राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा कम्पेडियम रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर के सामाजिक-स्वास्थ्य बदलावों के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल अंचल की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में बाल-विवाह के मामलों में 1% का इजाफा हुआ है, वहीं महिलाओं के इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में इंदौर ने भोपाल को पीछे छोड़ दिया है। दूसरी ओर, ग्वालियर-चंबल अंचल में महिलाएं रील्स बनाने और यूट्यूब से नई डिश सीखने के लिए इंटरनेट का उपयोग तो खूब कर रही हैं, लेकिन बच्चों के पोषण, टीकाकरण और महिलाओं के स्वास्थ्य के मोर्चे पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। ग्वालियर-चंबल: इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा, टीकाकरण घटा भोपाल बनाम इंदौर: बाल-विवाह और इंटरनेट के आंकड़े: भोपाल में बाल विवाह की दर बढ़कर 12.3% हो गई है, जो NFHS-5 में 11.3% थी। सर्वे के दौरान 20 से 24 वर्ष की ऐसी कई महिलाएं मिलीं जिनका विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में हुआ था। ठीक विपरीत, इंदौर में बाल- विवाह दर में 11.1% की भारी गिरावट आई है, आंकड़ा 21.7% से घटकर 10.6% रह गया। चीतों का घर है श्योपुर, लेकिन पोषण के मोर्चे पर सबसे पिछड़ा कूनो नेशनल पार्क के कारण देश-दुनिया में नाम कमाने वाला श्योपुर जिला स्वास्थ्य और पोषण के मोर्चे पर बेहद गंभीर स्थिति में है। NFHS-6 के आंकड़ों के मुताबिक श्योपुर में 5 साल से कम उम्र के 51.3% बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से कम वजन के हैं। यानी जिले में हर दो में से एक बच्चा कुपोषण की चपेट में है। जबकि प्रदेश का औसत 39.7% है। श्योपुर में 25.2% (हर चौथा बच्चा) बच्चे दुबलेपन की श्रेणी में आते हैं। यानी यह बच्चे के कद के अनुपात में वजन को मापता है। जबकि प्रदेश का औसत 23.8% है।
