दमोह कुंडलपुर की पहाड़ी पर बड़े बाबा भगवान आदिनाथ का भव्य मंदिर अब अंतिम स्वरूप की ओर बढ़ रहा है। 189 फीट ऊंचे मंदिर का शिखर, गुण मंडप और नृत्य मंडप का निर्माण पूरा हो चुका है। अब मंदिर के 72 फीट ऊंचे भव्य सिंह द्वार को तैयार किया जा रहा है। इसके निर्माण के लिए राजस्थान के जैसलमेर से विशेष पीला पत्थर मंगाया गया है। पत्थरों पर नक्काशी और द्वार के निर्माण के लिए राजस्थान के कारीगर और मजदूर जुटे हैं। मंदिर का निर्माण कार्य 2027 में पूरा होने की संभावना है। दमोह जिला मुख्यालय से करीब 36 किमी दूर स्थित कुंडलपुर प्रसिद्ध जैन तीर्थ है। यहां बन रहा बड़े बाबा का मंदिर अपनी ऊंचाई और स्थापत्य के कारण विशेष पहचान बना रहा है। मंदिर के समन्वयक आरके जैन ने बताया कि सिंह द्वार को केवल प्रवेश मार्ग के रूप में नहीं, बल्कि मंदिर की भव्यता और शौर्य के प्रतीक के तौर पर विकसित किया जा रहा है। मंदिर की डिजाइन और ड्राइंग सोमपुरा बंधुओं ने तैयार की है। बिना लोहा और सीमेंट के निर्माण कुंडलपुर मंदिर में लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग नहीं किया जा रहा है। पत्थरों को विशेष तकनीक से एक-दूसरे के साथ जोड़कर संरचना तैयार की जा रही है। निर्माण से जुड़े लोगों के अनुसार, मंदिर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पत्थर आधारित पारंपरिक पद्धति अपनाई गई है। 2500 साल पुराना है सिद्धक्षेत्र का इतिहास कुंडलपुर को प्राचीन सिद्धक्षेत्र के रूप में जाना जाता है। यहां पद्मासन मुद्रा में बड़े बाबा भगवान आदिनाथ की करीब 15 फीट ऊंची प्रतिमा विराजमान है। क्षेत्र में लगभग 65 प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें 8वीं-9वीं शताब्दी का बताया जाता है। पूरे क्षेत्र का इतिहास करीब 2500 साल पुराना माना जाता है।
