा आबादी वाले जिलों में धार में सबसे ज्यादा लोग काम में लगे हैं। यहां 15 साल और उससे ज्यादा उम्र के हर 100 में से 72 काम कर रहे हैं। उज्जैन (67.7) और सागर (67.4) दूसरे-तीसरे नंबर पर हैं। खरगोन (65.7) भी प्रदेश के औसत 64.1 से ऊपर है। मुरैना (58.9) औसत से नीचे हैं। सूबे में सबसे नीचे इंदौर (54.7), ग्वालियर (52.9) और भोपाल (48.1) हैं। रिपोर्ट में जिन जिलों की बेरोजगारी दर दी गई है, उनमें भोपाल में यह सबसे ज्यादा 3.9% है। जितना ज्यादा पढ़े, उतनी ज्यादा बेरोजगारी: प्रदेश में पढ़ाई का स्तर बढ़ने के साथ बेरोजगारी दर आमतौर पर बढ़ती दिखती है। अनपढ़ लोगों में यह सिर्फ 0.1% है। प्राथमिक स्तर तक पढ़े लोगों में 0.3%, मिडिल पास में 1.4% और 10वीं पास में 1.2%। 12वीं पास में दर 2.4% और डिप्लोमा व सर्टिफिकेट वालों में 4.8% हो जाती है।
