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कैंसर से बचाने में भी इंदौर-भोपाल फिसड्डी:इंदौर में सिर्फ 4% किशोरियों को लगी एचपीवी वैक्सीन; 70% के साथ डिंडौरी आगे

मध्यप्रदेश में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए चलाए जा रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की ताजा रिपोर्ट चौंकाने वाली तस्वीर पेश करती है। जहां एक तरफ डिंडौरी, बालाघाट और राजगढ़ जैसे जिले 70 से 79% तक कवरेज के साथ टॉप पर हैं, वहीं बड़े शहर इस दौड़ में पीछे छूट गए हैं। इंदौर महज 3.96 प्रतिशत कवरेज के साथ सबसे आखिरी स्थान पर है, जबकि राजधानी भोपाल भी 12.65% के साथ 43वें स्थान पर पहुंच गया है। यह स्थिति बताती है कि जागरूकता और संसाधनों के बावजूद बड़े शहरों में अभियान अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा। खास बात यह है कि बड़े शहर सिर्फ स्वास्थ्य के क्षेत्र में नहीं बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी पिछड़ते जा रहे हैं। इसी तरह का ट्रेंड हाल में जारी हुए 5वीं-8वीं के बोर्ड एग्जाम के दौरान देखने को मिला। देश के टॉप स्टेट में शामिल है मध्यप्रदेश राज्य स्तर पर एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान का कुल लक्ष्य 8 लाख 3 हजार 684 किशोरियों को टीका लगाने का है। अब तक 2 लाख 8 हजार 873 का टीकाकरण हो चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 25.99 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का प्रदर्शन बेहतर है। टॉप स्टेट्स में एमपी शामिल है। हालंकि, शहरी क्षेत्रों के आंकड़े इस प्रदर्शन को कमजोर बना रहे हैं। हर साल सवा लाख महिलाएं आ रहीं चपेट में
भारत में हर साल करीब 1.25 लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की चपेट में आती हैं और लगभग 75 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में अक्सर लक्षण नहीं दिखते। डॉक्टरों का कहना है कि किशोरावस्था में वैक्सीनेशन भविष्य में इस बीमारी से बचाव का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। ऐसे करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन
अभिभावक यू-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा सीधे नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर भी संपर्क किया जा सकता है। भोपाल में यह सुविधा 18 केंद्रों पर उपलब्ध है, जिनमें एम्स भोपाल, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। टीकाकरण के समय उम्र का प्रमाण, मोबाइल नंबर और अभिभावक की सहमति जरूरी होगी। टॉप पर छोटे जिले, 70% से ज्यादा कवरेज रिपोर्ट के अनुसार सबसे बेहतर प्रदर्शन डिंडौरी जिले का रहा है, जहां 79.26 प्रतिशत किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। इसके बाद बालाघाट (70.31%) और राजगढ़ (70.19%) दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
मंडला (67.74%), खरगोन (56.59%) और खंडवा (56.39%) भी 50 प्रतिशत से अधिक कवरेज के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल हैं। इन जिलों में स्वास्थ्य अमले की सक्रियता और जमीनी स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। 20 से 40% के बीच वाले जिले प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं जहां टीकाकरण की रफ्तार औसत बनी हुई है। सागर (42.01%), रायसेन (39.62%), कटनी (35.41%) और मुरैना (33.92%) जैसे जिले 30 से 40 प्रतिशत के बीच हैं। इसी श्रेणी में जबलपुर (30.44%), टीकमगढ़ (30.86%) और सिवनी (30.66%) भी आते हैं। सबसे चौंकाने वाला पहलू बड़े शहरों का कमजोर प्रदर्शन है। इंदौर सिर्फ 3.96 प्रतिशत कवरेज के साथ प्रदेश में सबसे आखिरी स्थान पर है। भोपाल 12.65 प्रतिशत के साथ 43वें स्थान पर है, जबकि ग्वालियर 23.52 प्रतिशत और जबलपुर 30.44 प्रतिशत पर है। यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इन शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं और संसाधन सबसे अधिक उपलब्ध हैं, फिर भी टीकाकरण की रफ्तार बेहद धीमी है। इन जिलों का प्रदर्शन भी चिंताजनक
रिपोर्ट में कई जिले ऐसे भी हैं जहां स्थिति बेहद चिंताजनक है। रीवा (9.59%), धार (7.93%), शिवपुरी (7.88%) और इंदौर (3.96%) जैसे जिलों में टीकाकरण 10 प्रतिशत से भी नीचे है। इन जिलों में जागरूकता की कमी, टीकाकरण को लेकर हिचक और अभियान की कमजोर मॉनिटरिंग को संभावित कारण माना जा रहा है।

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