सीहोर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के ‘नरपिशाच’ शब्द पर वनकर्मी नाराज हैं। मध्य प्रदेश वन कर्मचारी संघ और वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ के सैकड़ों वनकर्मियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार अमित सिंह को सौंपा। वनकर्मियों ने मंत्री से इस शब्द पर स्पष्टीकरण मांगा है। उनकी मांग है कि मंत्री यह शब्द वापस लें या सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। वे जानना चाहते हैं कि यह शब्द किसके लिए इस्तेमाल हुआ। दबाव से मुक्त निष्पक्ष जांच की भी मांग
यह नाराजगी कोसमी में वन विकास निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद आई है। संघ ने कहा कि अगर यह शब्द वन विभाग के कर्मचारियों के लिए है, तो वे आपत्ति जताते हैं। वनकर्मियों ने भविष्य में अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस बल मांगा है। अवैध अतिक्रमण मामलों में राजनीतिक दबाव से मुक्त निष्पक्ष जांच की भी मांग की है। वन विभाग ने हटाया था अतिक्रमण
बता दें कि सीहोर के कोसमी गांव में 11 अक्टूबर दोपहर 2 बजे वन विकास निगम ने आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़ दिए। फसल कुचल दी गई थी। सूचना मिलने पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। इस दौरान महिलाएं उनसे मिलकर रोने लगीं। शिवराज ने धरना स्थल पर बैठकर पीड़ितों की पीड़ा सुनी थी। इस दौरान शिवराज ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की थी। यह खबर भी पढ़ें… शिवराज ने कहा था- मेरे क्षेत्र में जुल्म-अन्याय की इंतिहां हुई केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि मेरे क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की इंतिहां हुई है। जिन घरों में सुबह तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें सुनाई दे रही हैं। महिलाएं छाती पीट-पीटकर रो रही हैं। पूरी खबर पढ़िए…
