मध्यप्रदेश के सवा करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया वित्त वर्ष (2026-27) महंगाई का करंट लेकर आ रहा है। विद्युत नियामक आयोग ने नई दरों पर मुहर लगा दी है, जिससे बिजली औसतन 4.80% महंगी हो गई है। हालांकि, यह बढ़ोतरी सभी के लिए एक जैसी नहीं है। आयोग ने टैरिफ का ऐसा गणित बैठाया है कि मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग, जो कूलर-एसी का उपयोग करते हैं, उनकी जेब से सबसे ज्यादा वसूली होगी। 151 यूनिट की खपत पार करते ही ‘फिक्स्ड चार्ज’ का स्लैब बदल जाएगा और प्रति यूनिट दर भी बढ़ जाएगी। इस बार सबसे बड़ी राहत ‘न्यूनतम शुल्क’ खत्म करने के रूप में दी गई है, लेकिन इसकी भरपाई फिक्स्ड चार्ज बढ़ाकर कर ली गई है। 200 यूनिट बिजली खर्च करने वाले शहरी परिवार का बिल अब हर महीने करीब ₹85 बढ़ जाएगा, वहीं 500 यूनिट की खपत पर यह बोझ ₹213 तक जा पहुंचा है। राहत की बात : इस महीने बिजली बिल में थोड़ी राहत भी मिलेगी। फ्यूल एंड पावर परचेज सरचार्ज (एफपीपीएस) माइनस 0.63% रखा गया है। यानी ऊर्जा शुल्क (यूनिट वाले हिस्से) में 0.63% की हल्की कमी होगी। लेकिन यह राहत सिर्फ यूनिट के चार्ज पर है। फिक्स्ड चार्ज, ड्यूटी, सेस या बाकी शुल्क पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी दरें बढ़ने के बावजूद इस महीने के बिल में थोड़ी राहत दिख सकती है, लेकिन कुल बिल पर असर सीमित ही रहेगा। 151 यूनिट तक फिक्स्ड चार्ज कम है, लेकिन जैसे ही आप इससे ऊपर जाते हैं, फिक्स्ड चार्ज 28 से बढ़कर 30 रु. प्रति 0.1 किलोवाट हो जाता है। इसी का असर है कि 100 यूनिट पर सिर्फ 33 बढ़ रहे हैं, लेकिन 500 यूनिट पर यह आंकड़ा 213 को पार कर रहा है। यानी सीधे 5.30% तक की बढ़ोतरी। गांव vs शहर: किसका बिल कितना बढ़ा?
गांव के उपभोक्ताओं पर इसका बोझ थोड़ा कम रहेगा। उदाहरण के तौर पर 200 यूनिट बिजली खर्च करने पर शहर में बिल करीब 1575 तक पहुंचेगा, जबकि गांव में यह लगभग 1547 रहेगा। यानी गांव के उपभोक्ता को करीब 28 कम देना होगा। इसी तरह 400 यूनिट खपत पर शहर में बिल करीब 3394 और गांव में 3340 के आसपास रहेगा, यानी यहां भी करीब 54 का अंतर रहेगा। यह फर्क इसलिए है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में फिक्स्ड चार्ज 28 प्रति 0.1 किलोवाट है, जबकि शहर में यह 30 प्रति 0.1 किलोवाट है।
पीक ऑवर्स में आएगा ज्यादा बिल
अब बिजली का बिल सिर्फ यूनिट नहीं, बल्कि किस समय बिजली इस्तेमाल की, इस पर भी निर्भर करेगा। टीओडी व्यवस्था के तहत दिन में बिजली सस्ती और शाम 6 से रात 10 बजे के बीच महंगी होगी। यानी एसी, कूलर या वॉशिंग मशीन जैसे उपकरण अगर दिन में चलाएंगे तो बिल कम आएगा, लेकिन वही शाम के पीक टाइम में चलाने पर बिल 10-20% तक बढ़ सकता है। स्मार्ट मीटर लगने के साथ यह व्यवस्था धीरे-धीरे सभी घरों पर लागू होगी। उपभोक्ताओं के पास क्या विकल्प? कमर्शियल, इंडस्ट्री और कृषि उपभोक्ताओं के लिए कितनी महंगी हुई?
