सुकून देने वाली ये तस्वीर गुड़ी रेंज के नाहरमाल और टाकलखेड़ा जंगल की है। यहां 2 साल पहले अतिक्रमणकारी खेती कर रहे थे। वन विभाग ने अतिक्रमण मुहिम चलाकर वन भूमि कब्जे मंे ली तो प्रकृति ने खुद अपना शृंगार कर लिया। जमीन में दबी जड़ों में फिर से कोपल फूट गई। बीजों से पौधे बन गए और देखते ही देखते अपने आप जंगल खड़ा हो गया। दो साल के अंदर हरियाली इस कदर लहलहाई जैसे अतिक्रमणकारियों द्वारा जंगल को दिए गए जख्म पर मरहम सा लगा दिया गया हो। रेंजर नरेंद्र पटेल ने बताया दिसंबर, 2024 में मुहिम चलाई गई थी। 4200 एकड़ जमीन अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराई। अतिक्रमणकारियों ने जंगल काटकर खेत बना लिए थे। उसी जमीन के अंदर बहड़ा, साजा और सागौन जैसे वृक्षों की जड़ें थी। उनसे कोपल फूटी और वृक्ष फिर से तैयार हो गए। बबूल आैर अन्य प्रजातियों के बीज भी जमीन पर फेंके गए थे। जिससे वहां पौधे उग आए। अब ये पौधे बड़े हो गए हैं। इस जंगल की रक्षा करने के लिए नाकेदार समेत 20 वनरक्षक सतत निगरानी रख रहे हैं।
