अक्सर सवाल उठते हैं, एशियन-ओलिंपिक गेम्स की पदक तालिका में भारत का हिस्सा इतना कम क्यों रहता है..? जवाब इस खबर में छुपा है। देव मीणा… भारत के पोल वॉल्ट चैंपियन। 2025 में 5.40 मीटर की छलांग लगाकर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। ये सब देखकर कोई भी सोचेगा कि जहां जाते होंगे, इज्जत ही मिलती होगी। लेकिन, क्या वाकई ऐसा है! देव से ही जानिए… जनवरी में वे ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप से वापस लौट रहे थे। पनवेल में उन्हें और साथी कुलदीप यादव को टीटीई ने ट्रेन से उतार दिया। जुर्माना भी लगा दिया। वजह थी, पांच मीटर लंबा पोल। टीटीई ने कहा, नियमों के मुताबिक इसे ट्रेन में नहीं रख सकते। देव ने उन्हें बताया, ये 2 लाख रुपए कीमत वाले कार्बन फाइबर पोल हैं। इन्हें लगेज डिब्बे में रखने से नुकसान हो सकता है। खेल विभाग का पत्र भी दिखाया, लेकिन टीटीई साहब नहीं माने। होंगे नेशनल लेवल के प्लेयर… ट्रेन में तो टीटीई की चलेगी दरअसल, पोल वॉल्ट का पोल करीब 17 फीट लंबा होता है। इसी तरह जेवलिन की बात करें तो पुरुषों के लिए भाले की लंबाई 2.6 से 2.7 मीटर और महिलाओं के लिए 2.2 से 2.3 मीटर तय है। इसलिए खिलाड़ी इनको अपनी बर्थ के पास ही रखते हैं। खिलाड़ी अपना ही पोल लेकर जाते हैं, जिससे वे प्रैक्टिस करते हैं। उनका दर्द है कि कुछ टीटीई तो समझाने पर मान जाते हैं लेकिन कुछ सामान फेंककर जुर्माना लगा देते हैं। उनको इससे मतलब ही नहीं होता कि हम नेशनल लेवल के प्लेयर हैं। कई बार ट्रेन भी छूट जाती है। साइकिल को पैक कर ले जाते हैं… ट्रायथलॉन के खिलाड़ी अपनी साइकिल को खोलकर कॉर्टन में पैक कर ले जाते हैं। दरअसल, लगेज में रखने पर साइकिल में टूट-फूट की आशंका बनी रहती है। इसलिए जहां प्रतियोगिता होती है, वही साइकिल को असेंबल किया जाता है। जेवलिन पर भी रोक–टोक कमोबेश ऐसी ही कहानी जेवलिन के खिलाड़ियों की है। जैवलिन कोच मो. हदीस बताते हैं कि ट्रेन में टीटीई भाला देखकर अक्सर खिलाड़ियों को रोक लेते हैं। उनको बताते भी हैं कि ये सिर्फ खेल के लिए है। आगे कैप भी लगा देते हैं, फिर भी परेशान करते हैं। हमने रेलवे को पत्र लिखा है
ये सच है कि पोल वॉल्ट और जेवलिन थ्रो के खिलाड़ियों को रेल यात्रा के दौरान कई बार उन्हें रोका गया और जुर्माना भी लगाया गया। जबकि, वे खेलने जा रहे होते हैं। हमने रेलवे को पत्र भी लिखा है।
– बीएस यादव, संयुक्त संचालक, खेल इसका नियम पता करेंगे
पोल वॉल्ट का पोल बहुत लंबा होता है, इसे कोच में ले जाने में जरूर परेशानी होती होगी। मुझे अभी नियम की जानकारी नहीं है। नियम पता करने के बाद कुछ बता सकूंगा।
– हर्षित श्रीवास्तव, मुख्य प्रवक्ता, पश्चिम मध्य रेलवे
