दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था। इसकी परमिशन नहीं थी। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कई हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे। पुलिस ने कहा कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से मारपीट की, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा। हालात संभालने के लिए बल प्रयोग किया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया गया। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर ये जानकारी दी। इसे पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं के जवाब के तौर पर पेश किया गया है। चार संबंधित याचिकाओं में भी यही जवाब इस्तेमाल होगा। पुलिस के हलफनामें में जवाब, 5 पॉइंट में समझें बल प्रयोग की जांच कोर्ट की प्रस्तावित समिति कर सकती है। दिल्ली पुलिस ने समिति के साथ सहयोग करने की बात कही है। 20 जुलाई: संसद मार्च की टाइमलाइन NEET पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ियों-सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने जंतर-मंतर से संसद मार्च का ऐलान किया। 19 जुलाई से छात्र और अभ्यर्थी दिल्ली पहुंचने लगे थे। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोक दिया। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान संसद मार्ग, जनपथ और रायसीना रोड पर तनाव बढ़ गया। भीड़ के कुछ हिस्सों ने बैरिकेड तोड़ने, पथराव और तोड़फोड़ की कोशिश की। इसके बाद आंसू गैस और बल प्रयोग किया गया। 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया और कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों ने झड़प को लेकर अलग-अलग दावे किए। CJP ने जरूरत से ज्यादा बल और लाठीचार्ज का आरोप लगाया, जबकि पुलिस ने कहा कि मार्च की अनुमति नहीं थी और हालात बिगड़ने पर कार्रवाई की गई। 49 दिन चला CJP का प्रदर्शन, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था। 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जबकि CJP ने पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया। पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई।
