एमपी के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी के दौरान एक ही तरह के सामान की कीमतों में भारी अंतर सामने आने के बाद सरकार ने उच्चस्तरीय जांच कराने का ऐलान किया है। नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे के वीडियो में खरीदी की दरों पर सवाल उठाए जाने के बाद नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी। मामले की पूरी खबर दैनिक भास्कर ने दिखाई थी। खरीदी में गड़बड़ी या प्रक्रिया की कमियों का फायदा उठाने की बात सामने आई तो संबंधित सभी लोगों पर कार्रवाई होगी। विभागीय प्रस्तुति में बताया गया कि पिछले तीन साल में प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने GeM पोर्टल से करीब 1,134 करोड़ रुपए की खरीदी की। प्रस्तुति के मुताबिक, यदि सामान औसत दरों पर खरीदा जाता तो करीब 250 करोड़ रुपए बचाए जा सकते थे। जांच के दायरे में खरीदी की दरें और प्रक्रिया राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि विभाग के कामकाज की निगरानी की जाती है। खरीदी या निर्माण कार्य में गड़बड़ी सामने आने पर जांच कर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि एसीएस संजय दुबे के वायरल वीडियो के जरिए जो जानकारी सामने आई है, उसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि अलग-अलग निकायों में एक ही उत्पाद की कीमतों में इतना अंतर क्यों रहा और GeM पोर्टल की प्रक्रिया में मौजूद कमियों का किसी ने फायदा तो नहीं उठाया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि खरीदी में अनियमितता मिलने पर सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग में पहले भी गड़बड़ियों पर कार्रवाई की गई है और जरूरत पड़ने पर इसकी जानकारी दी जा सकती है। तीन साल में ₹1,134 करोड़ की खरीदी, ₹250 करोड़ बचने का दावा इससे पहले इस बैठक में अंशुमन राज की प्रस्तुति के मुताबिक, पिछले तीन साल में प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने GeM पोर्टल से करीब ₹1,134 करोड़ की खरीदी की। उनके विश्लेषण में दावा किया गया कि यदि खरीदी औसत दरों पर होती तो करीब ₹250 करोड़ की बचत हो सकती थी। एसीएस संजय दुबे ने बैठक में कहा कि विभाग के पास इस बात की जानकारी है कि किस निकाय ने क्या सामान और किस दर पर खरीदा। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि खरीदी में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। एक विक्रेता के 201 अनुबंध, 21 नगरपालिकाओं में आपूर्ति प्रस्तुति में लेबर इंडस्ट्री नाम के विक्रेता का उदाहरण भी दिया गया। अंशुमन राज के मुताबिक, इस विक्रेता के 21 नगरपालिकाओं में करीब 201 अनुबंध थे। प्रस्तुति में इसी नाम से ₹38 करोड़ और ₹12 करोड़ की आपूर्ति के आंकड़ों का उल्लेख हुआ। बड़ोदिया कलां में करीब ₹11 करोड़ की आपूर्ति का भी जिक्र किया गया। विभागीय विश्लेषण में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कौन-से विक्रेता किन निकायों में आपूर्ति कर रहे हैं, उनके कितने और कितनी राशि के अनुबंध हैं तथा वे वास्तव में कौन-सा सामान उपलब्ध करा रहे हैं। किसी एक विक्रेता के कई निकायों में अनुबंध होने या कीमतों में अंतर से अपने आप भ्रष्टाचार साबित नहीं होता। जांच में अनुबंध, खरीद आदेश, आपूर्ति और भुगतान के दस्तावेजों का मिलान महत्वपूर्ण होगा। कचरा वाहनों की कीमतों पर भी उठे सवाल एसीएस संजय दुबे ने बैठक में कहा था कि कुछ निकायों ने डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीदे, जबकि उनके पास इतने वाहन चलाने के लिए पर्याप्त वार्ड नहीं हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अतिरिक्त सामान जोड़कर कीमत बढ़ाई गई और अपने लोगों के जरिए खरीदी कराई गई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि विभाग के पास खरीदी का पूरा ब्योरा है और अब गड़बड़ियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। सरकार की जांच में यह देखना होगा कि वाहनों की कीमत में अंतर की वजह क्या थी, अतिरिक्त सामान की जरूरत और कीमत उचित थी या नहीं तथा खरीदी की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं। 2,500 लोगों के ईमेल, यूजर आईडी और पासवर्ड लीक होने का दावा बैठक में साइबर सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया था कि अंशुमन राज ने नगरीय निकायों से जुड़े करीब 2,500 लोगों के ईमेल, यूजर आईडी और पासवर्ड लीक होने की जानकारी साझा की थी। अंशुमन राज ने बताया कि डार्क वेब पर मिले डेटा के विश्लेषण में ये क्रेडेंशियल सामने आए। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ कंप्यूटरों में जानकारी चुराने वाला मैलवेयर हो सकता है। अधिकारियों को प्रभावित सिस्टम की जांच कराने, मैलवेयर हटाने और संदिग्ध वेबसाइटों, टोरेंट तथा फिशिंग ईमेल से बचने की सलाह दी गई। इस मामले में भी वास्तविक जोखिम और प्रभावित सिस्टम की स्थिति की पुष्टि तकनीकी जांच से होगी। उज्जैन संभाग के पत्र में GeM से खरीदी के निर्देश इस मामले के बीच उज्जैन संभाग के संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास राजीव निगम का 24 अप्रैल 2026 का पत्र भी महत्वपूर्ण है। पत्र क्रमांक 2026/2191 में संभाग के सभी नगर पालिका और नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को शासन के निर्देशों के विपरीत GeM पोर्टल का इस्तेमाल किए बिना खरीदी के लिए निविदाएं जारी नहीं करने की हिदायत दी गई है। पत्र के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में कुछ निकाय विद्युत प्रकाश सामग्री, मोटर पंप मरम्मत, निर्माण सामग्री, स्वच्छता सामग्री और पेयजल संबंधी कार्यों के लिए ₹1 लाख से अधिक तथा ₹20 लाख से ₹30 लाख तक की निविदाएं जारी कर रहे थे। पत्र में कहा गया कि शासन ने सामग्री GeM पोर्टल के माध्यम से खरीदने के निर्देश दिए हैं। इसके विपरीत निविदाएं जारी करना नियमों के विरुद्ध है। संयुक्त संचालक ने ऐसी निविदाओं को तत्काल निरस्त करने की सलाह दी और ऐसा नहीं करने पर संबंधित मुख्य नगर पालिका अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी। इसी पोर्टल के इस्तेमाल पर जोर एक ओर विभागीय बैठक में GeM के जरिए हुई खरीदी में कीमतों के भारी अंतर और संभावित अनियमितताओं पर सवाल उठे हैं, वहीं उज्जैन संभाग के पत्र में शासन के निर्देशों के अनुसार इसी पोर्टल के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। अब उच्चस्तरीय जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि किन मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ, कीमतों में अंतर की वजह क्या थी और क्या किसी ने खरीद प्रक्रिया की कमियों का फायदा उठाया। ये खबर भी पढ़ें… MP के नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार का VIDEO एक निकाय ने ₹2 लाख में कचरा वाहन खरीदा, तो दूसरे ने चार डस्टबिन के साथ इसी तरह के वाहन के लिए ₹6 लाख खर्च कर दिए। यानी अतिरिक्त सामान के नाम पर कीमत तीन गुना हो गई। कुछ निकायों ने डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीद डाले, जबकि उनके पास इतने वाहन चलाने के लिए पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं। आखिर सरकारी खरीदी के नाम पर यह सब क्या हो रहा है?पूरी खबर पढ़ें
