मां दुर्गा की आराधना का पर्व नवरात्रि आज से शुरू हो रहा है। इसे लेकर देवी मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिरों को आकर्षक सजावट और रोशनी से सजाया गया है। नवरात्रि के दौरान माता का विशेष श्रृंगार, अभिषेक और पूजन होगा। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन की व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं, ताकि भक्तों को आसानी से दर्शन हो सकें। बिजासन माता मंदिर में इस बार तीन के बजाय चार लाइनों में दर्शन होंगे। वहीं, अन्नपूर्णा मंदिर में दिन में तीन बार माता का श्रृंगार किया जाएगा, जबकि हरसिद्धि माता मंदिर में प्रतिपदा से नवमी तक विशेष पूजन और अष्टमी पर हवन होगा। यहां नौ बहनों के साथ विराजमान हैं बिजासन माता बिजासन माता मंदिर के पुजारी अशोक वनगोस्वामी ने बताया कि इस बार नवरात्रि में तिथि का क्षय नहीं हुआ है, बल्कि तिथि बढ़कर आ रही है। उनके मुताबिक, बिजासन माता मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां बिजासन माता अपनी नौ बहनों के साथ विराजमान हैं। मान्यता है कि माता अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। पुजारी ने बताया कि नवरात्रि को लेकर मंदिर में विशेष सजावट की गई है। श्रद्धालु माता को चुनरी अर्पित करने के लिए भी पहुंचते हैं। प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई है। पहले मंदिर में दर्शन के लिए तीन लाइनें थीं, लेकिन इस बार चार लाइनों में दर्शन कराए जाएंगे। नवरात्रि की शुरुआत पर सुबह घट स्थापना की जाएगी। रात में माता का अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र धारण कराए जाएंगे। इसके बाद आरती होगी और नौ दिनों में माता का अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किया जाएगा। अन्नपूर्णा मंदिर में तीन बार होगा माता का श्रृंगार अन्नपूर्णा मंदिर के पुजारी शालिग्राम शर्मा ने बताया कि नवरात्रि को लेकर मंदिर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर में फूलों की सजावट के साथ आकर्षक लाइटिंग की गई है। श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी जयद्रानंद गिरि महाराज ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन रविवार को अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की जाएगी। इसी के साथ 11 पंडितों द्वारा सप्तचंडी यज्ञ शुरू किया जाएगा। प्रतिदिन माता का अभिषेक और आरती होगी तथा छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि माता का सुबह 4 बजे, दोपहर 12 बजे और शाम 4 बजे श्रृंगार किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए रोजाना खिचड़ी प्रसाद का वितरण भी होगा। हरसिद्धि मंदिर में प्रतिपदा से नवमी तक विशेष पूजन हरसिद्धि माता मंदिर के पुजारी पंडित सुनील शुक्ला ने बताया कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1766 में श्रीमंत मालेराव होलकर के शासनकाल में हुआ था और इसकी देखरेख मां अहिल्याबाई के संरक्षण में हुई थी। तभी से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां आश्विन और चैत्र, दोनों नवरात्रि में विशेष आयोजन होते हैं। नवरात्रि में प्रतिपदा से नवमी तक प्रतिदिन माता का श्रृंगार, अभिषेक और पूजन किया जाएगा। अष्टमी पर हवन होगा, जबकि नवमी को कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। पुजारी के मुताबिक, दशहरे पर भी मंदिर की विशेष परंपरा रही है। मान्यता है कि इंदौर के पूर्व शासक दशहरा मनाने के बाद यहां माता के दर्शन करने और सोना-पत्ती चढ़ाने आते थे। महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइनें हरसिद्धि माता मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग दर्शन लाइनें बनाई जाएंगी। पंडित शुक्ला ने बताया कि मंदिर के बाहर और परिसर के भीतर सुरक्षा गार्ड तैनात रहेंगे, जो भीड़ और दर्शन व्यवस्था संभालेंगे। मंदिर प्रबंधन का प्रयास है कि नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु व्यवस्थित तरीके से माता के दर्शन कर सकें।
