छतरपुर में बारिश और जलभराव के साथ सांप के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले दो दिनों में जिला अस्पताल में स्नेक बाइट के 14 मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। इनमें से एक मरीज को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। सिविल सर्जन डॉ. सरवानन चौरसिया ने इसकी पुष्टि की है। बारिश के कारण सांपों के बिलों में पानी भरने से वे सुरक्षित और सूखे स्थानों की तलाश में घरों और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं। बारिश में बढ़ जाता है सांपों का खतरा बारिश के मौसम में खेतों, ग्रामीण इलाकों और घरों के आसपास जलभराव होने से सांप अपने बिलों से बाहर निकलते हैं। ऐसे में लोगों के सांपों के संपर्क में आने और स्नेक बाइट की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सोते समय भाई-बहन की भी हुई थी मौत जिले में करीब दो दिन पहले सोते समय सांप के काटने से एक भाई-बहन की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने को लेकर चिंता और बढ़ गई है। झाड़-फूंक में देरी से बढ़ता है खतरा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सांप के काटने के बाद कई लोग मरीज को पहले झाड़-फूंक या स्थानीय उपचार के लिए ले जाते हैं। हालत बिगड़ने के बाद मरीज को अस्पताल लाया जाता है। इलाज में देरी होने से कई बार मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है और जान का खतरा बढ़ जाता है। जिला अस्पताल में ASV की पर्याप्त व्यवस्था सिविल सर्जन डॉ. सरवानन चौरसिया ने बताया कि जिला अस्पताल में स्नेक बाइट के मरीजों के उपचार की पूरी व्यवस्था है। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि एक साल में करीब 1500 से 2000 ASV इंजेक्शन का उपयोग होता है। डॉक्टर की सलाह- बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचें डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक, अंधविश्वास या घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें। मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल ले जाएं, ताकि समय पर चिकित्सकीय उपचार और जरूरत पड़ने पर ASV दिया जा सके। बारिश में इन बातों का रखें ध्यान बारिश के दौरान घर के आसपास साफ-सफाई रखें। रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें और जमीन पर सोने से बचें। सांप के काटने की स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
