सिंगरौली जिले में मयार नदी पुल निर्माण के अंतिम भुगतान बिल में हेराफेरी के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मंगलवार को FIR दर्ज की है। EOW ने सत्यापन के बाद तत्कालीन SDO सुशील कुमार मिश्रा, तत्कालीन उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी और ठेकेदार मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रीवा सहित अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि पुल निर्माण की माप दर्ज करने वाली सरकारी पुस्तिकाओं में बदलाव कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। 7.37 लाख का अंतिम बिल बढ़ाकर 40.91 लाख किया EOW रीवा संभाग के एडिशनल एसपी डॉ. अरविंद ने बताया कि पुल निर्माण का स्वीकृत अंतिम देयक 7 लाख 37 हजार 861 रुपए था। आरोप है कि इसमें हेराफेरी कर 40 लाख 91 हजार 300 रुपए का संशोधित बिल तैयार किया गया। जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य की माप दर्ज करने वाली माप पुस्तिका (Measurement Book) क्रमांक 605 कार्यालय से गायब कर दी गई। वहीं, माप पुस्तिका क्रमांक 606 और 734 में काट-छांट की गई। इन पुस्तिकाओं में पुल की लंबाई, चौड़ाई और निर्माण कार्य की अन्य माप दर्ज होती हैं। इन्हीं के आधार पर काम का मूल्यांकन और ठेकेदार का भुगतान तय किया जाता है। 16.78 लाख रुपए की पेनल्टी से बचने के लिए हेराफेरी का आरोप जांच के मुताबिक, निर्माण कार्य में देरी के कारण ठेकेदार पर 16 लाख 78 हजार 437 रुपए की पेनल्टी लगाई गई थी। आरोप है कि इस राशि से बचने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर की गई। ठेकेदार पर दिसंबर 2018 में जुर्माना लगाया गया था। पुल निर्माण की स्वीकृत लागत 5 करोड़ 74 लाख रुपए थी। निर्माण कार्य 5 फरवरी 2016 को शुरू हुआ था। इसे 18 महीने में यानी 4 अप्रैल 2018 तक पूरा करना था। हालांकि, ठेकेदार ने करीब 4 महीने की देरी से 1 अगस्त 2018 को काम पूरा किया। जनवरी 2019 में पेश किया था अंतिम बिल जनवरी 2019 में तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सुशील कुमार मिश्रा ने 7 लाख 37 हजार 861 रुपए का अंतिम देयक प्रस्तुत किया था। EOW के मुताबिक, ऑडिट रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में पेनल्टी की राशि दर्ज होने के बावजूद माप पुस्तिकाओं में कथित बदलाव कर संशोधित बिल तैयार किया गया। EOW ने सत्यापन के बाद तत्कालीन SDO, उपयंत्री और ठेकेदार सहित अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
