3200 करोड़ के शराब घोटाले में ACB-EOW ने 20 लोगों और 22 फर्मों-कंपनियों के खिलाफ 10वां चालान पेश किया है। 27 हजार पन्नों के दस्तावेजों के साथ यह चालान रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया। इसमें रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा और अख्तर ढेबर समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट ने आबकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर अवैध कमीशन वसूला। बिना आबकारी शुल्क चुकाए अतिरिक्त शराब तैयार कराई गई और डुप्लीकेट होलोग्राम व फर्जी परिवहन परमिट के जरिए सरकारी दुकानों तक पहुंचाई गई। इस शराब की बिक्री सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की जाती थी। बिक्री से मिला कैश सिंडिकेट तक पहुंचाया जाता था। चालान में अवैध रकम को हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए अलग-अलग शहरों और दुबई तक पहुंचाने के आरोपों का भी जिक्र है। जांच एजेंसी ने कैश को बैंक खातों में लोन के रूप में दिखाकर जमीन और अन्य संपत्तियों में निवेश किए जाने से जुड़े साक्ष्य भी शामिल किए हैं। 2 आरोपियों बीआर लोहिया और कुमार भाई ठक्कर के खिलाफ फरारी में चालान पेश किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है। इसके अलावा ACB-EOW ने 182.98 करोड़ रुपए के मैनपावर भुगतान से जुड़े मामले में CSMCL के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और एजेंसी संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ 6वां पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर 5 कंपनियों ने ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम का भुगतान लिया, लेकिन कर्मचारियों को यह रकम नहीं दी गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस तरह शासन को 182 करोड़ 98 लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। चालान में भुगतान के रिकॉर्ड, कंपनियों के दस्तावेज, बैंक संबंधी कागजात, कर्मचारियों के बयान और कथित कमीशन के लेन-देन से जुड़े सबूत शामिल हैं। मामले में आरोपों पर अदालत का फैसला आना बाकी है। बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी के मुताबिक, कुल 42 लोगों को आरोपी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पहले से गिरफ्तार आरोपियों की कंपनियों को भी इस चालान में शामिल किया गया है। चालान पेश होने के बाद अब मामले में अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी। 5 कंपनियों को दिया 182.98 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान ACB-EOW की जांच के मुताबिक, 2019 से 2023 के बीच पांच मैनपावर कंपनियों को कुल 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के काम और इन मदों पर सेवा शुल्क की रकम शामिल थी। जांच एजेंसी का कहना है कि नियम के मुताबिक, कंपनियों को पहले कर्मचारियों को यह पैसा देना था और फिर निगम से भुगतान लेना था। लेकिन आरोप है कि कंपनियों ने कर्मचारियों को पूरी रकम दिए बिना या ज्यादा रकम के बिल बनाकर निगम से पैसा ले लिया। कर्मचारियों ने अपने बयान में कहा कि उन्हें सामान्य मासिक वेतन तो मिलता था, लेकिन उनके नाम पर अतिरिक्त भुगतान नहीं मिला। त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.40 करोड़ का भुगतान अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 16 अप्रैल 2023 तक CSMCL (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के प्रबंध संचालक थे। उनके कार्यकाल में पांचों कंपनियों को करीब 152.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें ओवरटाइम के करीब 82.66 करोड़ रुपए, बोनस के 12.21 करोड़ रुपए, चार अतिरिक्त दिनों के काम के 45.02 करोड़ रुपए और सेवा शुल्क के 12.51 करोड़ रुपए शामिल हैं। ACB-EOW का आरोप है कि, अनवर ढेबर के कहने पर निविदा की शर्तों में बदलाव किया गया और कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था बनाई गई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम में से कमीशन भी लिया जाता था। ये सभी आरोप हैं, जिन पर अदालत में सुनवाई होनी है। 28 से 32 करोड़ रुपए कमीशन लेने का आरोप जांच एजेंसी के मुताबिक, मैनपावर कंपनियों से कैश कमीशन इकट्ठा कर त्रिपाठी तक पहुंचाने में सिद्धार्थ सिंघानिया की भूमिका थी। एजेंसी ने बताया कि कंपनियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपए कमीशन आने की बात जांच में सामने आई है। ACB-EOW का आरोप है कि त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल में कंपनियों से करीब 28 से 32 करोड़ रुपए कमीशन लिया और इसे अनवर ढेबर तक पहुंचाया। जांच में अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच सुमीत फैसिलिटीज की ओर से करीब 15.65 करोड़ रुपए दिए जाने की जानकारी भी शामिल है। ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को मिले 48 करोड़ रुपए जांच एजेंसी के मुताबिक, बीआर लोहिया ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड के संस्थापक थे। अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी इसी समूह की कंपनी थी। आरोप है कि लोहिया के निर्देश पर कर्मचारियों के ओवरटाइम और चार अतिरिक्त दिनों के काम के बिल तैयार किए गए। निगम से भुगतान मिलने के बाद कर्मचारियों को यह रकम नहीं दी गई। दोनों कंपनियों को कुल 48.08 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान मिलने की बात जांच में सामने आई है। इसमें से करीब 38.32 करोड़ रुपए त्रिपाठी के कार्यकाल में दिए गए थे। कमीशन के 28.80 लाख रुपए ED की कार्रवाई में मिले चालान के मुताबिक, 29 नवंबर 2023 को ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज के लंबित बिल पास कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को करीब 28.80 लाख रुपए कमीशन दिए जाने थे। जांच एजेंसी के अनुसार, इसके लिए दिल्ली से 29.40 लाख रुपए का चेक रायपुर भेजा गया था। रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपए ऑफिस खर्च के लिए रखे गए और 28.80 लाख रुपए कमीशन के लिए अलग किए गए। रकम पहुंचाने जा रहे कंपनी के कर्मचारियों के पास से ED की कार्रवाई के दौरान यह राशि बरामद हुई थी। आंगड़िया नेटवर्क से रकम भेजने का भी आरोप ACB-EOW ने चालान में आंगड़िया नेटवर्क के जरिए कैश मुंबई और हैदराबाद भेजे जाने से जुड़े बयान भी शामिल किए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, महमूद अहमद खान ने 2019 से 2022 के बीच पी. विजय कंपनी तक करीब 60 से 70 करोड़ रुपए पहुंचाने की बात कही। एजेंसी के अनुसार, यह रकम अरुणपति त्रिपाठी की बताई गई थी। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि त्रिपाठी से जुड़ी कथित अवैध रकम को बेंगलुरु की पेंथियान बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए संपत्ति में लगाया गया। चालान के मुताबिक, इस रकम में से 3 करोड़ रुपए ED ने जब्त किए हैं। त्रिपाठी न्यायिक अभिरक्षा में, लोहिया के खिलाफ फरारी में चालान अरुणपति त्रिपाठी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, बीआर लोहिया विदेश में हैं। नोटिस देने के बाद भी पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं होने पर उनके खिलाफ फरारी पंचनामा तैयार कर चालान पेश किया गया है। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है। ACB-EOW ने आगे की कार्रवाई के लिए इंटरपोल का सहयोग लेने की बात कही है। इस मामले में पहले 12 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है। अब त्रिपाठी और लोहिया के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया है। मामले में आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत करेगी। शराब घोटाले में 20 व्यक्ति और 22 फर्म-कंपनियां आरोपी शराब घोटाले में ही रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा और अख्तर ढेबर सहित 20 लोगों और 22 फर्मों और कंपनियों के खिलाफ दसवां चालान पेश किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, डिस्टिलरी संचालकों ने वैध शराब की आपूर्ति पर कमीशन देने के साथ बिना आबकारी शुल्क चुकाए पार्ट-B शराब तैयार कराई और सरकारी दुकानों से उसकी अवैध बिक्री में सहयोग किया। डुप्लीकेट होलोग्राम, एक्स्ट्रा खाली बोतलों की आपूर्ति और फर्जी परिवहन परमिट के जरिए अवैध शराब दुकानों तक पहुंचाई गई। मैनपावर एजेंसियों के संचालकों ने अपने कर्मचारियों से पार्ट-B शराब बिकवाकर और बिक्री की रकम अलग रखवाकर सिंडिकेट की अवैध शराब बिक्री में मदद की। अवैध रकम दुबई में उपलब्ध कराई गई वहीं, FL-10A लाइसेंसी कंपनियों के जरिए विदेशी शराब की आपूर्ति पर कमीशन लिया गया और संबंधित फर्मों व कंपनियों के माध्यम से रकम आगे पहुंचाई गई। जांच एजेंसी के अनुसार, हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए अवैध रकम देश के कई शहरों और दुबई में उपलब्ध कराई गई। होटल-बार के माध्यम से की अवैध बिक्री नकद रकम के बदले बैंक एंट्री लेकर उसे अनसिक्योर्ड लोन दिखाया गया और जमीन सहित अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया। चालान में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान एन.व्ही. डिस्टिलरी, सिलतरा, रायपुर में नए उत्पादन और पहले से रखी शराब की होटल-बार के माध्यम से अवैध बिक्री से जुड़े सबूत भी शामिल हैं। …………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… शराब घोटाला, कांग्रेस भवन पहुंचाए गए 860-880 करोड़: ED का दावा- कांग्रेस नेता रामगोपाल की मॉनिटरिंग में पहुंचा कैश, 9.06 करोड़ की संपत्ति अटैच छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से जुटाए गए करीब 860 से 880 करोड़ रुपए रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाए गए थे। पढ़ें पूरी खबर…
