शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी है। हादसे के लिए प्रशासनिक बदइंतजामी को जिम्मेदार ठहराने वाले परिजन मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। परिजनों की नाराजगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने न फूट पड़े। इसके लिए पुलिस – प्रशासन महेशपुरा में स्थानीय लोगों की मदद से लोगों को समझाइश देने में जुटे रहे। सीएम के पहुंचने से पहले जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के अफसरों ने पीड़ितों के घरों से लेकर अस्पताल तक मोर्चा संभाल लिया था। जहां मुख्यमंत्री को जाना था, वहां सुबह से अफसर डटे रहे। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मुख्यमंत्री के पहुंचने से कुछ मिनट पहले तक मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का फीडबैक लेते रहे। इस मैनेजमेंट के बीच मुख्यमंत्री यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट से पीड़ित परिवारों की मुलाकात महज 3 से 7 मिनट की रही। जिन परिवारों में हादसे को लेकर नाराजगी थी, उनकी बातचीत मुख्य रूप से नौकरी, मकान और आर्थिक सहायता की मांग तक सीमित रही। किसी ने बेटे के लिए नौकरी मांगी तो किसी ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ में ट्रक कैसे पहुंचा, सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, जैसे सवाल इन मुलाकातों में प्रमुखता से नहीं उठे। ट्रॉमा के बाहर फूटा गुस्सा… भीतर सीएम तक नहीं पहुंच सकीं ये शिकायतें सीएम 4:05 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। वे अंदर थे और बाहर कुछ घायलों और परिजनों ने इलाज में लापरवाही पर आक्रोश भी जताया। महेशपुरा : सीएम ने 3 मिनट की परिवार से चर्चा, पिता ने बेटे के लिए नौकरी मांगी मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले स्थानीय नेता वीरेंद्र गुर्जर (इन्हें एक पुलिस अधिकारी का परिचित बताया) मृतक दिव्यांश कुशवाह के भाई शुभम को अलग लेजाकर समझाते दिखे। जैसे ही सीएम का काफिला आने की सूचना मिली, वीरेंद्र लोगों से हाथ जोड़कर बोले- ‘एक गरीब का बेटा गया है। सीएम साहब खुद आ रहे हैं। किसी के भी मुंह से कोई ऐसा शब्द न बोलें, मेरा निवेदन है।’ शाम 4:57 बजे सीएम महेशपुरा पहुंचे। यहां मृतक के पिता अशोक कुशवाह और शुभम को सीएम और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने ढांढस बंधाया। सीएम ने पूछा- किराए के मकान में रहते हैं या खुद के। आवास योजना का लाभ मिला या नहीं? अशोक ने बताया 1 कमरे का अपना मकान है और शुभम के लिए नौकरी मांगी। 3 मिनट में मुलाकात खत्म हो गई। महलगांव : पीड़ित के घर पहले अफसर पहुंचे, परिजन ने मांगी सीएम से नौकरी? शाम 5:25 बजे सीएम महलगांव में मृतक सतेंद्र के घर पहुंचे। इससे पहले कलेक्टर और एसपी वहां व्यवस्थाओं का जायजा ले चुके थे। सीएम को देख मृतक के पिता जगदीश गुर्जर की आंखें भर आईं। तभी सतेंद्र के ताऊ रामचित्र ने एक सदस्य की नौकरी देने की मांग रखी। पार्षद गिर्राज कंसाना के अनुसार, सीएम ने कागजात भेजने को कहा और चेक देकर 7 मिनट में चले गए। गल्ला कोठार : परिजनों ने आजीविका पर संकट बताया, नौकरी-आवास मांगा गल्ला कोठार में सीएम मृतक प्रिंस के पिता संतोष जाटव व निकेश के पिता सुदामा जाटव से मिले। दोनों ने कमाने वाले बेटों की मौत से आजीविका का संकट बताया। सीएम ने आर्थिक मदद के चेक दिए। परिजनों के अनुसार, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और आवास योजना के तहत मकान दिलाने का भरोसा मिला। गदाईपुरा : 3 परिवारों से मिले, 25 लाख मुआवजा और नौकरी का ज्ञापन सौंपा गदाईपुरा के शिवनगर में सीएम ने मृतक हेमंत राठौर, पवन राठौर और लव, अमन और अशोक त्यागी के परिजनों से मिले। कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और स्थानीय लोगों ने सीएम को ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख, घायलों को 10-10 लाख रुपए और हर परिवार के 1 सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग की। शेष पेज 9 पर
