15-20 साल से स्कूल में पढ़ा रहे शिक्षकों के सामने अब ऐसी परीक्षा है, जो नौकरी में आने के वक्त उनकी शर्त ही नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सेवारत शिक्षकों के लिए TET पास करना जरूरी है। मध्य प्रदेश में परीक्षा की तारीख, सिलेबस तय हो चुका है। परीक्षा सिर पर आने के बावजूद शिक्षकों की सबसे बड़ी उलझन पेपर की तैयारी नहीं, यह है कि आखिर परीक्षा देनी किसे है। किसी को नौकरी जाने की चिंता है, किसी को प्रमोशन रुकने की; पुराने TET/CTET पास शिक्षक अलग जवाब तलाश रहे हैं। आखिर बरसों से पढ़ा रहे शिक्षकों पर TET की शर्त क्यों लगी, पास नहीं हुए तो नौकरी और प्रमोशन का क्या होगा; समझते हैं आज के मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में। सवाल 1- TET तो पहले भी होता रहा, इस बार मसला इतना बड़ा क्यों बन गया? जवाब- सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में एक आदेश दिया… सवाल 2- तो किन शिक्षकों को अब TET देना ही होगा? जवाब- यहीं सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन है। आसान भाषा में समझें तो हर सेवारत शिक्षक को TET नहीं देना है। पहली- जिनकी सेवा में 5 साल से कम समय बचा है… » इन शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट दी गई है। दूसरी- जिनकी सेवा में 5 साल से ज्यादा समय बाकी है… » इन शिक्षकों को TET पास करना होगा। इसके लिए कोर्ट ने 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। तीसरी- जो शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं… » इनके लिए TET जरूरी है, चाहे सेवा में कितने भी साल बाकी हों। सवाल 3- TET पास नहीं किया तो क्या नौकरी चली जाएगी…प्रमोशन का क्या होगा? जवाब- तीन बातें अहम हैं… सवाल 4- 2028 तक समय होने के बावजूद शिक्षक अभी से परेशान क्यों हैं? जवाब- तीन वजहें हैं… पहली, नियम अस्पष्ट हैं- दुबे कहते हैं- किसी भी परीक्षा में टाइम-टेबल के साथ यह भी पता होता है कि बैठेगा कौन। यहां तारीख और सिलेबस आ गया, पर पात्रता का दायरा अब भी साफ नहीं। शिक्षक संगठनों ने आयुक्त को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है कि विभाग एक तरफ पुराने शिक्षकों से TET मांग रहा है, दूसरी तरफ 2026-27 सत्र के लिए बिना TET वाले अतिथि शिक्षकों की भर्ती/रिजॉइनिंग जारी रखे हुए है। वहीं सहायक शिक्षक एवं उच्च श्रेणी शिक्षकों को हाल ही में प्रमोशन का लाभ भी दे दिया गया है। दूसरी, सिलेबस का स्तर- अप्रैल में आयुक्त लोक शिक्षण ने कहा था कि पेपर कक्षा 1 से 8 के स्तर का होगा। बाद में चयन मंडल ने जो सिलेबस जारी किया, वह विज्ञान जैसे कुछ विषयों में ग्रैजुएशन स्तर जितना भारी लगा। शिक्षकों की आपत्ति का एक आधार नियम पुस्तिका में भी दिखता है। वर्ग-2 में 120 अंकों के विषय वाले हिस्से का स्तर ग्रैजुएशन लेवल का है, जबकि सवाल कक्षा 9-10 के पाठ्यक्रम से जुड़े होंगे। वर्ग-3 में सवाल कक्षा 1-5 के पाठ्यक्रम पर आधारित होंगे, लेकिन कठिनाई स्तर हाईस्कूल तक हो सकता है। तीसरी, ऑनलाइन एग्जाम और फीस- कई सेवारत शिक्षकों को कंप्यूटर पर पेपर देने का अभ्यास ही नहीं है। स्क्रॉल करना, आंसर मार्क करना सीखने में ही आधा वक्त निकल सकता है। लंबे समय से पढ़ा रहे वर्ग-3 के शिक्षक विजय कृष्ण मिश्रा कहते हैं, दिक्कत सिर्फ सिलेबस या तकनीक की नहीं, उम्र के साथ परीक्षा की तैयारी खुद एक चुनौती है। शिक्षक संगठनों ने अलग से फीस माफी, ऑफलाइन परीक्षा, परीक्षा के दिन अवकाश और यात्रा भत्ते की मांग भी उठाई है। सवाल 5- परीक्षा कैसी होगी, और अभी सबसे ज्यादा सवाल किन बातों पर हैं? जवाब- परीक्षा का पूरा पैटर्न कैसा है ये आप नीचे ग्राफिक में देख सकते हैं। हालांकि, फॉर्म भरने से पहले ये बातें ध्यान रखना जरूरी है… मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर का ये एपिसोड भी देखें… कौन हैं नेहा पच्चीसिया, जिन्हें CM ने सस्पेंड किया- एयर होस्टेस की नौकरी छोड़ DSP बनीं एयर इंडिया की एयर होस्टेस से पुलिस अफसर बनीं नेहा पच्चीसिया आज FIR और सस्पेंशन के बाद चर्चा में हैं। MPPSC में 20वीं रैंक लाकर पुलिस सेवा में आईं और कटनी की CSP बनीं नेहा पर पहले ट्रांसपोर्टर से कथित वसूली की शिकायत हुई, फिर हत्या के एक केस में लापरवाही और जमीन के सौदे में गड़बड़ी के आरोप सामने आए…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
