सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 2 करोड़ रुपए जमा करने के लिए आखिरी बार 2 हफ्ते का समय दिया है। यह रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। कोर्ट ने अभिनेता को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने उनके पुराने रवैये को देखते हुए भरोसा जताने में भी संदेह जाहिर किया। CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘उनके पुराने रवैये को देखते हुए। कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है? वे बॉलीवुड में ड्रामा और एक्टिंग करने में माहिर हैं। कोर्ट में भी वही कर रहे हैं।’ चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से मिली राहत जारी रखी है। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। अदालतों में अब तक 15 सुनवाई, 14 बार आदेश नहीं माना राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस मामले में पिछले 3 सालों में दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 15 बार सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने कभी भुगतान करने और कभी समझौते की बात कही। लेकिन हर बार राजपाल ने बात नहीं मानी। इससे पहले ट्रॉयल कोर्ट में भी मामला 6 साल चला। कोर्ट रूम LIVE: भुगतान के लिए प्रपोजल बनाकर लाएं सुप्रीम कोर्ट: राजपाल पैसे के भुगतान के लिए प्रस्ताव लेकर आएं। कम से कम ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करें। राजपाल यादव के वकील पीएस पाटवालिया: राजपाल यादव और उनकी मां के पास कुछ प्रॉपर्टी है, जिसे बेचकर वे रुपए इकट्ठा कर लेंगे। दो हफ्ते की मोहलत दे दी जाए। अभी उनके पास पैसे नहीं हैं, पर वे पैसे देना चाहते हैं। CJI सूर्यकांत: राजपाल अभिनेता हैं और उम्मीद है कि वह यहां भी एक्टिंग नहीं कर रहे होंगे उनका पिछला आचरण भरोसा पैदा नहीं करता। विवाद 2010 का, राजपाल ने करीब ₹5 करोड़ का लोन लिया था यह विवाद 2010 का है। राजपाल ने अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट करने के लिए दिल्ली की एक कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था। इस फिल्म का नाम ‘अता पता लापता’ था। कॉमेडी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म इतनी कमाई नहीं कर पाई कि उसका खर्च निकल सके। इसके बाद राजपाल यादव को लोन चुकाने में दिक्कत हुई। ब्याज और दूसरे चार्ज जुड़ने से बकाया रकम कई साल में बढ़ती गई। यह रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपए हो गई। 2012 में मुरली प्रोजेक्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था विवाद बढ़ने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में फिल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फिल्म के अधिकारों में तीसरे पक्ष का हित बनाने से रोक दिया था। इसके बाद सात चेक बाउंस होने पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सात शिकायतें दर्ज की गईं। यादव की ओर से बाद में हुए 21 अप्रैल 2013 के सहमति समझौते पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत दोनों पक्षों ने 10.40 करोड़ रुपए के पूर्ण और अंतिम समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें 40 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए पहले ही दिए जा चुके थे। समझौते की सुरक्षा के लिए चार नए पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे। यादव की याचिका के मुताबिक, इस समझौते के तहत पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस किए जाने थे, लेकिन मुरली प्रोजेक्ट्स ने बाउंस हुए चेक के मामलों को आगे बढ़ाया। मामला दिल्ली हाईकोर्ट होते हुए, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल को दोषी ठहराया था ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में यादव को हर मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। बाद में सजा कम की गई। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया। सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए का जुर्माना कायम रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के फैसले में सजा में दखल देने से इनकार कर दिया। ———————————– राजपाल यादव बोले- जिनका पैसा बकाया है, घर पहुंचा दूंगा:कहा- 13 साल में 250 करोड़ का नुकसान हुआ; घर नीलाम कर रहा बैंक बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव ने चेक बाउंस और कर्ज विवाद के बीच दावा किया था कि पिछले 13 साल में उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए का निजी नुकसान हुआ है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में 55 साल के एक्टर ने कहा था कि वे एक जिम्मेदार इंसान हैं और जिन लोगों का पैसा बकाया है, वे उसे चुका देंगे या उनके घर तक पहुंचा देंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
