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राजेंद्र भारती बोले- मुझे 70 करोड़ का ऑफर मिला था:केंद्रीय मंत्री के OSD ने दिया था प्रस्ताव, ठुकराया तो इसी केस में निपटाने की दी धमकी

भोपाल के प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी सदस्यता जाने और हाल ही में मिली सजा को एक गहरा राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। भारती ने कहा कि उन्हें झुकने और बिकने के लिए 70 करोड़ रुपए तक का प्रलोभन दिया गया था, जिसे ठुकराने पर उन्हें निपटाने की धमकी दी गई थी। 70 करोड़ का ऑफर और केंद्रीय मंत्री के ओएसडी का प्रलोभन राजेंद्र भारती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा- उन्होंने कई बार हमसे संपर्क किया। मई 2024 में दिल्ली में एक केंद्रीय मंत्री के ओएसडी ने मुझसे मुलाकात की। उन्होंने मुझे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का संदेश देते हुए कहा कि आप सारे केस वापस ले लीजिए, भाजपा में आ जाइए और आपको किसी निगम-मंडल का अध्यक्ष बना दिया जाएगा। उन्होंने मेरे अब तक के नुकसान का मूल्यांकन करके रखा था और कहा कि हम आपको 70 करोड़ रुपए दिलवाएंगे। जब मैंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया, तो मुझे जाते-जाते धमकी दी गई कि इसी केस में तुम्हें निपटवा दिया जाएगा। मैं उस ओएसडी का नाम और स्थान आने वाले समय में सार्वजनिक करूंगा।’ मंत्री विश्वास सारंग पर मां के अपमान का आरोप भारती ने भावुक होते हुए कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने मीडिया में हमारी स्वर्गवासी मां के प्रति जो अपमानजनक बातें कहीं, वे पूरी तरह असहनीय हैं। हमारा परिवार राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में बहुत पुराना है। मेरे पिता श्याम सुंदर श्याम दतिया से पांच बार विधायक रहे, मेरी चाची मंत्री रहीं। जो व्यक्ति खुद भ्रष्टाचार से घिरा है, वह षड्यंत्र करके हमें बदनाम करना चाहता है। सारंग जी के विभाग का ही यह मामला है और उन्होंने झूठी जांच रिपोर्ट बनवाकर मेरी दिवंगत मां की छवि खराब करने की कोशिश की है।” पेड न्यूज और फर्जी एफिडेविट की कानूनी लड़ाई अपनी और नरोत्तम मिश्रा की कानूनी जंग का इतिहास बताते हुए भारती ने कहा कि यह संघर्ष 2008 से चल रहा है। जब नरोत्तम मिश्रा दतिया आए, तो उन्होंने चुनाव जीतने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए। भारती के अनुसार, “मैंने 2009 में उनके खिलाफ पेड न्यूज और फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायत निर्वाचन आयोग में की थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को पैसे और गाड़ियां बांटते हुए पकड़ाया था, जिसकी एफआईआर भी दर्ज है। इसी रंजिश के चलते उन्होंने मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ करीब 400 फर्जी मुकदमे दर्ज कराए, हमारे व्यवसाय बंद करवा दिए और मेरे भाई तक को जेल भिजवाया। लेकिन हम न डरे, न बिके और 2023 में जनता ने उन्हें चुनाव हराकर इसका जवाब दिया।” एफडी मामले में षड्यंत्र और कोर्ट को गुमराह करने का दावा जिस मामले में राजेंद्र भारती को सजा हुई है, उस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह बैंक के आंतरिक सुधार का मामला था जिसे भ्रष्टाचार का रूप दे दिया गया। भारती ने बताया, “मेरी मां ने पिता के नाम से 10 लाख की एफडी कराई थी। अपेक्स बैंक के सर्कुलर के आधार पर मैनेजर ने कार्य किया था, लेकिन जॉइंट रजिस्ट्रार ने दबाव में आकर गलत रिपोर्ट दी। पुलिस ने जब कार्रवाई नहीं की तो प्राइवेट इस्तगासा लगाया गया। 8 साल बाद षड्यंत्रपूर्वक एक कर्मचारी को सह-आरोपी बनाया गया ताकि मुझे फंसाया जा सके। गृह विभाग के अधिकारियों ने कोर्ट को गलत तथ्य दिए और हमारे गवाहों तक को डराया-धमकाया गया।” सुप्रीम कोर्ट से केस ट्रांसफर और गवाहों के अपहरण का आरोप भारती ने आरोप लगाया कि नरोत्तम मिश्रा ने न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए हर संभव कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि “अक्टूबर 2024 में हमारे बचाव पक्ष के गवाहों का पुलिस की गाड़ी से अपहरण करवाया गया और उन्हें ग्वालियर के एक रिजॉर्ट में ठहराकर खुद नरोत्तम मिश्रा ने धमकी दी। जब हमें लगा कि यहां निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है, तब हमने सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर पिटीशन लगाई। कपिल सिब्बल ने हमारे पक्ष में दलीलें दीं और जब मोबाइल लोकेशन और सीडीआर के तथ्य सामने आए, तब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली ट्रांसफर किया। दिल्ली में भी उनके बेटे और भतीजे ने वकीलों के माध्यम से कोर्ट को गुमराह करने का षड्यंत्र रचा।” अयोग्यता और राहुल गांधी के संशोधन का जिक्र अपनी विधायकी जाने के तकनीकी पहलू पर बात करते हुए राजेंद्र भारती ने कहा कि 2 अप्रैल को कोर्ट का फैसला आते ही विरोधियों ने उन्हें अयोग्य घोषित कराने में जल्दबाजी दिखाई। उन्होंने कहा, ‘पहले जनप्रतिनिधियों को उच्च न्यायालय जाने तक का समय मिलता था, लेकिन राहुल गांधी ने जो संशोधन कराया था, उसके अनुसार यदि निचली अदालत दो साल से अधिक की सजा देती है तो जनप्रतिनिधि तत्काल अयोग्य हो जाता है। इसी का फायदा उठाकर मुझे अयोग्य घोषित कराया गया ताकि उपचुनाव की राह खोली जा सके। मैं राणा सांगा की तरह इस पूरे षड्यंत्र का शिकार हुआ हूं, लेकिन मैं इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करता हूं और तथ्यों के साथ इस लड़ाई को जारी रखूंगा।’ इधर, भाजपा का पलटवार- 10 लाख का अपराधी 70 करोड़ कैसे ठुकराएगा? राजेंद्र भारती के इन आरोपों पर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अग्रवाल ने कहा कि जब कांग्रेस नेताओं की दलीलें अदालत में खारिज हो जाती हैं, तो वे कैमरों के सामने आकर जनता को गुमराह करने लगते हैं। यह केस दिग्विजय सिंह की सरकार के समय दर्ज हुआ था और अदालत के निर्णय पर ही इसकी कार्यवाही आगे बढ़ी। यह अत्यंत हास्यास्पद है कि जिस व्यक्ति पर 10 लाख रुपए के गबन का अपराध सिद्ध हो चुका हो, वह 70 करोड़ रुपए का ऑफर ठुकराने की बात कर रहा है। यह सीधे तौर पर अदालत की अवमानना है और कांग्रेसी केवल खुद को बचाने के लिए झूठ का भ्रम फैला रहे हैं।

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