मप्र के सर्वे में 22.3% का ब्लड प्रेशर बढ़ा, 15.3% ओवरवेट/मोटे, 6.8% युवाओं की शुगर बढ़ी मिली हेल्थ रिपोर्टर | भोपाल
हार्ट अटैक अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं है। मप्र में 30 साल से कम उम्र के हार्ट अटैक मरीजों पर हुए अध्ययन में 51.2% में डिस्लिपिडेमिया यानी खून में कोलेस्ट्रॉल और अन्य लिपिड की गड़बड़ी मिली। यह युवाओं में प्रमुख रिस्क फैक्टर के रूप में सामने आई है। मप्र में हुए डब्ल्यूएचओ-स्टेप्स सर्वे में भी दिल की बीमारी के कई खतरे मिले। 5,680 लोगों में 22.3% का ब्लड प्रेशर बढ़ा था, 15.3% ओवरवेट या मोटे और 6.8% में ब्लड ग्लूकोज बढ़ा मिला। करीब एक-चौथाई वयस्कों में तीन या उससे ज्यादा सीवीडी रिस्क फैक्टर मिले। यानी खतरा सिर्फ बीपी-शुगर तक सीमित नहीं है। कोलेस्ट्रॉल की गड़बड़ी, बढ़ता वजन और कम शारीरिक सक्रियता भी धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं। लिपिड की गड़बड़ी अक्सर बिना लक्षण धमनियों को ब्लॉक करती है। हार्ट अटैक के बाद भी एलडीएल 55 से नीचे रखना जरूरी, लिपिड दोबारा कराना जरूरी
एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह के मुताबिक हार्ट अटैक के बाद कई मरीज दवाएं लेते हैं, लेकिन लिपिड दोबारा नहीं कराते। ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में एलडीएल 55 मिलीग्राम/डीएल से नीचे रखने की सलाह दी जाती है। पहली दवा से लक्ष्य हासिल न हो तो डॉक्टर दूसरी दवाएं जोड़ सकते हैं। नियमित एलडीएल जांच जरूरी है, क्योंकि स्तर नियंत्रित न होने पर दोबारा हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। भागदौड़- अधूरी नींद युवाओं में खतरा बढ़ा रही, वायरस-संक्रमण भी थक्के जमा रहा
हमीदिया कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार भागदौड़, नशा और अधूरी नींद युवाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ा रही है। जीएमसी की स्टडी के मुताबिक व्यक्ति को वायरस संक्रमण होने के बाद रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत पर असर की पड़ताल की गई। इसके कमजोर होने पर रक्त के थक्के बनने और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। ब्रेन और हार्ट एक दूसरे के पूरक, 70% या ज्यादा ब्लॉकेज होने पर सर्जरी का विकल्प
सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. टीएन दुबे के अनुसार हार्ट और ब्रेन की बीमारियों के जोखिम कारक काफी हद तक समान हैं। बीपी, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या स्ट्रोक के जोखिम वाले मरीजों में कैरोटिड डॉप्लर से गर्दन की धमनियों की जांच महत्वपूर्ण है। ब्रेन अटैक अचानक होता है, लेकिन कैरोटिड आर्टरी में ब्लॉकेज लंबे समय से बन सकता है। 70% या ज्यादा ब्लॉकेज पर स्टेंट या सर्जरी का विकल्प है। 40% मरीज शुरुआती लक्षणों के साथ पहुंचे।
21.33% हार्ट अटैक या हृदय संबंधी बीमारी के बाद पहुंचे।
2% गंभीर स्थिति में डायग्नोज किए गए।
37.33% मरीज अत्यधिक उच्च जोखिम श्रेणी में मिले।
