पर्यावरण में बदलाव के कारण पक्षियों की कमी हो रही है। पितृ पक्ष में पूर्वजों को श्राद्ध की प्रसादी खिलाने के लिए लोगों को अपने घरों के आसपास कौए नहीं मिले। लोग कुछ लोग ओवर ब्रिज पर पहुंचे। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में कौए दिखाई देते हैं। इसीलिए लोगों ने रेलिंग पर पत्तल परोस दी। ऐसा लगा जैसे कौओं की पंगत हो। हालांकि अधिक मात्रा में भोजन आने से यहां कौओं की संख्या कम दिखाई दी। दोपहर में तो कौए नजर नहीं आए। बर्ड एक्सपर्ट धर्मेंद्र पारे ने बताया कि कौओं की संख्या में लगातार कमी आ रही है। इसका मुख्य कारण भोजन व्यवहार में बदलाव है। वहीं पर्यावरण और पारिस्थितिकी में परिवर्तन भी बड़ा कारण है। पलायन, खेती का बंजर होना, पशुपालन में कमी और विदेशी खर-पतवार के फैलने से कौओं के लिए भोजन की उपलब्धता घट गई है। कौए मुख्य रूप से कीड़े-मकोड़े खाते हैं, लेकिन उनका प्रिय भोजन शहरी क्षेत्रों में कम होता जा रहा है। इसके अलावा, ऊंचे और बड़े पेड़ों की कमी के कारण कौओं के लिए घोंसला बनाना भी मुश्किल हो गया है।
