कैंटीन में जूठा छोड़ने से लेकर जरूरत न होने पर भी लाइटें जलती रहने तक, रोजमर्रा की ऐसी आदतें बदलने के लिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में एक सप्ताह तक कार्यक्रम होंगे। 1 से 7 नवंबर तक ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के तहत भोजन की बर्बादी रोकने, बिजली बचाने, प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने पर जोर रहेगा। आईआईटी इंदौर, डीएवीवी, मैनिट भोपाल और एम्स भोपाल सहित संस्थानों को इसमें शामिल किया गया है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी ने संबंधित विभागों और संस्थानों को पत्र जारी किया है। इसमें अधीनस्थ कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में कार्यक्रम कराने तथा पर्यावरण के अनुकूल आदतें अपनाने को कहा गया है। एप्को को समन्वय और ईको क्लब को गतिविधियों की जिम्मेदारी इस पूरे कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को दी गई है। इस दौरान स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के ईको क्लब ऊर्जा व जल संरक्षण, पारंपरिक खान-पान, खाद्य अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक-मुक्त परिसर, पौधरोपण और स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियां करेंगे। कार्यक्रमों में योग, सक्रिय जीवनशैली, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताएं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अच्छे कार्यों का प्रदर्शन भी शामिल है। तालाब संरक्षण से ई-कचरे तक कार्यक्रम 1 नवंबर की सुबह 11 बजे एप्को की ओर से अपशिष्ट और ई-कचरे पर ऑनलाइन वेबिनार होगा। 4 नवंबर को सुबह 9 बजे भोपाल के जल तरंग केंद्र, लेक व्यू में वेटलैंड अवेयरनेस वॉक और जल संरक्षण कार्यक्रम होगा। इसमें ‘मेरा तालाब, मेरी जिम्मेदारी’ संकल्प शामिल है। 5 नवंबर को जल तरंग केंद्र में 10 से 15 वर्ष के बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता होगी। जागरूकता सत्र चलाने होंगे 2 नवंबर को कैंटीन में भोजन की बर्बादी रोकने के लिए शपथ और जागरूकता सत्र होंगे। वहीं, 3 नवंबर को ऊर्जा संरक्षण के लिए एक घंटे का स्विच-ऑफ चैलेंज होगा। इस दौरान गैर-जरूरी लाइटें और बिजली के उपकरण बंद रखे जाएंगे।
