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BJP बैठक की इनसाइड स्टोरी:शिवप्रकाश बोले- जीत के उत्साह में डूबिए मत, नेताओं से कहा- मीडिया में नहीं फील्ड पर एक्टिव रहे, मेहनत करें

रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में 2 दिनों तक चली बीजेपी की मैराथन बैठकों में मंच पर जितनी औपचारिक बातें हुईं, उससे कहीं ज्यादा चर्चा बंद कमरों में हुई। 12 मई को प्रदेश पदाधिकारियों और कोर कमेटी की बैठक हुई, जबकि अगले दिन प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई। नई प्रदेश कार्यकारिणी की यह पहली बैठक थी, इसलिए संगठन के अंदर इसे सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं बल्कि नई दिशा तय करने वाली मीटिंग माना जा रहा था। बैठक के दौरान सबसे ज्यादा जिस बयान की चर्चा रही, वह बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश का था। उन्होंने नेताओं और पदाधिकारियों को साफ कहा कि पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में मिले ‘विजय के उत्साह में डूब मत जाइए, अब संगठन को और ज्यादा मेहनत करनी है।’ बंगाल जीत के बाद छत्तीसगढ़ मॉडल पर फोकस बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल चुनाव की जीत का जिक्र कई बार हुआ। नेताओं ने इसे संगठनात्मक मॉडल की सफलता बताया। चर्चा यह रही कि जिस तरह पश्चिम बंगाल में बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत किया गया, उसी मॉडल को अब छत्तीसगढ़ में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लागू किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों से आए पदाधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि सिर्फ सोशल मीडिया और बयानबाजी से संगठन मजबूत नहीं होगा। बूथ स्तर पर नियमित संपर्क, कार्यकर्ता बैठक और फील्ड एक्टिविटी बढ़ानी होगी। ‘बंगाल की जीत, पार्टी विचारधारा की जीत’ संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने पश्चिम बंगाल की जीत को सिर्फ चुनावी सफलता नहीं बल्कि वैचारिक जीत बताया। कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की कर्मभूमि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत पार्टी की विचारधारा की जीत है। साथ ही उन्होंने असम समेत दूसरे राज्यों में मिली सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी विकसित भारत और समरस समाज के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है। नई कार्यकारिणी को पहला संदेश ‘संगठन चुनावी मोड में रहे’ बैठक में बार-बार एक ही बात दोहराई गई कि संगठन अब लगातार चुनावी मोड में रहेगा। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी अब पंचायत और निकाय चुनावों पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं। यही वजह है कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में एक नया संगठनात्मक कैलेंडर तय किया गया। इसके तहत हर महीने 4 स्तरों पर बैठकें होंगी। पहले हफ्ते में मंडल पदाधिकारी और कार्यसमिति की बैठक, दूसरे सप्ताह में जिले की बैठक, तीसरे सप्ताह में शक्ति केंद्र बैठक और चौथे सप्ताह में बूथ समिति की बैठक आयोजित की जाएगी और इसी दिन पीएम मोदी की मन की बात कार्यकर्ता एक साथ बैठकर करेंगे।। पार्टी का मानना है कि लगातार समीक्षा और जमीनी फीडबैक के जरिए संगठन को एक्टिव रखा जा सकता है। बैठक में मौजूद नेताओं के मुताबिक, इस बार सिर्फ भाषण नहीं हुए, बल्कि हर स्तर के पदाधिकारियों को ‘माइक्रो मॉनिटरिंग’ का संदेश दिया गया। बूथ स्तर तक रिपोर्टिंग, कार्यक्रमों की समीक्षा और राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी सीधे ऊपर तक पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा हुई। प्रदेश प्रभारी के बिना हुई बैठक नई प्रदेश कार्यकारिणी, पदाधिकारी और कोर कमेटी की बैठक में पहली बार ऐसा हुआ जब प्रदेश प्रभारी मौजूद नहीं रहे। छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रभारी नितिन नबीन इस समय राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 20 जनवरी को उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद से यह चर्चा लगातार चल रही है कि छत्तीसगढ़ को जल्द नया प्रभारी मिल सकता है। बैठक के दौरान भी कई नेताओं के बीच यही चर्चा रही कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद छत्तीसगढ़ संगठन में भी नए समीकरण दिखाई दे सकते हैं। पार्टी के अंदरखाने यह माना जा रहा है कि जून तक नए प्रभारी को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। कोर कमेटी में बदलाव ने बढ़ाई हलचल 2 दिनों की बैठकों में सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा कोर कमेटी में हुए बदलाव को लेकर रही। बीजेपी की कोर कमेटी से कई बड़े और पुराने चेहरों को बाहर कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, पूर्व मंत्री पुत्रूलाल मोहले, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, मंत्री रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह, बृजमोहन और गौरीशंकर अग्रवाल जैसे नेताओं को कमेटी से बाहर किया गया है। वहीं नई सूची में वित्त मंत्री ओपी चौधरी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, अमर अग्रवाल, लता उसेंडी और शिवरतन शर्मा को जगह दी गई है। हालांकि पार्टी इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन गलियारों में यही चर्चा रही कि बीजेपी अब धीरे-धीरे नई पीढ़ी और एक्टिव फील्ड नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम कर रही है। बड़ी गाड़ियों के कारवां पर भी चर्चा बैठक के दौरान एक और दिलचस्प चर्चा नेताओं के काफिलों को लेकर रही। पेट्रोल-डीजल बचाने और कारकेड कम करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपील करते रहे हैं। कई राज्यों में मंत्री और नेता अपने काफिले कम भी कर रहे हैं। लेकिन बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बड़ी संख्या में वाहन पहुंचे। कई पदाधिकारी दो-दो और तीन-तीन गाड़ियों के साथ पहुंचे। पार्किंग से लेकर मुख्य गेट तक गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहीं। हालांकि कुछ बीजेपी प्रवक्ता ई-रिक्शा से भी पहुंचे, जिसकी चर्चा पार्टी दफ्तर में होती रही। लेकिन कई नेताओं के बीच यह सवाल भी उठा कि जब डिजिटल दौर में अधिकांश बैठकें वर्चुअल हो सकती हैं, तब इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के साथ बैठक आयोजित करना क्या जरूरी था? सरकार और संगठन के बीच तालमेल पर जोर बैठक के दौरान सरकार और संगठन के बीच तालमेल का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार की योजनाओं और फैसलों को बूथ स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संगठन की होगी। अंदरखाने क्या है सबसे बड़ा संदेश? बैठकों के बाद बीजेपी के अंदर सबसे बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि पार्टी अब सिर्फ सत्ता चलाने के बजाय संगठन को लगातार एक्टिव रखने की रणनीति पर काम कर रही है। शिवप्रकाश का ‘विजय के उत्साह में मत डूबिए’ वाला संदेश भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बीजेपी नेतृत्व यह संकेत देना चाहता है कि बंगाल और दूसरे राज्यों की जीत के बाद भी संगठन को ढील नहीं दी जाएगी। नई कार्यकारिणी की पहली बैठक में जिस तरह बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक हर महीने बैठकें तय की गईं, कोर कमेटी में बदलाव हुआ और पंचायत-निकाय चुनावों पर फोकस बढ़ाया गया, उससे साफ है कि बीजेपी ने अगले राजनीतिक चरण की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। ………………… बैठक से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

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