बारिश का सीजन चल रहा है। ऐसे में खदानों में डूब कर जान गंवाने के मामले सामने आने लगे हैं। 7 जुलाई को राजगढ़ जिले के ब्यावरा के जगनिया पुरा में खदान में डूबने से दो बच्चों समेत एक युवती की मौत हो गई। दोनों बच्चे अपनी बुआ के साथ खदान पर नहाने गए थे। हर साल होने वाले इन हादसों के बाद सवाल उठता है कि आखिर गलती किसकी? जिला प्रशासन, खदान मालिक या जान गंवाने वालों की। दैनिक भास्कर की टीम ने राजगढ़ के ब्यावरा में हुए हादसे के बाद पड़ताल की। मृतक निखरा पारधी (5), नम्रता (9) और दोनों बच्चों को बचाने के लिए पानी में कूदी उनकी बुआ सायराबाई हैं। आगे बढ़ने से पहले स्लाइड समझ लीजिए … असल में हो ये रहा है ब्यावरा में 35 से ज्यादा स्टोन क्रेशर मशीन संचालित हैं। खदानों में खनन के लिए खनिज विभाग और जिला प्रशासन द्वारा लीज पर दी गई भूमि पर तय गाइड लाइन के अनुसार खुदाई करने को कहा जाता है। समय-समय पर जांच भी की जाती है, लेकिन ठेकेदार नियमों को ताक पर रखकर खनन कराते हैं। नतीजा, इन गड्ढों की गहराई 100 फीट से ज्यादा तक पहुंच गई है। देखने में ये बड़े तालाब से नजर आने लगे हैं। इन खदानों के आसपास न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है, न चेतावनी बोर्ड या मजबूत घेराबंदी दिखाई देती है। बारिश के मौसम में ये गहरे गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बच्चों, मवेशियों और राहगीरों के हादसे का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के खनिज विभाग को जानकारी होने के बाद भी एक्शन नहीं हुआ।
दैनिक भास्कर की टीम क्षेत्र की खदानों पर पहुंची, पढ़िए रिपोर्ट …
स्पॉट- 1: 100 फीट गहरी खदान, बारिश में भरा पानी स्थान- ब्यावरा से 20 किलोमीटर दूर जगनिया पुरा 7 जुलाई को इसी खदान के गड्ढे में डूबकर तीनों की मौत हुई है। गांव के पास क्रशर मशीन संचालित है। यहां खदान से पत्थरों का खनन किया जाता है। उसे क्रेशर की मदद से स्टोन, गिट्टी और क्रेशर सेंट बनाई जाती है। खनिज विभाग द्वारा एक हेक्टेयर भूमि खुदाई के लिए आवंटित की गई। इस कारण यहां बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। साल भर इनमें पानी भरा रहता है। अधिक गहराई के कारण गर्मी में भी पानी नहीं सूखता। पास में कालाकोट बांध है, जिससे जल स्तर भी बढ़ा रहता है। ठेकेदार के डर से यहां कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। नाम नहीं बताने की शर्त पर लोगों का कहना है कि खदान में लंबे समय से गिट्टी निकाली जा रहा है। गहराई 100 फीट से ज्यादा है। खदान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि तेज बारिश होते ही लबालब हो जाती है। चारों तरफ से इसमें तेजी से पानी आ जाता है। जैसे ही, पानी कम होगा खदान फिर से शुरू हो जाएगी। कोई भी सरकारी आदमी यहां देखने नहीं आया। जब चालू रहती है, तो दिनरात क्रेशर की आवाज और डंपर नजर आते हैं। खास बात ये है कि तीन लोगों की मौत के बाद भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं। लोगों ने बताया कि क्षेत्र में दो खदानों में क्रेशर लगे हैं। पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों से लगातार खुदाई की जाती है। अधिक गहराई में मिलने वाले कठोर पत्थरों को निकालने के लिए ब्लास्टिंग की जाती है। खनन क्षेत्र में छोटे-बड़े करीब आठ गहरे गड्ढे दिखाई दिए। अधिकांश गड्ढे बारिश के पानी से भर चुके हैं, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना कठिन है। कई जगह सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम, मजबूत फेंसिंग या चेतावनी बोर्ड नजर नहीं आए। ये खदान ही तीन लोगों की मौत का कारण बनी है। स्पॉट- 2 : 11 क्रेशर मशीन से तोड़े जा रहे पत्थर स्थान- पड़ोनिया गांव 100 फीट से अधिक गहरी खदान के आसपास बाउंड्री तक नहीं है। गंभीर बात यह है कि खदान के पास से ही दूसरे गांवों के लिए कच्ची सी सड़क बनी हुई है। कुछ ही दूरी पर खेत हैं। कई मवेशी भी आसपास नजर आ रहे हैं। बावजूद खदान के आसपास सुरक्षा इंतजाम, मजबूत घेराबंदी या चेतावनी संबंधी व्यवस्थाएं नजर नहीं आईं। