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भाजपा नेता आए तो कुर्सी से उठ गए कलेक्टर:विधायक का हाथ पकड़कर ले गई बुजुर्ग, आधा-अधूरा घर दिखाया; बंगला बचाने में सफल रहे पंडितजी

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। जनता को इंतजार, नेता जी को तवज्जो
हमारा सिस्टम कुछ ऐसा है कि कोई ‘खास’ अक्सर ‘आम’ पर भारी पड़ जाता है। शिवपुरी में भी आम और खास के बीच फर्क का एक नजारा देखने को मिला। हुआ यूं कि कलेक्टर साहब जनसुनवाई कर रहे थे। तभी वहां भाजपा जिला अध्यक्ष आ गए। फिर क्या था, साहब ने उनसे हाथ मिलाया, कुर्सी से उठे और फिर जन और सुनवाई, दोनों को बीच में ही छोड़कर नेता जी को अपने केबिन में लेकर चले गए। इधर, अपनी समस्याएं लेकर आए आम लोगों के हिस्से इंतजार आ गया। हालांकि थोड़ी देर बाद कलेक्टर लौट आए और लोगों की समस्याएं सुनीं। लेकिन तब तक जनसुनवाई में आम और खास के बीच का यह फर्क कैमरे में कैद हो चुका था। अब लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर नेता जी किसी समस्या को लेकर आए थे और कलेक्टर उन्हें अलग से ले जाकर उनकी बात सुन रहे थे, तो ये फर्क क्यों? और अगर नेता जी सिर्फ मुलाकात के लिए आए थे, तब तो सवाल और बड़ा है कि जनता जनार्दन की सुनवाई बीच में छोड़कर उन्हें इतनी तवज्जो क्यों? विधायक को हाथ पकड़कर ले गई महिला
गुना में एक बुजुर्ग महिला कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का हाथ पकड़कर उन्हें अपने घर तक ले गई। विधायक को अपना आधा-अधूरा घर बताया। जयवर्धन सिंह अपनी विधानसभा राघौगढ़ के आवन क्षेत्र के दौरे पर थे। महिला ने विधायक को बताया कि उसके घर की पुताई नहीं हुई है और प्लास्टर का काम भी अधूरा है। इस पर जयवर्धन सिंह ने घर की पुताई और प्लास्टर करवाने का भरोसा दिया। वैसे, सियासत की यह तस्वीर अच्छी है। इसे राजनीति वाली रील और सुर्खियां बटोरने वाली सियासत भी कहा जा सकता है। लेकिन खरी बात ये है कि जनता बस इतनी जागरूक हो जाए और नेता इतने विनम्र हो जाए कि लोग बेझिझक उनका हाथ पकड़कर अपनी परेशानी बता सकें। यही लोकतंत्री की सच्ची खूबसूरती होगी। अधूरे रेलवे ब्रिज पर स्लोगन की सियासत
इंदौर जिले के महू में अधूरे रेलवे ओवरब्रिज को लेकर सियासत तेज हो गई है। ब्रिज निर्माण में हो रही देरी से नाराज कांग्रेस ने अधूरे ओवरब्रिज की बाउंड्री पर सरकार, नेता और ठेकेदार को निशाने पर लेते हुए स्लोगन लिखवा दिए। ये लिखा गया- ‘काम धीमा, कमीशन तेज… यही है विकास का खेल’ और ‘ठेकेदार-नेता की जोड़ी… ब्रिज निर्माण में होती देरी’। इसके अलावा ‘विकास के नाम पर लूट है… नेता-ठेकेदार को छूट है’ जैसे स्लोगन भी लिखे गए। कांग्रेस ने यहीं बैठकर विरोध का कीर्तन भी शुरू कर दिया। दिनभर ये स्लोगन चर्चा में रहे और इनके वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किए गए। फिर जब इन स्लोगन से बदनामी हुई तो प्रशासन ने भी फुर्ती दिखाई और बाउंड्री पर लिखे नारों को सफेद रंग से पुतवा दिया। अब विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अगर यही तेजी रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण पूरा करने में दिखाई होती तो शायद विरोध करने और स्लोगन लिखने की नौबत ही नहीं आती। और अब अंदर की बात.. सेवा के जरिए सियासत करेंगे पंडितजी
बीजेपी वाले पंडितजी का जलवा कायम है। न वे विधायक हैं, न मंत्री… लेकिन इसके बाद भी भोपाल में अपना बेस कैंप यानी बंगला बचाने में कामयाब रहे हैं। पंडितजी जिस बंगले में रहते हैं, वह अब 2028 तक उन्हीं के पास रहेगा। चर्चा तो ये भी है कि सरकार ने पंडितजी का बोरिया-बिस्तर बांधने की तैयारी कर ली थी। मगर ऐन मौके पर पंडितजी ने दिल्ली दरबार में हाजिरी लगा दी। फिर क्या था, वहीं से संदेश आ गया कि 2028 तक पंडितजी को छेड़ा न जाए। अब पंडितजी को यह बंगला समाज सेवा के नाम पर अलॉट हुआ है। यानी कागजों में समाज सेवा… और बंगले से चलेगी सियासत की सेवा। इनपुट सहयोग – कपिल मिश्रा (शिवपुरी), आशीष रघुवंशी (गुना), अंजीत बाथम (महू) ये भी पढ़ें –
भाजपा विधायक का काफिला रोका तो थप्पड़ मारा: शिवराज बोले- मामा परमानेंट हैं, मुख्यमंत्री-मंत्री आते जाते रहते हैं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए एक बार फिर ‘मामा वापस आ जाओ’ के नारे गूंजे। वे भोपाल में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे, जहां लोगों ने ‘आई लव यू मामा’ के नारे लगाए। शिवराज सिंह ने इसका जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन मामा परमानेंट हैं। पूरी खबर पढ़ें

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