भोपाल में सुरक्षा और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही के मुद्दे को लेकर शुक्रवार शाम महिलाओं ने पैदल मार्च निकाला। कमला पार्क से शुरू हुआ मार्च गैमन मॉल तक पहुंचा। हाथों में पोस्टर और तख्तियां लिए महिलाएं रास्तेभर नारे लगाती हुईं आगे बढ़ीं। प्रदर्शन में महिला सुरक्षा के साथ महिलाओं की स्वतंत्रता और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ भी आवाज उठाई गई। मार्च में शामिल महिलाएं पोस्टरों पर अलग-अलग संदेश लेकर पहुंची थीं। इनमें ‘हम लेकर रहेंगे आजादी’, ‘डरना नहीं, रुकना नहीं’ और ‘शर्म नहीं है मर्दों में, महिलाएं क्यों हैं पर्दों में’ जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनके आने-जाने पर बंदिशें लगाने के बजाय शहर में ऐसा सुरक्षित माहौल बनाया जाना चाहिए, जिसमें महिलाएं बिना डर के कहीं भी आ-जा सकें। 6 बजे पार्क नहीं जाओगी, 7 बजे नहीं जाओगी… बंदिशें क्यों?’ प्रदर्शन में शामिल विदुषी ने कहा कि महिलाओं से यह कहना कि वे शाम 6 या 7 बजे के बाद पार्क न जाएं, समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा, “आप होते कौन हो हमारे ऊपर बंदिशें लगाने वाले कि तुम पार्क नहीं जाओगी, तुम इधर नहीं जाओगी, तुम ये नहीं पहनोगी, वो नहीं करोगी। अगर कुछ करना है तो लड़कों की सोच बदलो। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सख्त कार्रवाई और सजा का ऐसा संदेश होना चाहिए कि अपराध करने वालों में कानून का डर पैदा हो। गर्ल्स कॉलेजों के बाहर पिंक बूथ, कैमरे और पेट्रोलिंग की मांग प्रदर्शनकारियों ने गर्ल्स कॉलेजों के बाहर पिंक बूथ बनाने, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने और जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, वहां कैमरे लगाने की मांग की। महिलाओं ने शहर के अंधेरे और सुनसान इलाकों में स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत भी बताई। उनका कहना था कि कई जगह रात में महिलाओं और बेटियों का निकलना असुरक्षित महसूस होता है। बेटियों पर पाबंदी नहीं, बेटों की सोच बदलने की जरूरत विदुषी ने कहा कि छेड़छाड़ और कमेंटबाजी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए परिवारों को भी बेटों के व्यवहार और परवरिश पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि महिलाओं को यह बताने के बजाय कि वे कब और कहां जाएं, लड़कों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए। पहले भी प्रदर्शन हुए, सरकार के कान तक आवाज नहीं पहुंची प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिला सुरक्षा समेत अलग-अलग मुद्दों पर महिलाएं पहले भी सड़कों पर उतरती रही हैं, लेकिन उनकी आवाज प्रभावी तरीके से सरकार तक नहीं पहुंच रही। विदुषी ने कहा कि अब महिला सुरक्षा के मुद्दे पर आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाने की जरूरत है। उन्होंने दिल्ली और जयपुर में हो रहे महिला सुरक्षा से जुड़े प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। किसी एक पुरुष के खिलाफ नहीं, पूरी सोसाइटी से मांग प्रदर्शन में शामिल डॉ. तृप्ति ने ‘फॉल ऑफ पेट्रियार्की’ यानी पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ संदेश देने वाला पोस्टर तैयार किया था। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ स्त्री-विरोधी सोच और व्यवहार का विरोध करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्टर में हिंसा का संदेश नहीं है। उनकी मांग किसी एक पुरुष से नहीं, बल्कि पूरी सोसाइटी से है। नारों में महिला सुरक्षा से लेकर आजादी तक का मुद्दा मार्च के दौरान पोस्टरों और नारों में महिला सुरक्षा के साथ महिलाओं की स्वतंत्रता का मुद्दा भी प्रमुख रहा। ‘हम लेकर रहेंगे आजादी’ और ‘डरना नहीं, रुकना नहीं’ जैसे नारों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं से डर के कारण सार्वजनिक जगहों से पीछे नहीं हटने की अपील की।
