मध्य प्रदेश में अदालत से सामुदायिक सेवा की सजा पाए व्यक्ति से सार्वजनिक हित से जुड़े विभिन्न कार्य कराए जा सकेंगे। इनमें अस्पतालों की सफाई, शौचालय एवं परिसर की स्वच्छता, सार्वजनिक स्थानों की सफाई, पौधरोपण, सरकारी संस्थानों में सहयोग, पुस्तकालयों एवं अभिलेखों का रखरखाव जैसे कार्य शामिल हैं। राज्य सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के अंतर्गत सामुदायिक सेवा की सजा से संबंधित गाइडलाइन जारी की है। 11 सितंबर 2026 को गृह विभाग से जारी मध्यप्रदेश राजपत्र में सामुदायिक सेवा के आदेश, उसके क्रियान्वयन और निगरानी की प्रक्रिया तय की गई है। इन बातों का रखा जाएगा ध्यान
सामुदायिक सेवा का उद्देश्य अपराधियों को सुधार का अवसर देना और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी तय करना है। इसके लिए न्यायालय द्वारा अपराध की प्रकृति, अपराधी की आयु, स्वास्थ्य, शारीरिक क्षमता, सामाजिक एवं पारिवारिक स्थिति तथा अपराध की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। अपराधी चिकित्सक, इंजीनियर, वकील है तो उससे संबंधित सामुदायिक सजा ही दी जाए
गाइडलाइन के मुताबिक- अगर कोई अपराधी कुशल पेशेवर चिकित्सक, अभियंता, लेखपाल या अधिवक्ता के रूप में काम कर चुका है और उसे सामुदायिक सेवा की सजा दी जानी है तो सक्षम न्यायालय उसे ऐसे कार्य सौंप सकेगा जिसमें उसके पेशेवर कौशल का ऐसा उपयोग हो कि जरूरतमंद या वंचित समुदायों को लाभ मिल सके। यह भी कहा है कि न्यायालय अपराधी के कौशल और समुदाय की आवश्यकताओं के अनुसार समुदाय आधारित कार्य तय कर सकेगा। इसमें यह भी साफ किया है कि सामुदायिक सेवा मुख्य रूप से पहली बार अपराध करने वालों के लिए है। न्यायालय को बार-बार अपराध करने वाले मामलों में सामुदायिक सेवा अधिरोपित करते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए तथा इसके लिए विशिष्ट कारण का उल्लेख किया जाना चाहिए। न्यायालय और निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
गाइडलाइन में सामुदायिक सेवा के आदेश में सेवा की अवधि, स्थान, कार्य की प्रकृति, सेवा कराने वाले अधिकारी तथा निगरानी अधिकारी का नाम-पद दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। निगरानी अधिकारी सामुदायिक सेवा करने वाले व्यक्ति की उपस्थिति और कार्य की निगरानी करेगा तथा तय फार्मेट में न्यायालय को रिपोर्ट पेश करेगा। आदेश का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित न्यायालय को रिपोर्ट देने की व्यवस्था भी की गई है। महिलाओं और सुरक्षा का भी ध्यान
सामुदायिक सेवा के दौरान महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, सेवा के दौरान अपराधी के साथ मानवीय और गरिमापूर्ण व्यवहार करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का यह कदम छोटे एवं अपेक्षाकृत कम गंभीर अपराधों में दंड के साथ सुधारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन कार्यों में भी लगाई जा सकेगी सामुदायिक सेवा सामुदायिक सेवा की सजा के अंतर्गत अस्पताल, शिक्षा संस्थान, नगरीय निकाय, पंचायत, पुलिस/सामुदायिक केंद्र और अन्य सरकारी संस्थाओं को सामुदायिक सेवा के लिए संभावित स्थल के रूप में शामिल किया गया है। कुछ मामलों में सार्वजनिक स्थानों की सफाई, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण, पुस्तकालय, अभिलेखों का रखरखाव और सरकारी परिसंपत्तियों की देखरेख जैसे कार्य कराए जा सकेंगे। नियम तोड़ने पर रिपोर्ट न्यायालय को यदि दोषी व्यक्ति निर्धारित समय पर सामुदायिक सेवा के लिए उपस्थित नहीं होता, आदेशों का पालन नहीं करता या कार्य में लापरवाही करता है, तो निगरानी अधिकारी इसकी जानकारी न्यायालय को देंगे। इसके बाद न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार आगे का आदेश पारित कर सकेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामुदायिक सेवा के दौरान व्यक्ति के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उसे उत्पीड़न, शोषण या अनुचित कठिनाई का सामना न करना पड़े। दिशा-निर्देशों में अनुपालन रिपोर्ट के लिए अलग-अलग प्रारूप भी निर्धारित किए गए हैं।
