Homeदेशमद्रास हाईकोर्ट बोला-पहली शादी से अनजान दूसरी पत्नी आरोपी नहीं:लेकिन उसे पति...

मद्रास हाईकोर्ट बोला-पहली शादी से अनजान दूसरी पत्नी आरोपी नहीं:लेकिन उसे पति का रिश्तेदार भी नहीं मान सकते

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि पति की पहली शादी से अनजान दूसरी पत्नी पर बिगैमी (दूसरी शादी) का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी महिला पति की रिश्तेदार नहीं मानी जाएगी। इसलिए उस पर BNS की धारा 85 के तहत क्रूरता का केस भी नहीं चलेगा। याचिकाकर्ता महिला ने कहा कि शादी के समय उसे पति की पहली शादी की जानकारी नहीं थी। पति ने यह बात उससे छिपाई थी। महिला ने कहा कि इस मामले में उसे धोखा दिया गया और वह अपराध में शामिल नहीं थी। जस्टिस एन रमेश ने मंगलवार को राजलक्ष्मी बनाम द स्टेट मामले की सुनवाई की और फैसला सुनाया। महिला ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी, केस पहली पत्नी की शिकायत पर दर्ज हुआ था। कोर्ट बोला- दूसरी पत्नी का न खून का रिश्ता, न रिश्तेदारी कोर्ट ने कहा कि BNS की धारा 85, IPC की धारा 498A के अनुरूप है। यह धारा किसी पीड़ित महिला के पति, पति के रिश्तेदार की ओर से की गई क्रूरता पर लागू होती है। यह प्रावधान सामान्य तौर पर हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता। यह पति और उसके रिश्तेदारों तक सीमित है। रिश्तेदारी आम तौर पर खून, शादी या गोद लेने के रिश्ते से बनती है। कोर्ट ने कहा कि जिस दूसरी पत्नी को पति की पहली शादी की जानकारी नहीं थी, वह पति की रिश्तेदार नहीं मानी जा सकती। ऐसे में पति ने दोनों महिलाओं को धोखा दिया। इसलिए दोनों महिलाओं को आरोपी और पीड़ित नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सागरी हेमब्रम बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल एंड एनआर मामले का भी हवाला दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था कि IPC की धारा 494 उस व्यक्ति पर लागू होती है, जो वैध शादी के रहते दूसरी शादी करता है। यह धारा उस व्यक्ति पर लागू नहीं होती, जिससे वह दूसरी शादी करता है। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि यही तर्क BNS की धारा 85 पर भी लागू होता है। बिगैमी के प्रावधान पर टिप्पणी कोर्ट ने कहा कि BNS की धारा 82 में वही प्रावधान हैं, जो इंडियन पीनल कोड यानी IPC की धाराओं 494 और 495 में थे। इसके तहत उस व्यक्ति को सजा मिल सकती है, जो पहली शादी और जीवनसाथी के जिंदा रहते दूसरी शादी करता है। कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी पति पहली शादी की बात छिपाता है, तो इस प्रावधान के तहत सजा बढ़ जाती है। यानी बिगैमी का आरोपी वही व्यक्ति होता है, जिसका जीवनसाथी पहले से जीवित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दूसरी पत्नी को जानकारी या उसकी भागीदारी दिखाने वाली कोई सबूत नहीं होने पर उसे मामले में नहीं घसीटा जा सकता। दूसरी पत्नी की अग्रिम जमानत मंजूर कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता अपराधी नहीं है। न उससे हिरासत में पूछताछ जरूरी है। हालांकि जानकारी नहीं होने के दावे की जांच की जानी चाहिए। क्रूरता के केस पर कोर्ट ने कहा कि महिला पति की रिश्तेदार नहीं है। उसे भी पति से धोखा मिला। इन बातों को देखते हुए कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ जमानत देने का फैसला किया। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ‘पत्नी का हर जगह पति के साथ जाना जरूरी नहीं’: तलाक केस में मद्रास HC बोला- ‘वोडाफोन डॉग’ की तरह पीछे चलने की उम्मीद नहीं कर सकते मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी से पति के पीछे वोडाफोन के एड वाले पग डॉग की तरह चलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। नौकरी या दूसरी वजहों से पति जहां जाए, पत्नी का हर बार उसके साथ जाना जरूरी नहीं है। यह मामला उस कपल से जुड़ा है, जो करीब 16 साल से अलग रह रहा था। दोनों की शादी 34 साल पहले, सितंबर 1992 में हुई थी। कपल के चार बच्चे भी हैं। अभी पति की उम्र 67 साल है। पढ़ें पूरी खबर…

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here