करीब दो माह पहले इंदौर में मप्र वित्त निगम की एमडी और 2009 बैच की आईएएस वंदना वैद्य के फार्म हॉउस के जुआ कांड में सस्पेंड मानपुर टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे का सस्पेंशन ऑर्डर हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। गुरुवार को मामले में हाई कोर्ट ने इस लेकर आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में लिखा कि यह आदेश पूरी तरह से मनमाना, दिखावटी और प्रतिशोधात्मक है। याचिकाकर्ता द्वारा साफ लिखा है कि आईएएस का घटनास्थल बदलने के लिए दबाव आया। जब इसका पालन नहीं किया और सत्यनिष्ठा के साथ एफआईआर में सही लिखा तो सस्पेंड कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि इन आरोपों का प्रतिवादियों द्वारा ना खंडन किया गया, ना ही समर्थन, पूरे मामले में चुप्पी साधी रखी गई। लेकिन घटना का पूरा क्रम बताता है कि यह आदेश प्रतिशोधात्मक था और उच्च स्तर के आदेश का पालन नहीं करने के कारण किया गया। पुलिस द्वारा की गई जांच में भी कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है और पुराने केस गिनाए गए हैं। गौरतलब है कि 10-11 मार्च की रात आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस पर जुआ खेलते लोगों को पकड़ा गया था। इसके बाद मानपुर टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे, एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को सस्पेंड कर दिया गया। कुछ दिन बाद एसआई और एएसआई बहाल हो गए, लेकिन टीआई पर कार्रवाई जारी रही और उन्हें बुरहानपुर अटैच कर दिया गया था। पिछले दिनों इस मामले में हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में जहां पुलिस की कार्रवाई पर सख्त सवाल उठे, वहीं टीआई ने आरोप लगाया कि जुआ पकड़ने के बाद उन पर महिला आईएएस अधिकारी का नाम एफआईआर से हटाने का दबाव बनाया गया। कोर्ट ने पूछा था जब कार्रवाई हुई तो आईएएस के बयान क्यों नहीं लिए गए और फार्म हॉउस पर CCTV क्यों नहीं थे? साथ ही टिप्पणी की थी कि अगर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी को ही सस्पेंड किया जाएगा, तो कोई निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करेगा। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। दस्तावेज से साफ है कि वे गश्त पर थे
हाईकोर्ट ने यह भी लिखा कि इसी तरह का जुआकांड सिमरोल थाने में भी पकड़ा गया, लेकिन इसमें थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस तरह की पिक एंड चूज पॉलिसी नहीं चल सकती। जबकि मानपुर टीआई द्वारा की गई कार्रवाई अपराध को रोकने वाली थी और दस्तावेज से साफ है कि वह गश्त पर थे और मुखबिर से सूचना मिलने पर मौके पर गए और जुआ पकड़ा। अन्य किसी द्वारा यह सूचना नहीं दी गई थी। ना ही यह कहीं पर आया कि पहले से ही जुआ चल रहा था और टीआई को इसकी खबर थी।हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि घटना से यह साफ दिख रहा है कि जब याचिकाकर्ता द्वारा आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई तो उसे ट्रांसफर कर दिया गया। इसके चलते इस मामले में आदेश देने की स्थिति पैदा हो गई और एसपी द्वारा 11 मार्च को दिया गया सस्पेंशन आदेश निरस्त किया जाता है। इसके चलते हुई सभी कार्रवाई को भी निरस्त किया जाता है। हालांकि शासन पक्ष कानून के अनुसार उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। टीआई बोले थे याचिका लगाने पर प्रताड़ित किया
टीआई हिहोरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन पर आईएएस का नाम एफआईआर में न जोड़ने और घटनास्थल बदलने का दबाव बनाया गया। इनकार करने पर उसी दिन सस्पेंड कर दिया गया। याचिका लगाने के बाद ट्रांसफर कर प्रताड़ित किया गया। दो याचिकाएं, सुनवाई जारी टीआई ने यह भी कहा था कि 15 मार्च को सिमरोल में बड़ा जुआ पकड़ा गया, लेकिन वहां के टीआई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर भी कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला। टीआई ने सस्पेंशन और चार्जशीट को चुनौती देते हुए दो याचिकाएं दायर की। सस्पेंशन पर फैसला सुरक्षित रखा था, जबकि चार्जशीट पर सुनवाई बाकी है। ये खबर भी पढ़ें… महिला IAS के फार्म हाउस में चल रहा था जुआ इंदौर जिले के महू के मानपुर क्षेत्र में महिला IAS अधिकारी के नाम पर दर्ज फार्महाउस में चल रहे जुए के बड़े अड्डे का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में 18 जुआरियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 13 लाख 67 हजार 971 रुपए नकद समेत करीब 28.67 लाख रुपए का सामान जब्त किया गया है। पूरी खबर पढ़ें
