शहर में कुछ कंपनियां बड़ी प्रॉपर्टी में छोटे निवेश और अच्छे मुनाफे का झांसा दे रही हैं। इंदौर की प्रॉपटेक कंपनी iBricx भी ऐसे ही ऑफर कर निवेशकों को ज्यादा मुनाफे का दावा कर रही है। भास्कर रिपोर्टर ने निवेशक बनकर कंपनी का एग्रीमेंट, सरकारी रिकॉर्ड और जमीन के दस्तावेज देखे तो कंपनी के दावों पर बड़े सवाल खड़े हो गए। कंपनी प्रचार में छोटे निवेश से ‘प्रॉपर्टी का मालिक बनिए’ का ऑफर दे रही हैं। दस्तावेज बताते हैं कि निवेशक सिर्फ कंपनी के लिए असुरक्षित कर्जदाता है। यानी सिर्फ पैसा निवेशक का, लेकिन न जमीन उसकी, न हक…। एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश में फ्रैक्शनल ओनरशिप निवेश के लिए अलग से स्पष्ट कानून नहीं है। देश में टोकनाइजेशन पर स्पष्ट कानून नहीं, इसी का फायदा उठा रहे iBricx छोटे निवेशकों से फ्रैक्शनल ओनरशिप इनवेस्टमेंट के नाम पर पैसा जुटा रही है। यह ऐसा है जैसे एक बड़ी प्रॉपर्टी को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा जाए। हर टुकड़े को ‘डिजिटल टोकन’ कहा जाता है। आप 5000 रुपए देकर एक टोकन खरीद लें। कंपनी दावा करती है कि आप उस प्रॉपर्टी के हिस्सेदार बन गए। कंपनी तकनीक (ब्लॉकचेन और टोकन) की आड़ में SEBI के नियमों को ठेंगा दिखा रही है। भारत में टोकनाइजेशन पर स्पष्ट कानून नहीं है। कंपनी इसी कमी का फायदा उठा रही है। कंपनी की अपनी पूंजी सिर्फ एक लाख हम पूरे लीगल नहीं : आशुतोष अग्रवाल- iBricx को-फाउंडर कंपनी के बारे में जांच कर रहे हैं : सेबी
iBricx के संबंध में भास्कर की ओर से पूछे गए सवाल पर सेबी के इंदौर कार्यालय के डीजीएम शैलेश पिंगले ने कहा- कंपनी के संबंध में हमें क्वेरी प्राप्त हुई है। हमारी टीम इस पर काम कर रही है। भास्कर एक्सपर्ट अमर जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट
कानूनी दायरे के बाहर काम नहीं कर सकते यदि कोई कंपनी निवेश के नाम पर आम लोगों से पैसा जुटा रही है, तो उसे SEBI के तहत पंजीकृत होना चाहिए। आरबीआई के लागू दिशा-निर्देशों का भी पालन करना चाहिए। फ्रैक्शनल रियल एस्टेट निवेश के लिए सरकार ने SM REIT (स्मॉल एंड मीडियम रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) का नियामकीय ढांचा उपलब्ध कराया है। कानूनी ढांचों के बाहर काम नहीं कर सकते। चंचल गुप्ता, एडवोकेट विधि विशेषज्ञ
निवेशकों के कानूनी अधिकार प्रभावित यदि ऐसी कंपनियां SEBI या किसी अन्य सक्षम नियामक प्राधिकरण के तहत पंजीकृत नहीं हैं, तो निवेशक या ऋणदाता के साथ विवाद, धोखाधड़ी या शिकायत की स्थिति में उसकी सुनवाई किस मंच पर होगी? कंपनी प्रचार में मालिकाना हक का दावा करती है, पर दस्तावेजों में वास्तविक स्वामित्व नहीं देती, तो निवेशकों के कानूनी अधिकार सीमित हो सकते हैं।
