एक छोटी-सी लापरवाही ने न सिर्फ 13 लोगों की जान ले ली, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका भी छीन ली। बरगी बांध स्थित मेकल रिसोर्ट, जहां कभी रोजाना दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों की भीड़ उमड़ती थी, वहां आज सन्नाटा पसरा हुआ है। जो लोग कभी वाटर स्पोर्ट्स का आनंद लेने यहां आते थे, वे अब बांध की ओर देखने से भी डरते हैं।
30 अप्रैल को हुए बरगी क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन अब तक किसी की अंतिम जवाबदेही तय नहीं हो सकी है। मामला अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच आयोग गठित कर 90 दिनों का समय मांगा है। हादसे के बाद चौपट हुआ पर्यटन बरगी क्रूज हादसे का असर सिर्फ पर्यटन विभाग तक सीमित नहीं रहा। यहां आने वाले पर्यटकों पर निर्भर सैकड़ों स्थानीय परिवारों के सामने आज रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट के कारण दुकानदारों, फेरी वालों और छोटे व्यापारियों का काम लगभग ठप हो गया है। सड़क किनारे व्यापार करने वालों की मुश्किलें बढ़ीं बरगी नगर निवासी प्रीति बर्मन पिछले सात वर्षों से बांध के पास बेर, फल और खाने-पीने का सामान बेचकर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। उनका कहना है कि पहले रोजाना 300 से 400 रुपये की बिक्री हो जाती थी, लेकिन हादसे के बाद यह घटकर 50 से 100 रुपये तक रह गई है।
प्रीति बताती हैं कि गर्मी की छुट्टियों में भोपाल, इंदौर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे, लेकिन अब स्थानीय लोगों को छोड़कर लगभग सभी ने यहां आना बंद कर दिया है। शाम के समय भी बांध के आसपास पहले जैसी रौनक दिखाई नहीं देती। पलायन करने को मजबूर हुए लोग प्रीति के अनुसार, पहले मेकल रिसोर्ट और बरगी बांध के आसपास 25 से 30 लोग सड़क किनारे फल, ककड़ी और अन्य सामान बेचकर अपना गुजारा करते थे। अब स्थिति ऐसी है कि गिनती के दो-तीन लोग ही यहां दिखाई देते हैं। व्यापार पूरी तरह ठप होने के कारण कई लोग शहर की ओर पलायन कर चुके हैं। क्या सिर्फ गर्मी है पर्यटकों की कमी की वजह? पर्यटकों की संख्या में कमी का कारण केवल भीषण गर्मी नहीं है। दरअसल, हादसे के बाद वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां पूरी तरह बंद कर दी गई हैं, जिससे पर्यटक यहां आने से बच रहे हैं।
मेकल रिसोर्ट के प्रबंधक आनंद का कहना है कि गर्मी और स्कूलों की छुट्टियां समाप्त होना भी एक कारण है, लेकिन सबसे बड़ा कारण वोट क्लब और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों पर लगा प्रतिबंध है। उनका मानना है कि बारिश के बाद यदि गतिविधियां फिर शुरू होती हैं, तो पर्यटकों की संख्या में सुधार हो सकता है। सीक्वेंस-1 : बरगी पर्यटन की पहचान था वाटर स्पोर्ट्स बरगी बांध के 21 गेट देखने के अलावा यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण वाटर स्पोर्ट्स था। मेकल क्रूज, हाउस बोट, मिनी क्रूज, मैकेनाइज्ड बोट, स्पीड बोट और जेट स्की जैसी गतिविधियों का पर्यटक भरपूर आनंद लेते थे। इसके साथ ही मेकल रिसोर्ट के स्वादिष्ट व्यंजन भी लोगों को आकर्षित करते थे।
हालांकि, क्रूज हादसे के बाद सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई, जिससे पूरा पर्यटन कारोबार प्रभावित हो गया। सीक्वेंस-2 : हादसे के बाद लोगों में बैठा डर उत्तर प्रदेश के इटावा से अपने दोस्तों के साथ घूमने आए सुमित पटेल ने बताया कि उन्होंने भेड़ाघाट और चौसठ योगिनी मंदिर का भ्रमण किया, लेकिन बरगी बांध देखने की उत्सुकता अलग थी। उन्होंने कहा कि क्रूज हादसे की तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखी थीं, इसलिए वे यह जानने आए थे कि आखिर इतना बड़ा क्रूज कैसे डूब गया।
सुमित ने बताया कि हादसे के बाद उनके मन में इतना डर बैठ गया है कि अब वे कभी किसी क्रूज की सवारी करने के बारे में सोच भी नहीं सकते। अब तक हुई ये कार्रवाई क्रूज हादसे के बाद सरकार ने मुख्य पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र की सेवाएं समाप्त कर दीं। वहीं, लापरवाही के आरोप में मेकल रिसोर्ट और बोट क्लब के प्रबंधक सुनील मरावी को निलंबित किया गया है।
क्षेत्रीय प्रबंधक संजय मल्होत्रा को मुख्यालय से संबद्ध करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। अदालत के निर्देश पर पायलट और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। प्रदेशभर में पड़ा असर बरगी क्रूज हादसे के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के कई स्थानों पर क्रूज और नौका विहार गतिविधियों पर रोक लगा दी है। जबलपुर के भेड़ाघाट, गौरीघाट और तिलवाराघाट में भी नावों का संचालन बंद कर दिया गया है, जिससे सैकड़ों नाविकों और उनसे जुड़े परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हादसे के बाद पर्यटकों का भरोसा कमजोर हुआ है। वहीं, वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के बंद होने से बरगी का पर्यटन लगभग पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
