मध्यप्रदेश में लंबे अंतराल के बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से शुरू की गई पुलिस बैंड भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर तीन याचिकाओं पर इंदौर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने तीनों याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी या धांधली के ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सके। हालांकि, इसी भर्ती से जुड़ी एक अन्य याचिका जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित है। ऐसे में अंतिम चयन प्रक्रिया पूरी तरह आगे बढ़ने का रास्ता उस मामले के निराकरण के बाद ही स्पष्ट होगा। 679 पदों पर हुई थी भर्ती प्रक्रिया पुलिस मुख्यालय ने अप्रैल 2026 में प्रदेश में पुलिस बैंड के 679 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। भर्ती के दूसरे चरण यानी वादन टेस्ट के बाद अगस्त में 1271 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए पात्र घोषित किया गया। इस दौरान उनके अंकों का खुलासा नहीं किया गया था, जिसे लेकर विवाद शुरू हुआ। याचिकाकर्ता नीलेश सिंह, विपिन बैरवा और योगेंद्र पंवार ने हाईकोर्ट में भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि नियम के अनुसार उपलब्ध पदों की संख्या के तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए था। इसके अलावा याचिकाओं में प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के साथ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और बैकडोर एंट्री जैसे आरोप भी लगाए गए थे। न्यूनतम अंक पूरा करने वालों की संख्या रही कम सरकार और पुलिस मुख्यालय की ओर से अदालत में बताया गया कि तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाने का प्रावधान निर्धारित न्यूनतम अंकों की पात्रता से जुड़ा था। 75 अंकों के वादन टेस्ट में अनारक्षित, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक, जबकि एससी-एसटी वर्ग के लिए 40 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, ओबीसी वर्ग में 95 पदों के लिए 207 अभ्यर्थी ही निर्धारित मानक पूरा कर सके। एसटी वर्ग में 36 पदों के लिए 137 और ईडब्ल्यूएस वर्ग में 68 पदों के लिए सिर्फ 26 अभ्यर्थी पात्र पाए गए। वहीं, अनारक्षित वर्ग में 184 पदों के लिए 552 और एससी वर्ग में 106 पदों के लिए 325 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए पात्र घोषित किए गए। छह कमेटियों ने लिया वादन टेस्ट पुलिस मुख्यालय ने अदालत के समक्ष भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। वादन टेस्ट के लिए छह अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थीं। प्रत्येक कमेटी की अध्यक्षता आईपीएस अधिकारी कर रहे थे, जबकि एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी और संबंधित विशेषज्ञ भी इसमें शामिल थे। परीक्षण के दौरान कमेटी के सदस्यों के पास बॉडी-वॉर्न कैमरे मौजूद थे। इनके जरिए वादन टेस्ट की पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग किए जाने की बात पुलिस मुख्यालय ने अदालत को बताई। तीन चरणों में पूरा होना है चयन पुलिस बैंड भर्ती की चयन प्रक्रिया तीन चरणों में निर्धारित की गई है। पहला चरण क्वालिफाइंग स्किल टेस्ट: इस चरण में अभ्यर्थी द्वारा चुने गए पसंदीदा वाद्य यंत्र का परीक्षण किया गया। इसके अंक अंतिम मेरिट में शामिल नहीं किए जाने हैं। दूसरा चरण : बैंड वादन टेस्ट: यह चरण 60 अंकों का है। इसके अलावा तीन अलग-अलग वाद्य यंत्र बजाने पर पांच-पांच बोनस अंक का प्रावधान है। इस तरह वादन टेस्ट के अधिकतम अंक 75 निर्धारित हैं। तीसरा चरण : इंटरव्यू: इंटरव्यू के लिए 25 अंक निर्धारित किए गए हैं। अंतिम मेरिट वादन टेस्ट के 75 और इंटरव्यू के 25, यानी कुल 100 अंकों के आधार पर तैयार की जानी है। जबलपुर हाई कोर्ट में लंबित है एक और याचिका इंदौर हाईकोर्ट ने फिलहाल तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी और धांधली के आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। हालांकि, भर्ती से संबंधित एक अन्य मामला जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित है। इसलिए पुलिस बैंड भर्ती की अंतिम चयन प्रक्रिया पर पूरी तरह स्पष्ट स्थिति उस याचिका के निर्णय के बाद ही सामने आएगी।
