दोपहिया चलाते समय सीधी रखें कमर, रफ्तार भी धीमी शहर की उखड़ी और गड्ढों से भरी सड़कों का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। सड़कों के हिचकोलों के कारण लोगों में कमर दर्द, गर्दन में जकड़न और कंधों में खिंचाव की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। जेएएच के फिजियोथैरेपी विभाग की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या में करीब 20 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दोपहिया या चार पहिया वाहन के अचानक गड्ढे में जाने से रीढ़ और गर्दन की मांसपेशियों पर तेज झटका लगता है, जिससे ‘कंप्रेसिव इंजरी’ हो रही है। यह दर्द आगे चलकर हाथ-पैरों में सुन्नपन और साइटिका जैसी गंभीर समस्याओं में बदल रहा है। मंगलवार को मनाए जा रहे विश्व फिजियोथैरेपी दिवस पर विभाग में मेगा शिविर आयोजित किया जाएगा। कंप्रेसिव इंजरी का खतरा
जीआरएमसी के फिजियोथैरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव चौबे के अनुसार, गड्ढों में वाहन अनियंत्रित होने से गर्दन और रीढ़ की मांसपेशियों पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे मांसपेशियां चोटिल होती हैं और नसों पर दबाव आने से तेज दर्द हाथ-पैरों की ओर प्रवाहित होने लगता है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह डिस्क प्रोलेप्स का रूप ले लेता है। एडवांस ट्रीटमेंट: अब कई मामलों में टल रही सर्जरी
फिजियोथैरेपी सिर्फ सिंकाई या कसरत तक सीमित नहीं है। उन्नत तकनीकों, मैनुअल थैरेपी और एडवांस रिहैबिलिटेशन के जरिए रीढ़ और जोड़ों के गंभीर मामलों में सर्जरी तक को टाल रहा है। पहले संभव नहीं था। स्क्रीन टाइम से मांसपेशियां हो रहीं कमजोर
लोगों की दिनचर्या में शारीरिक श्रम और व्यायाम गायब है। घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने से ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है। मांसपेशियां कमजोर होती हैं। हल्के झटके भी गंभीर चोट में बदल जाते हैं। सलाह: बचाव के 3 जरूरी उपाय
रोज 1 घंटे का वर्कआउट जरूरी: हर व्यक्ति को दिन में कम से कम 1 घंटा शारीरिक व्यायाम करना चाहिए। इसमें कम से कम 20 मिनट तक तेज गति से वॉक जरूर शामिल करें।
सड़क पर सावधानी: दोपहिया वाहन चलाते समय कमर सीधी रखें, स्पीड नियंत्रित रखें ताकि गड्ढे आने पर अचानक तेज ब्रेक या जर्क से बचा जा सके।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज: कमर या गर्दन के दर्द के साथ अगर हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो, तो दर्द निवारक गोलियां लेने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।
