ईरान, इजराइल-अमेरिका युद्ध के चलते पुरे देश में गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। उज्जैन सहित प्रदेश में रेस्टोरेंट संचालकों को कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी गई है। गैस सिलेंडर की सप्लाई बाधित होने से सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना रेस्टोरेंट संचालक को करना पड़ रहा है। रेस्टोरेंट संचालक अब गैस सिलेंडर के विकल्प की तलाश में भट्टी बनवा रहे हैं, लेकिन भट्टी बनाने वालों के पास एकाएक इतने ऑर्डर आ गए कि करीब 10 से 15 दिन की वेटिंग के बाद भी भट्टी नहीं मिल पा रही है। इधर, घरेलू गैस सिलेंडर की जगह लोग इंडेक्शन खरीद रहे हैं। शहर के कई इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों पर इंडेक्शन खरीदने वालों की भीड़ लग रही है। व्यापारी बता रहे हैं कि पहले रोजाना करीब टीन्स से चार या कभी पांच इंडक्शन बिकते थे, लेकिन दो दिन से 20 से 25 इंडेक्शन बिकने लगे हैं। उज्जैन में रोजाना करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु महाकाल मंदिर दर्शन करते हैं। इसमें से करीब एक लाख श्रद्धालु बाहर से आकर रुकते भी हैं। लोग यहां अलग-अलग रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं। उज्जैन शहर में करीब 700 से अधिक रेस्टोरेंट हैं। इसमें सबसे ज्यादा महाकाल मंदिर के आसपास, रेल स्टेशन, बस स्टेशन फ्रीगंज, सराफा, इंदौर और उज्जैन रोड पर मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश पर कमर्शियल गैस सिलेंडर से खाना बनता है। कर्मशियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद हुई तो रेस्टोरेंट संचालक अन्य विकल्प तलाशने लगे। इनमें से 75 प्रतिशत संचालक डीजल की भट्टी बनवा रहे हैं, लेकिन एकाएक डिमांड बढ़ी तो फैक्ट्री में भी एक सतह इतना माल बनाने में दिक्कत का सामना करना पड़ गया। ढांचा भवन स्थित डायमंड फैक्ट्री के संचालक राजेश शर्मा ने बताया कि गैस के कारण डीजल भट्टी का काम बंद ही हो गया था। दो दिन से गैस की दिक्कत आने लगी तो दिन बाहर बड़ी संख्या में लोग डीजल भट्टी के बारे में पूछने आने लगे। डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गई है। कुछ लोग लकड़ी की भट्टी का भी पूछ रहे हैं, दो दिन में तीन भट्टी बेची हैं, 12 ऑर्डर आ चुके हैं। 10 दिन की वोटिंग
उज्जैन में ढांचा भवन अवनति पूरा, कोयला फाटक और ढाबा रोड पर कई फैक्ट्री है, जहां पर डीजल की भट्टी 20 से 22 हजार में छोटी और लकड़ी वाली 60 से डेढ़ लाख तक में बन रही है। सबसे छोटा साइज 24 इंच का बनाया जा रहा है। फिलहाल सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ही काम कर पा रहे हैं। अधिकांश कारीगर के रोजे चल रहे हैं, इसलिए ज्यादा देर तक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इसी कारण डिलेवरी में 10 दिन का तक का समय लग रहा है। डीजल भट्टी की पूछताछ के लिए पहले महीने में एक या दो लोग आते थे। सबसे ज्यादा रेस्टोरेंट संचालक, केटरिंग वाले, अस्पताल में चल रही केंटिंग के रोजाना करीब 10 से 15 लोग रोज आकर पूछताछ कर रहे हैं। कोई लकड़ी तो कोई डीजल भट्टी बनवाने पहुंचा
जैन भोजनालय के संचालक ने बताया कि सिलेंडर मिल नहीं रहे, खाना तो बनाना है लेबर का और अपना पेट भी पालना है। ऐसे में डीजल भट्टी बनवाने आया था। अब सोचा है की आगे से डीजल भट्टी से ही खाना बनवाऊंगा। लकड़ी की भट्टी बनवाने आए लोकेश भाकचंदानी ने बताया कि लकड़ी भट्टी देखि है एलपीजी मिल नहीं रही तो रेस्टोरेंट तो बंद कर नहीं सकते। इसलिए वैकल्पिक रूप से जो मिलेगा वो करेंगे। अस्पताल की केंटिंन के लिए डेढ़ लाख का ऑर्डर दिया
एक अस्पताल में केंटिंग संचालक महावीर जैन ने बताया कि कैंटीन ने सैकड़ों पेशेंट ओर अटेंडर को समय पर नाश्ता, भोजन देना अनिवार्य है। उनके यहां प्रतिदिन 6 सिलेंडर लगते है। सिलेंडर नहीं मिलने पर एक जगह ड्रम की दो भट्टी के ऑर्डर दिए ओर 1.40 हजार की गुटके ब्लोवर वाली दो भट्टी की बुकिंग करवाई है। आर्डर के तीन दिन बाद भी उन्हें भट्टी सप्लाई नहीं हो पा रही। ये खबर भी पढ़ें… MP में सिलेंडर बुकिंग ठप, भोपाल में 2232 सिलेंडर पकड़े मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर परेशानी बढ़ती जा रही है। ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम सही से काम नहीं कर रहा है, जिसके कारण उपभोक्ता गैस सिलेंडर बुक नहीं कर पा रहे हैं। कई जगहों पर वेटिंग 7 से 8 दिन तक पहुंच गई है। कई जगहों पर बुकिंग के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है।पूरी खबर पढ़ें
