मध्य प्रदेश की जेलों में बंदियों के लिए लागू 58 साल पुराने नियमों में राज्य सरकार बदलाव करने जा रही है। इसके लिए 1968 से प्रभावी जेल मैन्युअल में बदलाव करते हुए जेल की टायलेट व्यवस्था, भोजन पकाने, कपड़े धोने, सजा के आधार पर बंदियों के कैटेगराइजेशन और जेल स्वच्छता से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया गया है। प्रावधान किया है कि अगर किसी बंदी ने भेदभाव के नजरिए से जेल में बना भोजन खाने में आपत्ति की तो जेल अफसर उस बंदी की ड्यूटी भोजन बनाने में ही लगा देंगे और उसे सभी बंदियों के लिए खाना पकाना होगा। जेल विभाग के संशोधित नियमों के अनुसार दोषसिद्ध कैदियों को अब दो कैटेगरी में रखा जाएगा। पहला आदतन (आभ्यासिक) अपराधी और दूसरा गैर-आदतन (अनाभ्यासिक) अपराधी माना जाएगा। नियमों में स्पष्ट किया है कि कोई बंदी यदि लगातार पांच वर्षों की अवधि में अलग-अलग मौके पर एक या एक से अधिक अपराधों के लिए दो से अधिक बार सजा पा चुका है और उस सजा को अपील या पुनर्विचार में निरस्त नहीं किया गया है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। हालांकि, 5 वर्ष की अवधि की गणना करते समय जेल में बिताई गई अवधि को शामिल नहीं किया जाएगा। शेष बंदियों को गैर-आदतन अपराधी की श्रेणी में रखा जाएगा। हर सेल में टायलेट जरूरी
सरकार ने जेलों में स्वच्छता सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इसके अंतर्गत हर सेल में शौचालय होना अनिवार्य होगा। हर पांच बंदियों पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराई जाएगी। शौचालयों में पानी की निरंतर सप्लाई तय की जाएगी। दिव्यांग बंदियों के लिए हर वार्ड में वेस्टर्न सीट के शौचालय की व्यवस्था होगी। हर शौचालय में प्लास्टिक की बाल्टी और बड़ा मग रखा जाएगा। बैरकों के अंदर और बाहर पर्याप्त संख्या में शौचालय व पेशाब घर बनाए जाएंगे। हाथ धोने के लिए हर शौचालय के बाहर पानी की टंकी और साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। जेल कर्मचारियों और बंदियों के लिए अलग टायलेट नए नियमों के अनुसार जेल परिसर के बाहर तैनात कर्मचारियों, प्रशासनिक कार्यालयों के कर्मचारियों तथा बंदियों की निगरानी में लगे कर्मचारियों के लिए अलग शौचालय बनाए जाएंगे। महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित स्थानों पर पृथक शौचालय की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है। यह संशोधन कारागार अधिनियम, 1894 की धारा 59 की शक्तियों का उपयोग करते हुए लागू किया है। भोजन बनाने की व्यवस्था में बदलाव जेलों में भोजन तैयार करने वाले बंदियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि भोजन बनाने वाली टोली में केवल गैर आदतन सजा वाले स्वस्थ बंदियों को शामिल किया जाएगा। भोजन बनाने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। टोली के सदस्य स्वच्छ वस्त्र पहनकर ही रसोई में प्रवेश करेंगे। भोजन बनाने से पहले और बाद में हाथ धोना अनिवार्य होगा। भोजन तैयार करते समय स्वच्छता मानकों का पालन करना होगा। यदि कोई बंदी अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन तैयार करता है या भोजन को दूषित करने का प्रयास करता है, तो उसे भोजन निर्माण कार्य से तत्काल हटाया जा सकेगा। नियमों में यह भी कहा है कि अगर किसी भी बंदी द्वारा भेदभाव करते हुए बिना किसी समुचित कारण के भोजन बनाने वाली टोली द्वारा पकाया गया भोजन करने में आपत्ति की जाएगी तो उस बंदी को भोजन पकाने की ड्यूटी में लगाया जाएगा और सभी बंदियों के लिए उससे ही भोजन बनवाया जाएगा। सुबह नाश्ता बनाने वाले बंदियों को मिलेगी विशेष अनुमति नियम 325 में संशोधन के अनुसार सुबह का नाश्ता तैयार करने वाले बंदियों को आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित समय से पहले बैरक से बाहर निकलने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए मुख्य प्रहरी की अनुमति आवश्यक होगी। केवल अल्प अवधि के दंडित बंदियों का ही उपयोग इस कार्य में किया जाएगा। उन्हें नाश्ता तैयार होने तक रसोई में कार्य करने की अनुमति होगी। रोटी बनाने के लिए तय हुई एसओपी रोटी बनाने को लेकर भी पहली बार नियम तय किए गए हैं। आटा तय मात्रा में लेकर स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा। रोटियों के लिए लोई धीरे-धीरे और समान आकार में तैयार की जाएगी। बेलन से रोटियों को गोल आकार दिया जाएगा। गर्म तवे पर रोटियों को धीरे-धीरे सेंका जाएगा ताकि वे बाहर से न जलें और भीतर से कच्ची न रहें। रोटी बनाने में स्वचालित उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकेगा। जो बंदी भोजन बनाने के कार्य में लगे होंगे, उन्हें सामान्य धुलाई कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा ताकि रसोई कार्य और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो। कपड़े धोने और स्वच्छता पर विशेष जोर नियम 640 में संशोधन के अंतर्गत हर बंदी को सप्ताह में साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। बंदियों के कपड़े, कंबल और बिस्तरों की नियमित धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती बंदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में आवश्यकता के अनुसार स्वचालित वाशिंग मशीनों का उपयोग किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। एमपी की जेलों में 48 हजार कैदी मध्य प्रदेश की 132 जेलों में क्षमता से अधिक करीब 45,500 से 48,000 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 50% विचाराधीन हैं। राज्य के जेलों की कुल तय क्षमता लगभग 30,000 है, जिसके कारण जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ की स्थिति है। यूपी और बिहार के बाद मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। जेल सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से जेलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और बंदियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानकों और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह संशोधन राज्य की जेलों को आधुनिक और मानवीय व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
