दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन के पार्ट-1 में आपने पढ़ा और देखा कि उज्जैन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में बिजली लाइन शिफ्टिंग के करीब ₹250 करोड़ के काम में गड़बड़ी की गई। पड़ताल में बिजली विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत के संकेत मिले। अब भास्कर की पड़ताल में विभागीय गलियारों में ‘मालवीय एंड एसोसिएट्स’ के नाम से चर्चित कथित सिंडिकेट की भूमिका सामने आई है। भास्कर रिपोर्टर ने ठेकेदार बनकर स्टिंग किया तो सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने अफसरों के साथ मिलकर काम ‘मैनेज’ करने की बात कही। पड़ताल में एक और चौंकाने वाला कनेक्शन सामने आया-विभाग में संविदा पर ड्राइवर के तौर पर काम करने वाला व्यक्ति GST दस्तावेजों में एक इंडस्ट्री का प्रोपराइटर दर्ज है। आखिर कैसे काम करता है यह कथित सिंडिकेट? इसके पीछे कौन लोग हैं? और बिना सैंपल दिए बिजली के सामान की टेस्ट रिपोर्ट कैसे पास हो जाती है? पढ़िए भास्कर इन्वेस्टिगेशन का पार्ट-2 कैसे काम करता है यह कथित सिंडिकेट? 7 कड़ियों में समझें भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में कथित सिंडिकेट के काम करने का तरीका सामने आया। पड़ताल के मुताबिक, इसकी गतिविधियां सहायक यंत्री रविकांत मालवीय की देखरेख में संचालित होने की बात सामने आई। ₹12 हजार का संविदा ड्राइवर, ₹3 करोड़ की पोल फैक्ट्री का मालिक भास्कर की पड़ताल में आरोप सामने आया कि रविकांत मालवीय ने इस कारोबार को संचालित करने के लिए अपने रिश्तेदार विजेंद्र कुलदीप मालवीय का इस्तेमाल किया। अब पढ़िए मालवीय एसोसिएट्स से जुड़े विद्युत कंपनी के कर्मचारियों की खुफिया कैमरे में दर्ज बातचीत भास्कर रिपोर्टर ने राजस्थान का ठेकेदार बनकर श्रीराम से बात की। बातचीत में श्रीराम ने पेटी कॉन्ट्रैक्ट लेने और अधिकारियों को ‘मैनेज’ करने का दावा किया। रिपोर्टर: अभी मुझे उज्जैन में नया काम मिला है, मदद चाहिए?
श्रीराम: करवा देंगे। हम ही परमिट देने वाले हैं। मटेरियल में मजदूर 8 से 10 किलो कम-ज्यादा कर दें तो भी समस्या नहीं है। 20 किलोमीटर की लाइन पूरी कर चुका हूं। मटेरियल जमा कराने पर आज तक किसी ने नहीं पूछा कि कम क्यों है। मैं अपने अधिकारी को मैनेज कर लूंगा। रिपोर्टर: अधिकारी कौन, मालवीय जी हैं?
श्रीराम: मालवीय का ट्रांसफर हो गया है। पिछली बार उन्होंने ₹15 लाख देकर ट्रांसफर रुकवाया था। अब उनके खिलाफ कई जांचें चल रही हैं। मैं उनके साथ बैठता-खाता हूं। मालवीय साहब के साथ दो साल में मैंने ₹30 लाख कमाए हैं। मैं तो कर्मचारी हूं, सोचिए उन्होंने कितना कमाया होगा? हम लोग साथ में ₹2 से ₹4 लाख की शराब पी चुके होंगे। मैं जो भी फाइल ले जाता था, वे साइन कर देते थे। रिपोर्टर: लैब टेस्ट का क्या रहेगा?
