बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू की गई RDSS (वितरण क्षेत्र सुधार योजना) में भारी फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। पश्चिम क्षेत्र में इस योजना के तहत सबसे ज्यादा ट्रांसफॉर्मर उज्जैन में स्वीकृत हुए हैं। नियम के मुताबिक ये ट्रांसफॉर्मर उन जगहों पर लगाए जाने थे, जहां पुराने ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड हो रहे हैं और बार-बार जलने के कारण लोग परेशान हैं। ‘भास्कर’ ने जब उज्जैन जिले के 15 गांवों की पड़ताल की, तो कागजों में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। जिन इलाकों में पुराने ट्रांसफॉर्मर पर ओवरलोड नहीं था, वहां भी नए ट्रांसफॉर्मर लगा दिए गए। इतना ही नहीं, ऐसी जगहों पर भी नए ट्रांसफॉर्मर स्थापित कर दिए गए, जहां पुराना ट्रांसफॉर्मर ही अतिरिक्त लोड संभालने में सक्षम था। दूसरी ओर, जिन गांवों में ट्रांसफॉर्मर क्षमता से अधिक लोड उठा रहे हैं, वहां जरूरत के अनुसार काम ही नहीं हुआ। वहीं, बिजली कंपनी के अधिकारी इस पूरे मामले की जानकारी होने से इनकार कर रहे हैं। उदाहरण: एक ही खेत में दो ट्रांसफॉर्मर, तो कहीं थोड़ी ही दूरी पर तीन केस-1 | गांव: चिढ़ी रावदिया पहला ट्रांसफॉर्मर: यहां पहले से 100 kVA का ट्रांसफॉर्मर लगा है, जिस पर 9 कनेक्शनों का कुल 60 kVA लोड है। नया ट्रांसफॉर्मर: जरूरत न होने के बावजूद इसी गांव के लिए 100 kVA का एक और नया ट्रांसफॉर्मर मंजूर कर लगा दिया गया। केस-2 | गांव: आलोट जांगीर पहला ट्रांसफॉर्मर: यहां ‘मैलनाथ वाला’ स्थान पर 100 kVA की क्षमता वाला ट्रांसफॉर्मर लगा है, जिस पर फिलहाल केवल 61 kVA का लोड है। नया ट्रांसफॉर्मर: मैलनाथ वाला पर ही 100 kVA का दूसरा नया ट्रांसफॉर्मर लगा दिया गया है, जिस पर अभी मात्र 38 kVA का लोड है। केस-3 | गांव: पगारा पहला ट्रांसफॉर्मर: इस गांव में 100 kVA का ट्रांसफॉर्मर पहले से मौजूद है, जो सरकारी रिकॉर्ड में ‘गांव वाला ट्रांसफॉर्मर’ के नाम से दर्ज है। नया ट्रांसफॉर्मर: पगारा में 100 kVA का एक और नया ट्रांसफॉर्मर लगा दिया गया, जिस पर केवल 55 kVA का लोड दर्शाया गया है।
