कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा सरकार पर आदिवासी क्षेत्रों की बदहाली, बढ़ते कर्ज, मंत्रियों-अधिकारियों के टकराव और अलग-अलग घटनाओं में हुई मौतों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के बालाघाट दौरे में कलेक्टर और एसपी की गैरमौजूदगी को प्रशासनिक अराजकता बताया। पटवारी ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ विधानसभा समेत अन्य मंचों पर शिकायत करने की बात कही। राहुल गांधी ने पीड़ित आदिवासी परिवारों से की मुलाकात पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी का बालाघाट दौरा राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीड़ित आदिवासी परिवारों की पीड़ा सुनने के लिए था। उन्होंने ऐसे परिवारों से मुलाकात की, जिनके तीन महीने से लेकर 17 साल तक के बच्चों की मौत हुई है। पटवारी ने कहा कि इन परिवारों की समस्याओं को सरकार और प्रशासन के सामने उठाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और विकास की स्थिति गंभीर है। करीब 25 साल से भाजपा की सरकार होने के बावजूद आदिवासी बच्चों को समान अवसर नहीं मिल रहे। पटवारी ने आरोप लगाया कि आदिवासी विकास योजनाओं का पैसा राजनीतिक आयोजनों और रैलियों में खर्च किया जा रहा है। कलेक्टर-एसपी के खिलाफ विधानसभा में मामला उठाने की बात पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं और उनके दौरे में कलेक्टर-एसपी की मौजूदगी प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। उनके मुताबिक उन्होंने मुख्य सचिव और दोनों अधिकारियों से बात कर दौरे में मौजूद रहने को कहा था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस दोनों अधिकारियों की शिकायत विधानसभा में करेगी। विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने, आईएएस-आईपीएस एसोसिएशन के साथ राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री को शिकायत भेजने की बात भी उन्होंने कही। ‘अफसर मंत्री की नहीं सुनते तो मंत्री पद पर क्यों?’ पटवारी ने भाजपा की कोर कमेटी बैठक के बाद सामने आए बयानों का हवाला देते हुए सरकार और अधिकारियों के बीच समन्वय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री कह रहे हैं कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते तो सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री की बात अधिकारियों द्वारा नहीं मानने की स्थिति में भी उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के कथित बयान, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कलेक्टर-एसपी के उपलब्ध नहीं होने संबंधी बयान और मुख्यमंत्री द्वारा 15 दिन तक फोन नहीं उठाने के एक भाजपा नेता के कथित बयान का उल्लेख किया। पटवारी ने कहा कि सरकार के भीतर ऐसे मतभेद सामने आना गंभीर स्थिति है। उन्होंने अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में सरकार के बजाय ‘सर्कस’ चल रहा है। कर्ज और सरकारी खर्च पर भी निशाना पटवारी ने दावा किया कि सरकार ने अक्टूबर में तीन बार कर्ज लिया है। उन्होंने प्रदेश पर करीब छह लाख करोड़ रुपए का कर्ज और प्रति व्यक्ति करीब 80 हजार रुपए का कर्ज होने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर कर्ज ले रही है, दूसरी ओर विमान-हेलीकॉप्टर और सरकारी प्रचार पर खर्च कर रही है। भाजपा प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब की जेसीबी से फूल बरसाने वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए पटवारी ने राजनीतिक आयोजनों में दिखावे पर भी सवाल उठाए। बालाघाट, सागर और इंदौर की घटनाओं पर जिम्मेदारी मांगी पटवारी ने मुख्यमंत्री के उज्जैन दौरे का जिक्र करते हुए बालाघाट में बच्चों की मौत पर सवाल उठाए। उन्होंने सागर में जहरीली शराब, इंदौर में दूषित पानी और छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं में राजनीतिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने विजय शाह से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार मंत्री के बचाव में खड़ी रही। अमित शाह से पूछे सवाल पटवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से प्रदेश सरकार और संगठन से जुड़े मामलों में जवाब मांगने की अपील की। उन्होंने छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत, सागर की जहरीली शराब, इंदौर के दूषित पानी और आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण के लिए राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और अधिकारियों के बीच विवाद, बढ़ते कर्ज और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए। ‘भ्रष्टाचार का असर हर घर तक’ पटवारी ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि इसका असर प्रदेश के हर घर तक पहुंच रहा है। उन्होंने इसे ‘भ्रष्टाचार का कैंसर’ बताया और कहा कि कांग्रेस भी अपने शासनकाल में इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रखेगी और बालाघाट कलेक्टर-एसपी के मामले को विधानसभा में उठाएगी।
