मप्र के नगरीय निकायों में गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस (जेम पोर्टल) के जरिए बाजार के मुकाबले कई गुना दामों पर की गई सरकारी खरीदी के मामले में लोकायुक्त संगठन ने स्वत: संज्ञान लिया है। लोकायुक्त डीजी योगेश देशमुख ने स्पष्ट किया है कि विभागीय स्तर पर सामने आए तथ्यों से शुरुआती तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की बात सामने आ रही है। लोकायुक्त संगठन अब पूरे मामले की आपराधिक जांच शुरू करने जा रहा है। विभाग से रिकॉर्ड मिलने के बाद इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। देखमुख ने बताया कि नगरीय विकास विभाग से जानकारी मांगी जा रही है कि किस निकाय ने किस सामान को कितने में खरीदा और प्रक्रिया में कहां-कहां गड़बड़ियां हुई हैं। इन गड़बड़ियों के आधार पर पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। ये गड़बड़ियां पकड़ेगी लोकायुक्त की टीम एसीएस ने लगाई थी अफसरों को लताड़ पिछले दिनों नगरीय निकाय अफसरों के प्रशिक्षण में विभाग के एसीएस संजय दुबे ने क्लास लगाई थी। उन्होंने ई-नगरपालिका और एआई टूल से पकड़ी गई धांधली का खुलासा करते हुए कहा था कि एक निकाय ने जो कचरा संग्रहण वाहन 2 लाख में खरीदा, दूसरे निकाय ने वही वाहन डस्टबिन जोड़कर 6 लाख रुपए में खरीद लिया। ऐसे ही फिनाइल, एलईडी लाइट और सफाई उपकरणों में भी पोर्टल पर मनमाने भुगतान कराए गए। विभाग ने 135 सीएमओ समेत 392 अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया शुरू की है।