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में लंबे समय से बिना रोक-टोक के खनन कार्य जारी है। यहां आसपास 11 क्रेशर मशीन लगी हैं। पत्थरों की खुदाई और तोड़ने के लिए पोकलेन जैसी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। कई बार ब्लास्टिंग की आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है। स्पॉट- 3 – अभयपुर रोड, ब्यावरा
स्थान- करीब 6 से ज्यादा खदानें रोड पर बड़े-बड़े तालाब जैसे जलकुंड नजर आ रहे हैं। ये क्रेशर खदानें हैं, इनमें इस समय बरसाती पानी भर गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश का सीजन खत्म होते ही ठेकेदार पंप लगाकर इनका पानी निकलवा देंगे। इसके बाद फिर से खुदाई शुरू हो जाएगी। कई खदानें तो 60 से 75 फीट तक की गहराई पर पहुंच गई हैं। ग्रामीण कहते हैं कि यहां परमिशन एक खदान की मिलती है, तो ठेकेदार खनन तीन-चार जगह से शुरू कर देता है। खदानों से ग्रामीणों के खेतों और गांव तक जाने के रास्ते हैं, जिनसे रोज लोग और मवेशी गुजरते हैं। सुरक्षा के लिए न तो बैरिकेडिंग है और न चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। बरसात के मौसम में पानी के कारण गहराई का अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो जाता है, जिससे खतरा बढ़ गया है। स्पॉट-04 – 60 फीट गहरी खदानों से खतरा राजगढ़- मोया रोड स्थित खदानें राजगढ़ रोड स्थित मोया रोड क्षेत्र में संचालित खदानों में लापरवाही सामने आई। यहां करीब 60 फीट से अधिक गहराई तक खनन किया जा चुका है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
मौके पर न तो बैरिकेडिंग की गई है, न ही चेतावनी बोर्ड या संकेतक लगाए गए हैं। खुले गड्ढों के कारण आसपास से गुजरने वाले लोगों और मवेशियों के लिए हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
इस क्षेत्र में करीब पांच क्रेशर मशीनों का संचालन हो रहा है, जहां भारी मशीनों से खुदाई की जा रही है। बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी साफ नजर आई। यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो यह बड़े हादसे का कारण बन सकता है। बोलने से बच रहे अफसर
दैनिक भास्कर की टीम ने खनिज अधिकारी रोहित वर्मा से बात करने की कोशिश की। उन्होंने कैमरे के सामने बोलने से मना कर दिया। बताया कि मैंने कुछ दिन पहले ही खनिज अधिकारी का पद संभाला है, ज्यादा जानकारी नहीं है। वहीं, एडीएम प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। पता कर लेता हूं। उन्होंने ब्यावरा एसडीएम को फोन भी लगवाया, लेकिन उन्होंने भी कुछ बोलने से इनकार कर दिया। 100 फीट गहरी क्रेशर खदान में भाई-बहन और बुआ डूबे मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्टोन क्रेशर की 100 फीट गहरी खदान में डूबने से एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई। इनमें 2 भाई बहन और बुआ शामिल हैं। पिता रोते हुए अपने मासूम बच्ची का शव कंधे पर रखकर एंबुलेंस तक ले गए, जिसका वीडियो भी सामने आया है। पढ़ें पूरी खबर