श्रीराम: उज्जैन में NABL लैब का सिस्टम हैक हो गया था। सब इंदौर से करवाते हैं। टेस्ट पास करवाना है तो ₹25,000 लगेंगे। इंदौर में एक व्यापारी पैसा लेकर टेस्ट पास करवा देता है। रिपोर्टर ने अरिहंत इलाके में दो ट्रांसफॉर्मर शिफ्ट करने के सिलसिले में अरविंद से मुलाकात की। रिपोर्टर: सिंहस्थ में कहीं लाइन शिफ्ट हो रही है, कोई पुराना मटेरियल मिल जाएगा?
अरविंद: अभी माहौल गर्म है। काम ऐसे होता है कि 50 पोल लगने हैं तो उनमें से 10 असली लगाने पड़ेंगे, बाकी एडजस्ट हो जाएगा। 37 किलो का पोल है तो 30, 31 या 34 किलो का लगा सकते हैं। रिपोर्टर: अधिकारियों से सपोर्ट मिल जाएगा?
अरविंद: अगर अधिकारी साथ हैं तो सब हो जाता है। कंडक्टर टेस्टिंग के लिए कुछ और देंगे और साइट पर कुछ और लगाएंगे। 4-5 ट्रांसफॉर्मर आएं और सिर्फ एक का टेस्ट कराना हो तो एक ही असली खरीदेंगे, बाकी मैनेज कर लेंगे। उज्जैन में यही चलता है। बिना सैंपल दिए टेस्ट रिपोर्ट पास: प्राइवेट लैब पर गंभीर सवाल बिजली विभाग के नियमों के मुताबिक, लाइन शिफ्टिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का सरकारी NABL (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज) लैब से परीक्षण जरूरी है। भास्कर टीम ने उज्जैन के सिविल ठेकेदार बनकर इंदौर की दो प्राइवेट लैब से संपर्क किया। स्टिंग में बिना सैंपल दिए भी रिपोर्ट जारी करने का दावा किया गया। साथ ही सरकारी लैब से फेल बताए गए सैंपल की रिपोर्ट भी पास कराने की बात कही गई। भास्कर रिपोर्टर ने विशाल गुप्ता से ‘डॉग कंडक्टर’ (एक विशेष प्रकार का तार है, जिसका इस्तेमालओवरहेड पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों (बिजली के तारों) में किया जाता है) की अर्जेंट टेस्ट रिपोर्ट मांगी। रिपोर्टर ने लैब मालिक प्रतीक शर्मा और संचालक सुनील से संपर्क किया। डील: सुनील ने कहा, “आज पेमेंट और डिटेल भेजेंगे तो कल सुबह रिपोर्ट मिल जाएगी। ₹5,000 लगेंगे, जीएसटी अलग।” पेमेंट और रिपोर्ट: रिपोर्टर ने दोपहर 1:17 बजे ₹5,000 ट्रांसफर किए। शाम 4:49 बजे सुनील ने रिपोर्ट का ड्राफ्ट और शाम 6:38 बजे पास रिपोर्ट भेज दी। स्टिंग में सामने आया: इस लैब को भी कोई सैंपल नहीं दिया गया था। इसके बावजूद 11 केवी डॉग कंडक्टर की पास रिपोर्ट भेजी गई। हाथी पर सवार होकर जन्मदिन मनाया, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल; प्रभार छीना यह पूरा मामला पश्चिम शहरी संभाग से जुड़ा है, जिसका प्रभार रविकांत मालवीय के पास था। अगस्त में उनसे उच्चदाब उपसंभाग, पश्चिम शहर संभाग का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया। यह कार्रवाई बिजली लाइन शिफ्टिंग में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के चलते नहीं, बल्कि उनके जन्मदिन समारोह को लेकर की गई। दरअसल, 23 अगस्त को रविकांत मालवीय का जन्मदिन था। वे हाथी पर सवार होकर दफ्तर पहुंचे। वहां उन्होंने ऐसा केक काटा, जिसका डिजाइन नोटों की गड्डियों जैसा था। समारोह के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हें नोटिस दिया गया। इसके बाद उनसे उच्चदाब उपसंभाग, पश्चिम शहर संभाग का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया।
