धार जिले के नालछा थाना क्षेत्र अंतर्गत एक युवती को अगवा कर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पीड़िता के परिजन ने आरोप लगाया है कि घटना की शिकायत करने के बाद भी नालछा पुलिस 10-12 दिनों तक उन्हें टहलाती रही। मीडिया के दखल और वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद जांच शुरू हुई है। पीड़िता के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को वह बाजार कपड़े खरीदने गई थी। वहां सामरिया गांव का रहने वाला अर्जुन उसे जबरदस्ती अपनी बाइक पर बैठाकर एक कमरे पर ले गया। आरोप है कि वहां आरोपी ने रात भर उसके साथ गलत काम किया। अगले दिन आरोपी का चाचा धूमसिंह और भाई सूर्या भी वहां पहुंच गए। दोनों ने युवती को डरा-धमकाकर इंदौर से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया। दिल्ली में आरोपी ने युवती को 5 दिनों तक बंधक बनाकर रखा। जब पीड़िता ने जान देने की चेतावनी दी, तब आरोपी उसे वापस इंदौर लेकर आया। इंदौर पहुंचने पर आरोपी के परिजन ने युवती को धमकी दी कि यदि उसने पुलिस या अपने परिवार को कुछ बताया, तो उसे जान से मार देंगे। इसके बाद आरोपी उसे नालछा लाकर परिजन को सौंपकर भाग गए। घर लौटकर पीड़िता ने अपने परिजन को पूरी आपबीती सुनाई। 10-12 दिनों तक चक्कर काटता रहा पीड़ित परिवार पीड़िता के पिता का आरोप है कि वे तुरंत नालछा थाने पहुंचे और घटना की जानकारी देकर बयान दर्ज करने का निवेदन किया। लेकिन हेड कांस्टेबल ने बाद में फोन करके बुलाने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया। पीड़ित पिता 10 से 12 दिनों तक थाने के चक्कर काटते रहे, पर पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। एसडीओपी के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई जांच शनिवार को पुलिस की अनदेखी से परेशान होकर पीड़ित परिवार ने मीडिया से संपर्क किया। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद धामनोद एसडीओपी मोनिका सिंह के निर्देश पर धामनोद थाने में महिला सब इंस्पेक्टर ने पीड़िता के बयान दर्ज कर जांच शुरू की गई है। पीड़ित परिवार ने मुख्य आरोपी अर्जुन पर अपहरण और दुष्कर्म, सह-आरोपियों पर धमकी देने का केस दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले हेड कांस्टेबल के खिलाफ भी दंडात्मक कदम उठाने की मांग की है। एसडीओपी मोनिका सिंह का कहना है कि पूर्व में गुमशुदगी दर्ज थी, अब बयान लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
