मध्यप्रदेश के सरकारी डिजिटल सिस्टम के सबसे अहम ठिकाने स्टेट डेटा सेंटर (एसडीसी) की जिम्मेदारी संभाल रही रेलटेल कॉर्पोरेशन के कामकाज पर एमपीएसईडीसी ने बार-बार सवाल उठाए। करीब 115 करोड़ रुपए के डेटा सेंटर विस्तार और डिजास्टर रिकवरी सेंटर की स्थापना के प्रोजेक्ट में सुरक्षा परीक्षण लंबित रहने, प्रशिक्षित स्टाफ की कमी, खाली शिफ्ट, सिस्टम डाउन, इन्सिडेंट रिस्पॉन्स में देरी, रखरखाव में लापरवाही और सर्विस लेवल एग्रीमेंट (एसएलए) का पालन नहीं करने जैसी कमियां रिकॉर्ड पर आईं। इसके बावजूद कंपनी का अनुबंध समाप्त नहीं हुआ। उलटे उसे 41 करोड़ रुपए का एक्सटेंशन भी दिया गया। भास्कर ने एमपीएसईडीसी के अधिकारियों के जारी किए 11 नोटिस निकाले हैं। इनमें परियोजना के संचालन और सुरक्षा से जुड़ी कई खामियां दर्ज हैं। एमपीएसईडीसी ने अप्रैल 2025 में रेलटेल का अनुबंध समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। रेलटेल का पक्ष जानने के लिए एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पवन भार्गव को ई-मेल किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 3 साल में सरकारी डिजिटल सिस्टम पर हमले केस – 1
22 मई 2023 को मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के आंतरिक आईटी सिस्टम पर रैनसमवेयर हमला हुआ। अधिकारियों के बीच संचार के लिए इस्तेमाल होने वाला सिस्टम प्रभावित हुआ। पुलिस में शिकायत के साथ सर्वर की स्कैनिंग और रिकवरी शुरू की गई। एमपीएसईडीसी और CERT-In को भी जानकारी दी गई। केस – 2
दिसंबर 2023: ई-नगरपालिका पोर्टल पर साइबर हमला हुआ। डेटा करप्ट होने के बाद पोर्टल बंद करना पड़ा। यह प्रदेश के 413 कस्बों और शहरों में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, संपत्ति कर, जलकर और स्वच्छता कर जैसी सेवाओं से जुड़ा था। अधिकारियों के अनुसार ऑफलाइन बैकअप सुरक्षित था। केस – 3 व 4 मार्च 2024: उज्जैन की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के ऐप का सर्वर धीमा हो गया। लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। इसे डीडीओएस हमला बताया और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत की। 22 अक्टूबर 2024: एसडीसी सर्वर में वायरस अटैक हुआ। यह घटना डेटा सेंटर की सुरक्षा पर सीधे सवाल खड़े करती है।
इस तरह नोटिस में दर्ज गंभीर खामियां 1. जुलाई 2023 में वीएपीटी टेस्टिंग, साइबर इंश्योरेंस और सुरक्षा उपकरणों को एससी-1 व आईएसएमएस से जोड़ने जैसे काम पूरा नहीं होने पर आपत्ति जताई। 2. रेलटेल के पास परियोजना संचालन के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित मैनपावर नहीं था। कई बार निर्धारित शिफ्ट में कर्मचारी नहीं पहुंचे। इससे सुरक्षा प्रभावित हुई। 3. रिकॉर्ड में बार-बार सिस्टम डाउन होने, इन्सिडेंट रिस्पॉन्स में देरी, मेंटेनेंस शेड्यूल मिस होने व महत्वपूर्ण शिफ्ट में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने की बात है। 4. डीआर सेंटर का काम मुख्य डेटा सेंटर में समस्या आने पर सेवाओं को वैकल्पिक तरीके से जारी रखना है। कई एप्लीकेशन अब तक रिप्लिकेट नहीं हो सके। 5. 27 फरवरी 2025 के 25% विस्तार के वर्क ऑर्डर की डिलीवरी 30 मार्च 25 तक होनी थी। तय समय तक पूरा सामान नहीं पहुंचा, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई। 6. एसएलए उल्लंघन के कारण दो क्यूजीआर पर 95.93-95.93 लाख रुपए, यानी करीब 1.92 करोड़ रुपए की पेनल्टी दर्ज है। सीधी बात अंशुमन राज, एमडी, SWAN हम लगातार नोटिस दे रहे हैं लगातार लापरवाहियां आ रही हैं?
– जितने नोटिस आपने बताएं हैं, उसके अलावा भी हम कई नोटिस जारी कर चुके हैं। कंपनी को टर्मिनेट क्यों नहीं किया?
– वह भी भारत सरकार का उपक्रम है, हम समय-समय पर सीनियर्स को एसएलए का पालन नहीं होने के बारे में बताते रहते हैं। कंपनी को एक्सटेंशन भी दिया है?
– वह तो पहले से ही टेंडर में था, 2022 से कंपनी काम कर रही है और पांच साल का टेन्योर है।
