मानसून की विदाई के 14 दिन बाद ही इंदौर में आगामी गर्मियों में जलसंकट की आहट सुनाई देने लगी है। शहर की करीब 40 लाख आबादी के सामने पानी की उपलब्धता बनाए रखने की चुनौती को देखते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों से अभी से पानी बचाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ बैठकर पानी बचाने का चार्ट बनाएं, टंकी में ओवरफ्लो रोकने के लिए अलार्म लगवाएं और RO से निकलने वाले वेस्ट पानी का इस्तेमाल पोछा लगाने जैसे कामों में करें। इस बार मालवा निमाड़ में 20-21 इंच बारिश हुई पितृ पर्वत पर बनाए गए वीडियो में मंत्री ने कहा कि इंदौर में सामान्य तौर पर 30 से 40 इंच बारिश होती है, जबकि इस बार पूरे मालवा-निमाड़ में औसतन 20 से 21 इंच बारिश हुई है। ऐसे में आने वाली गर्मियों में जलसंकट की आशंका है। उन्होंने कहा कि पानी की कीमत समझना और उसका सदुपयोग करना जरूरी है। नवरात्रि में माता के सामने पानी बचाने का संकल्प लेने की अपील भी की। आरओ के वेस्ट पानी से पोछा लगाएं, टंकी में अलार्म लगवाएं मंत्री ने पानी बचाने के लिए घरों में रोजमर्रा की आदतें बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि घरों में लगे आरओ से निकलने वाले वेस्ट पानी को फेंकने के बजाय पोछा लगाने जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। पानी की टंकी भरने के बाद ओवरफ्लो होने से रोकने के लिए अलार्म लगवाने की सलाह भी दी। उन्होंने शावर के बजाय बाल्टी से नहाने और बर्तन धोते समय नल लगातार खुला नहीं रखने की अपील की। उनके मुताबिक, छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से पानी की बचत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इंदौर से पानी बचाने का संदेश पूरे मालवा-निमाड़ में जाना चाहिए। नगर निगम का प्लान: रोज 3 करोड़ लीटर पानी दोबारा इस्तेमाल होगा एक तरफ मंत्री लोगों से पानी बचाने की अपील कर रहे हैं, वहीं नगर निगम ताजे पानी की मांग का दबाव घटाने के लिए सीवेज से निकले उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल की तैयारी कर रहा है। बुधवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अमृत प्रोजेक्ट और सीवरेज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर योजनाओं की समीक्षा की। नगर निगम की योजना चार स्थानों पर कुल 30 एमएलडी क्षमता के टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की है। इनसे रोज करीब 3 करोड़ लीटर उपचारित पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इस पानी का इस्तेमाल उन कामों में किया जाएगा, जहां पीने योग्य पानी की जरूरत नहीं होती। चार जगह बनेंगे ट्रीटमेंट प्लांट नगर निगम की अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) परियोजना के तहत प्रस्तावित प्लांटों की क्षमता इस प्रकार है: इन प्लांटों से मिलने वाले उपचारित पानी का इस्तेमाल उद्यानों की सिंचाई, सड़कों की धुलाई, निर्माण कार्य, सीवर सफाई और धूल नियंत्रण में किया जा सकेगा। सरकारी भवनों, अस्पतालों, एयरपोर्ट, मेट्रो और औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी आपूर्ति की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसका उद्देश्य गैर-पेयजल जरूरतों के लिए नर्मदा सहित अन्य ताजे जल स्रोतों पर निर्भरता घटाना है। 21.59 करोड़ रुपए से बनेगा ट्रीटेड वाटर नेटवर्क ‘जल ही अमृत’ परियोजना के तहत उपचारित पानी के संग्रहण और वितरण के लिए 21.59 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। इसमें स्कीम नंबर 78 में 30 लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक और कबिटखेड़ी एसटीपी परिसर में 15 लाख लीटर क्षमता का ग्राउंड स्टोरेज रिजर्वायर बनाने की योजना शामिल है। इनके साथ पंपिंग व्यवस्था और वितरण पाइपलाइन भी विकसित की जाएगी। प्रस्तावित नेटवर्क से निपानिया, बॉम्बे हॉस्पिटल क्षेत्र, महालक्ष्मी नगर, देवास नाका और न्यू लोहा मंडी सहित चिन्हित इलाकों तक उपचारित पानी पहुंचाने की योजना है। 133 उद्यानों तक पहुंचाएंगे उपचारित पानी नगर निगम की योजना में कुल 133 उद्यानों को ट्रीटेड वाटर नेटवर्क से जोड़ना शामिल है। इनमें 23 मौजूदा और 110 नए उद्यान हैं। इसके अलावा 30 हाइड्रेंट स्थापित करने का प्रस्ताव है। उद्यानों की सिंचाई में उपचारित पानी के इस्तेमाल से ताजे पानी की बचत हो सकती है। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और अलग वितरण व्यवस्था जरूरी होगी। प्लांटों के निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और पानी की आपूर्ति शुरू होने की समयसीमा भी अहम रहेगी। 22 जोन में 162 किमी सीवर लाइन का पुनर्वास बैठक में शहर की सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने की योजना पर भी चर्चा हुई। संशोधित सर्वेक्षण के अनुसार, 22 जोन में 162.03 किमी सीवर लाइन के पुनर्वास या प्रतिस्थापन का प्रस्ताव है। इस पर अनुमानित 165.88 करोड़ रुपए खर्च होंगे। योजना में मुख्य रूप से 300 से 800 मिलीमीटर व्यास की सीवर लाइनें शामिल हैं। महापौर की अध्यक्षता में हुई बैठक में ड्रेनेज परियोजनाओं, नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, मौजूदा एसटीपी के संचालन, तालाबों में जल संग्रहण और कान्ह-सरस्वती नदी की सफाई की भी समीक्षा की गई। सिंहस्थ-2028 से जुड़े प्रस्तावित कार्यों, सिरपुर वेटलैंड और यशवंत सागर से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। आने वाली गर्मियों में शहर के सामने चुनौती सिर्फ पानी की उपलब्धता नहीं, बल्कि उसका प्रबंधन भी होगा। घरेलू स्तर पर पानी की बचत के साथ उपचारित पानी का दोबारा इस्तेमाल, सीवरेज ढांचे में सुधार और जल संग्रहण की योजनाओं को समय पर लागू करना जरूरी होगा। नगर निगम की प्रस्तावित परियोजनाओं का वास्तविक असर इनके क्रियान्वयन और पानी के प्रभावी उपयोग पर निर्भर करेगा।
