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कहीं छत नहीं, कहीं टॉयलेट-बिजली-पानी तक नहीं:CJP ने कहा- बरगद के नीचे पढ़ रहे बच्चे…सरकार स्कूलों का ऑडिट शुरू कराए

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को लेकर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) ने गुरुवार को भोपाल में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अभियान के दौरान दमोह, छतरपुर, रायसेन, नरसिंहपुर, ग्वालियर, भिंड, बालाघाट, सिवनी और भोपाल समेत कई जिलों के सरकारी स्कूलों का मौके पर जाकर आकलन करने का दावा किया गया। अभियान से जुड़ी टीम ने स्कूलों की इमारत, बिजली, पानी, टॉयलेट, बाउंड्री और अन्य बुनियादी सुविधाओं की तस्वीरें और वीडियो जुटाए हैं। CJP से जुड़ीं मेहरागांव ग्राम पंचायत की सरपंच माया विश्वकर्मा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि कई स्कूलों में बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा असर गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के बच्चों पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को केवल नए स्कूल या भवन बनाने की बात करने के बजाय मौजूदा स्कूलों की स्थिति का भी नियमित सोशल ऑडिट कराना चाहिए। ‘बरगद के नीचे पढ़ रहे बच्चे, कहीं गोबर पड़ा मिला’ माया विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने अब तक करीब 10 से 15 जिलों में स्कूलों का निरीक्षण किया है। इनमें ग्वालियर, भिंड, मुरैना, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, छतरपुर और रायसेन सहित अन्य जिले शामिल हैं। उनके मुताबिक, कई जगह स्कूल भवन जर्जर हैं। कुछ स्कूलों में बच्चे खुले में पढ़ने को मजबूर हैं। रायसेन जिले के नरहरा गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां बच्चे नर्मदा नदी के किनारे बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, स्कूल भवन को करीब पांच साल पहले जर्जर घोषित कर बंद कर दिया गया था और नया भवन दो साल पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन निर्माण अब तक नहीं हुआ। माया ने कहा, “जब भवन की राशि स्वीकृत हो चुकी है तो निर्माण क्यों नहीं हो रहा? बारिश में बच्चे कैसे पढ़ेंगे?” ‘दफ्तर में बैठकर अधिकारी क्या कर रहे हैं?’ माया विश्वकर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों को खुद स्कूलों की स्थिति का आकलन करना चाहिए। उनका सवाल है कि जिन स्कूलों में बिजली, पानी, टॉयलेट या भवन की सुविधा नहीं है, उनकी जानकारी संबंधित अधिकारी शासन तक क्यों नहीं पहुंचाते। उन्होंने कहा कि उनका अभियान केवल शिकायत करने के लिए नहीं है। पहले समस्या को मौके पर देखा जा रहा है, उसके बाद उसका दस्तावेजीकरण कर समाधान का सुझाव दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से ‘School Theek Karo’ डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किया गया है, जहां नागरिक स्कूलों की समस्याओं की तस्वीर, वीडियो और अन्य माध्यमों से जानकारी दे सकते हैं। मेहरागांव में ग्रामीणों के सहयोग से मॉडल स्कूल बनाने का प्रस्ताव माया विश्वकर्मा ने अपने ग्राम पंचायत क्षेत्र मेहरागांव के स्कूल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले नरसिंहपुर कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया था। इससे पहले बच्चों और बुजुर्गों के साथ एक दिन का धरना भी दिया गया। उनके मुताबिक, उन्होंने सरकार के सामने एक प्रस्ताव रखा है कि ग्रामीणों और जनभागीदारी से स्कूल का निर्माण कराया जाए। उनकी योजना मेहरागांव में ऐसा स्कूल बनाने की है, जिसमें पहली से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए बेहतर भवन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों। माया ने कहा कि गांव के लोग स्कूल के लिए आर्थिक सहयोग देने को तैयार हैं। वह खुद भी अपने पुरस्कारों से मिली राशि में से योगदान देने की बात कहती हैं। उनके अनुसार उनके कुछ साथी और अन्य लोग भी स्कूल निर्माण के लिए अंशदान देने को तैयार हैं। ‘सरकार कह रही है, प्राथमिक स्कूल पीपीपी मॉडल पर नहीं चल सकता’ माया विश्वकर्मा का दावा है कि स्कूल को जनभागीदारी या पीपीपी मॉडल से विकसित करने के प्रस्ताव पर उन्हें बताया गया कि इसके लिए मौजूदा व्यवस्था में प्रावधान नहीं है। उनके अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय गोयल ने उनसे कहा कि प्राथमिक स्कूल को पीपीपी मॉडल पर चलाने का प्रावधान नहीं है और इसके लिए मुख्यमंत्री एवं मंत्री के स्तर पर नीति में बदलाव कराना होगा। माया का कहना है कि यदि नागरिक स्कूल बनाने में सहयोग करने के लिए तैयार हैं तो सरकार को ऐसी जनभागीदारी की व्यवस्था बनाने पर विचार करना चाहिए। ‘मंत्री ने कहा था- जानकारी होती तो धरने की नौबत नहीं आती’ माया विश्वकर्मा ने स्कूल शिक्षा मंत्री के गृह जिले नरसिंहपुर में स्कूलों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि पिछले साल 2 अक्टूबर को ग्रामीणों के साथ गांधी जयंती के मौके पर जिला मुख्यालय पर एक दिन का उपवास और धरना दिया गया था। उनके अनुसार, उस समय स्कूल शिक्षा मंत्री ने कथित तौर पर कहा था कि यदि उन्हें पहले से जानकारी होती तो धरने की स्थिति नहीं बनती। माया का कहना है कि इसके बावजूद करीब एक साल बीतने के बाद भी मेहरागांव के स्कूल का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने मंत्री के विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बहुल इलाकों के स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके गृह ग्राम लोलरी के आसपास के कई स्कूलों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। ‘शिक्षक भर्ती, स्कूल बंद होने और बजट पर भी सवाल’ माया विश्वकर्मा ने प्रदेश में स्कूल बंद होने, शिक्षक भर्ती और अतिथि शिक्षकों के मुद्दे को भी इससे जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर शिक्षक भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई स्कूलों के बंद होने की बातें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वहां बजट और संसाधनों का उपयोग किस तरह हो रहा है। उनका कहना है कि स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि नियमित निगरानी और सामाजिक ऑडिट की व्यवस्था भी जरूरी है। CJP की दो प्रमुख मांगें ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत CJP ने मेहरागांव स्कूल के लिए तत्काल सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था और स्थायी समाधान की मांग की है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी प्राथमिक स्कूलों का बुनियादी ढांचे से जुड़ा व्यापक ऑडिट कराने और सामने आने वाली कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर करने की मांग रखी गई है। अभियान में कहा गया कि उद्देश्य केवल समस्याएं गिनाना नहीं, बल्कि समस्या देखना, प्रमाण जुटाना, दस्तावेज तैयार करना और समाधान प्रस्तावित करना है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में Association for Protection of Civil Rights (APCR) की ओर से जुबैर भाई और उनकी टीम भी मौजूद रही।

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