Homeमध्यप्रदेशRTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को जमानत मिली:जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा-...

RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को जमानत मिली:जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा- हर सुनवाई में उपस्थित रहना होगा; फरवरी 2025 से जेल में था

आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को आखिरकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने करीब 18 माह बाद जमानत दे दी। वह फरवरी 2025 से जेल में बंद था। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उसकी नियमित जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे सशर्त रिहा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने 10 लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहाई का निर्देश दिया है। सौरभ शर्मा फरवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से मुक्ति नहीं है। आरोपी को ट्रायल के दौरान प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहना होगा। साथ ही, अदालत की अनुमति के बिना उसे देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। बता दें, छापेमारी के बाद मेंडोरी के जंगल से एक कार में 52 किलो सोना और करीब 11 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए थे। इस आधार पर मिली राहत
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच एजेंसी चार्जशीट पेश कर चुकी है। ऐसे में आगे की जांच के लिए आरोपी को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट आरोप तय कर चुका है और अब मामला साक्ष्यों एवं सुनवाई के चरण में है। अदालत ने इस तथ्य को भी महत्व दिया कि आरोपी करीब 18 महीने से जेल में है, जबकि जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। हाईकोर्ट ने माना कि मामले में गवाहों और दस्तावेजों की संख्या अधिक है। ऐसे में मुकदमे का शीघ्र निपटारा संभव नहीं दिखता। केवल ट्रायल लंबा चलने के कारण किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने आदेश में कहा कि सौरभ शर्मा किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं करेगा। उसे न्यायालय की अनुमति के बिना विदेश यात्रा की अनुमति नहीं होगी और ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक सुनवाई में नियमित रूप से उपस्थित रहना होगा। पहले दो बार खारिज हो चुकी जमानत
इससे पहले सौरभ शर्मा ने दो बार नियमित जमानत याचिका लगाई थी, लेकिन दोनों बार याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद सौरभ सुप्रीम कोर्ट भी गया था। वहां से याचिका वापस लेते हुए उसे कानून के अनुसार दोबारा आवेदन देने की छूट मिली थी। इसके बाद पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए जमानत के लिए आवेदन किया गया था। 10 जून 2025 को जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने आवेदन खारिज कर दिया था। सौरभ शर्मा की जमानत का ईडी ने भी जमकर विरोध किया था। ईडी ने दलील दी थी कि अगर उसे छोड़ा जाता है तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है और गवाहों को प्रभावित कर सकता है। जंगल में मिला था सोना और नकदी
बता दें कि भोपाल के बाहरी क्षेत्र के जंगल में छापेमारी के दौरान 52 किलो सोना, करोड़ों रुपए नकद और अन्य संपत्ति बरामद होने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई की थी। मामले की जांच के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। यह खबर भी पढ़ें… सात साल में 12 बार बदली थी सौरभ की पोस्टिंग आरटीओ के पूर्व आरक्षक करोड़पति सौरभ शर्मा ने वीआरएस लेने के पहले 12 अलग-अलग दफ्तरों और चेक पाइंट पर 18 अफसरों और कर्मचारियों के साथ काम किया है। इसमें परिवहन आयुक्त से लेकर प्रधान आरक्षक कैडर तक के कर्मचारी शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर…

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here