राजधानी स्थित एम्स भोपाल की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। इस बार मामला भोपाल के अपर कलेक्टर मनोज वर्मा की सास (मदर-इन-लॉ) 79 वर्षीय ललिता सिन्हा के उपचार से जुड़ा है। ललिता सिन्हा को 22 जून को कूल्हे (हिप) की हड्डी टूटने के बाद बेहतर इलाज की उम्मीद में एम्स भोपाल के चार्जेबल प्राइवेट वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि भर्ती के बाद से उन्हें नर्सिंग और हाउसकीपिंग स्टाफ की गंभीर लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है। रोज 2 हजार रुपए कमरे का किराया, लेकिन बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मरीज के बेटे राजीव सिन्हा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि कई लोगों की सलाह पर उन्होंने अपनी मां को एम्स में भर्ती कराया था। उनका कहना है कि प्राइवेट वार्ड का प्रतिदिन 2 हजार रुपए किराया लिया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद मरीज को समय पर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के इलाज को लेकर कोई शिकायत नहीं है, लेकिन नर्सिंग और हाउसकीपिंग स्टाफ का रवैया बेहद निराशाजनक है। 10 बार बुलाने पर भी 15-20 मिनट बाद पहुंचती हैं नर्स राजीव सिन्हा का आरोप है कि मरीज को किसी भी तरह की जरूरत होने पर यदि नर्सिंग स्टाफ को बुलाया जाता है तो कई बार 15 से 20 मिनट तक कोई नहीं आता। उनका कहना है कि कई बार स्टाफ व्यस्त नहीं होता, फिर भी मरीज को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। वृद्ध मरीज होने के कारण लगातार निगरानी और तत्काल सहायता की जरूरत होती है, लेकिन ऐसा नहीं मिल रहा। डायपर बदलना हमारा काम नहीं, पैसे दोगे तो करेंगे परिजनों के अनुसार सबसे ज्यादा परेशानी मरीज के डायपर बदलने और साफ-सफाई को लेकर हुई। उनका आरोप है कि हाउसकीपिंग स्टाफ ने साफ कह दिया कि डायपर बदलना उनकी जिम्मेदारी नहीं है, वे सिर्फ सहायता करेंगे। यदि स्टाफ से डायपर बदलवाना है तो अलग से भुगतान करना होगा। हालांकि अतिरिक्त राशि कितनी होगी, यह नहीं बताया गया। इसके बाद परिवार को मरीज की देखभाल के लिए निजी केयरटेकर रखना पड़ा। दो घंटे तक गंदगी में पड़ी रहीं मरीज, फिर कराया गया साफ राजीव सिन्हा ने बताया कि रविवार दोपहर करीब एक बजे उनकी मां ने मल त्याग किया था। इसके बाद लगातार हाउसकीपिंग स्टाफ को बुलाया गया, लेकिन कोई नहीं आया। उनका आरोप है कि करीब ढाई से तीन बजे के बीच जाकर सफाई की गई। इस दौरान मरीज करीब दो घंटे तक उसी स्थिति में रही। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने मरीज को भोजन कराने के निर्देश दिए थे, क्योंकि वह रात से कुछ नहीं खा पाई थीं और शुगर लेवल गिरने की आशंका थी। लेकिन गंदगी की वजह से मरीज खाना भी नहीं खा सकीं। बीपी 126/55 था, फिर भी दी जा रही थी हाई डोज राजीव सिन्हा के अनुसार उन्होंने तत्काल नर्स से मरीज का ब्लड प्रेशर चेक कराया, जो 126/55 आया। उनका आरोप है कि इतनी स्थिति में अतिरिक्त ब्लड प्रेशर की दवा देने से मरीज का बीपी खतरनाक स्तर तक गिर सकता था। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो नर्स ने कहा कि डॉक्टर के निर्देश पर दवा दी जा रही है। उनका कहना है कि ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी दवाएं देने से पहले मरीज की स्थिति की जांच जरूरी होती है। स्टाफ से कई बार हुई बहस, निजी केयरटेकर रखना पड़ा परिजनों का कहना है कि इन घटनाओं को लेकर उनकी कई बार नर्सिंग स्टाफ से बहस भी हुई, लेकिन व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ। लगातार हो रही परेशानियों के कारण उन्हें मरीज की देखभाल के लिए निजी केयरटेकर रखना पड़ा। फिलहाल भोपाल के अपर कलेक्टर मनोज वर्मा की सास ललिता सिन्हा एम्स भोपाल में भर्ती हैं और उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों से कोई शिकायत नहीं, हाउसकीपिंग स्टाफ का रवैया अमानवीय : मनोज वर्मा भोपाल के अपर कलेक्टर मनोज वर्मा ने कहा कि उनकी शिकायत डॉक्टरों से नहीं, बल्कि हाउसकीपिंग स्टाफ के कामकाज को लेकर है। उन्होंने कहा, डॉक्टर हमारी मरीज को बहुत अच्छे से अटेंड कर रहे हैं, उनसे हमें कोई परेशानी नहीं है। हमारी शिकायत सिर्फ नीचे के स्टाफ, खासकर हाउसकीपिंग स्टाफ के रवैये को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 79 वर्षीय महिला का हिप रिप्लेसमेंट हुआ है, ऐसे मरीज की साफ-सफाई, पॉटी या उल्टी जैसी स्थिति में सहायता करना अस्पताल स्टाफ की जिम्मेदारी होनी चाहिए, लेकिन हाउसकीपिंग स्टाफ का व्यवहार बेहद असंवेदनशील और अमानवीय रहा। एम्स के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन को इस संबंध में बात करने के लिए कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इस मामले में एम्स प्रबंधन के अन्य अधिकारियों का कहना है , इस बारे में संबंधित से हमने रिटर्न कंप्लेंट कंप्लेंट की रिक्वेस्ट की है, फिलहाल अभी वह रिटर्न कंप्लेंट नहीं दे रहे हैं।
