मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से तय की गई शुक्रवार रात 8 बजे की डेडलाइन खत्म होने के करीब दो घंटे बाद रात 10 बजे पुलिस विभाग ने तबादला आदेश जारी किए। इनमें EOW के आरक्षक, सब-इंस्पेक्टर (SI) और इंस्पेक्टर स्तर के कर्मचारियों की तबादला सूची शामिल है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि उनकी A+ नोटशीट में रिकमेंड किए गए सभी तबादला मामलों का निराकरण कर रात 8 बजे तक आदेश जारी कर दिए जाएं। हालांकि, तय समय बीतने के बावजूद कई विभागों में तबादला आदेश अब भी लंबित हैं। बता दें कि गृह विभाग सीएम के पास ही है। सभी विभागों में ए + कैटेगरी के पेंडिंग तबादलों की संख्या 250 के करीब है। A+ मामलों की अनदेखी तो बाकी का क्या बैठक में मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा था, “A+ मींस A+… जिसे हटाना है, हटाओ या मत हटाओ, लेकिन प्रकरण का निराकरण करो।” उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य तौर पर किसी फाइल पर A+ नहीं लिखा जाता। मुख्यमंत्री ने कहा था कि जब किसी मामले को A+ श्रेणी में रखा गया है तो उस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल भी उठाया कि- जब A+ मामलों की ही अनदेखी हो रही है, तो बाकी मामलों का क्या होगा? कैलाश, उदय और विजय शाह के विभागों में सबसे ज्यादा पेंडेंसी समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के सामने A+ मॉनिटर के तबादला, विकास कार्य और अन्य मामलों की विभागवार सूची रखी गई। सबसे ज्यादा लंबित प्रकरण नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के विभागों के रहे। मुख्यमंत्री के अधीन गृह विभाग में भी कई मामले लंबित पाए गए। मुख्यमंत्री ने सभी विभाग प्रमुखों से जल्द निराकरण रिपोर्ट देने को कहा। पहले 1 जून, फिर 4 जुलाई रात 8 बजे तक का निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को याद दिलाया कि 20 मई को तबादला नीति लागू करते समय कैबिनेट ने फैसला किया था कि A+ मॉनिटर के लंबित प्रकरणों का निराकरण 31 मई तक कर 1 जून से आदेश जारी कर दिए जाएं। ऐसा नहीं होने पर शुक्रवार को उन्होंने नई समय-सीमा तय करते हुए रात 8 बजे तक सभी आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे। यह भी जानिए… विभागों ने दी पद रिक्त नहीं होने की दलील मुख्यमंत्री की नाराजगी पर विभाग प्रमुखों ने कहा कि जिन स्थानों पर A+ मॉनिटर के तहत तबादले प्रस्तावित हैं, वहां कई पद रिक्त नहीं हैं। ऐसे में तत्काल तबादला आदेश जारी करने पर वेतन और पदस्थापना संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि व्यवस्था बनाना विभागों की जिम्मेदारी है, लेकिन A+ मामलों का निराकरण हर हाल में होना चाहिए। घोषणाओं के क्रियान्वयन का 3 दिन में रोड मैप मुख्यमंत्री ने जिलों में अपनी घोषणाओं के क्रियान्वयन में देरी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विभागों से चर्चा के बाद ही घोषणाएं की जाती हैं, फिर भी कई मामलों में महीनों तक “कार्यवाही प्रचलन में है” लिखकर फाइलें लंबित रखी जाती हैं। उन्होंने सभी विभागों को तीन दिन के भीतर घोषणाओं के क्रियान्वयन की समय-सीमा और कार्ययोजना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए। ——————— यह खबर भी पढ़ें MP में मिनिस्टर के बंगले पर ट्रांसफर डील:ऑन कैमरा बाबू बोला- मंत्री, प्रभारी मंत्री सबका हिस्सा; SDO के 15, नर्स के 5 लाख फिक्स मध्य प्रदेश में हालिया तबादलों के दौरान मंत्रियों के स्टाफ से लेकर बाबुओं तक पर रिश्वत की डील करने के आरोप सामने आए। दैनिक भास्कर के स्टिंग में मंत्री के बंगले पर स्टाफ सदस्य, वल्लभ भवन का एक बाबू और ऊर्जा विकास निगम का एक कर्मचारी ट्रांसफर के बदले लाखों रुपए मांगते और सौदेबाजी करते कैमरे में कैद हुए। पढ़ें पूरी खबर
