इंदौर के सराफा कारोबारी तिलक शर्मा (27) की उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा के दौरान मौत हो गई। वे सात दोस्तों के साथ कार से यात्रा पर गए थे। दर्शन के बाद लौटते समय अचानक उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। दोस्तों ने उन्हें ऑक्सीजन किट से ऑक्सीजन दी, लेकिन उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें आर्मी बेस कैंप ले जाया गया। वहां प्राथमिक इलाज के बाद दूसरे बेस कैंप के अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां 10-15 मिनट बाद उनकी मौत हो गई। तिलक के दोस्त प्रतीक ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद तिलक का शव एंबुलेंस से पिथौरागढ़ के लिए रवाना किया जा रहा है। वहां से शव को दिल्ली लाया जाएगा और फिर इंदौर भेजा जाएगा। उनके शनिवार दोपहर 2 बजे तक इंदौर पहुंचने की संभावना है। तिलक उज्जैन के महाकाल मंदिर के लिए चांदी के मुकुट और शृंगार की सामग्री बनाते थे। उनके बनाए मुकुट और अन्य सामग्री भगवान महाकाल के शृंगार में इस्तेमाल होती थी। सोशल मीडिया पर उनके बनाए मुकुट और शृंगार सामग्री के कई वीडियो भी मौजूद हैं। दर्शन कर लौटते समय बिगड़ी तबीयत तिलक के दोस्त प्रतीक के मुताबिक, यात्रा में कुल सात लोग गए थे। आदि कैलाश पहुंचने से पहले उन्होंने नीम करौली बाबा, जागेश्वर और मुक्तेश्वर के दर्शन किए। इसके बाद वे नैनीताल घूमने गए और फिर आदि कैलाश पहुंचे। दर्शन के बाद लौटते समय तिलक को सांस लेने में परेशानी होने लगी। दोस्तों ने ऑक्सीजन किट से उन्हें ऑक्सीजन दी, लेकिन उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। महाकाल के लिए बनाते थे चांदी के मुकुट तिलक इंदौर के सराफा बाजार में दुकान चलाते थे। वे महाकाल मंदिर के लिए चांदी के मुकुट, नेत्र, कान के आभूषण, टीका और छत्र जैसी शृंगार सामग्री बनाते थे। तिलक परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके पिता भी उनके साथ काम करते थे। अगले साल होली के बाद उनकी शादी होने वाली थी। धारचूला में रखा गया शव घटना के बाद ITBP ने धारचूला पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर राजकीय चिकित्सालय में रखवाया है। पंचायतनामा और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। तिलक के परिजन इंदौर से उत्तराखंड के लिए रवाना हो चुके हैं।
