HomeदेशINS विक्रांत पर राफेल मरीन की पहली लैंडिंग:पहली कोशिश में उतरा विमान,...

INS विक्रांत पर राफेल मरीन की पहली लैंडिंग:पहली कोशिश में उतरा विमान, नौसेना में शामिल करने के लिए ट्रायल जारी

राफेल मरीन फाइटर जेट ने 29 अक्टूबर को INS विक्रांत पर पहली कोशिश में सफल लैंडिंग की। INS विक्रांत भारतीय नौसेना का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर शिप है। यह लैंडिंग विमान के नौसेना में इस्तेमाल की दिशा में शुरुआती कदम मानी जा रही है। लैंडिंग एक फ्रेंच पायलट ने की, क्योंकि ये फर्स्ट फ्लाइट कैंपेन का हिस्सा है – मतलब भारतीय कैरियर पर फ्रेंच जेट की कम्पेटिबिलिटी टेस्ट। भारतीय नौसेना के अनुसार, राफेल मरीन की INS विक्रांत पर सफल लैंडिंग के बाद इसके ट्रायल जारी हैं। इन ट्रायल्स से भारतीय नौसेना में राफेल मरीन विमान को ऑपरेशनल बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। 2027 की शुरुआत में सेकंड फ्लाइट कैंपेन होगा, उसके बाद भारतीय पायलट फ्रांस में ट्रेनिंग करेंगे। अभी विक्रांत पर मिग-29K चल रहे हैं, 2028 के बाद राफेल-M आने से नेवी की स्ट्राइक पावर कई गुना बढ़ जाएगी। राफेल-M की लैंडिंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… राफेल-M का ये ट्रायल क्यों अहम है डिजाइन का फर्क: राफेल-मरीन असल में फ्रांस के चार्ल्स डी गॉल कैरियर के लिए बना है, जो CATOBAR (केटापल्ट से टेक-ऑफ) इस्तेमाल करता है। जबकि INS विक्रांत और विक्रमादित्य STOBAR (स्की जंप रैंप से टेक-ऑफ) हैं। क्या राफेल-M भारतीय रैंप से उड़ पाएगा और अरेस्टर वायर से रुक पाएगा, यही टेस्टिंग हो रही थी। गोवा में तैयारी: इससे पहले इसी हफ्ते INS हंसा, गोवा में शोर बेस्ड टेस्ट फेसिलिटी (SBTF) पर ट्रायल चल रहे थे। वहां विक्रांत जैसा ही स्की जंप रैंप बनाया गया है। 26 राफेल-M की डील: भारत ने 28 अप्रैल 2025 को फ्रांस के साथ लगभग ₹63,000 करोड़ ($7.5 बिलियन) में 26 राफेल-M की डील साइन की थी। इसमें 22 सिंगल-सीटर लड़ाकू और 4 ट्विन-सीटर ट्रेनर हैं। डिलीवरी 2028 के आखिर या 2029 की शुरुआत से शुरू होगी।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here