मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन और नियंत्रण अब जबलपुर नगर निगम के पास रहेगा। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड प्रत्येक ट्रैफिक सिग्नल के रखरखाव के लिए नगर निगम को सालाना 1.50 लाख रुपए उपलब्ध कराएंगे। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे और समाजसेवी रजत भार्गव द्वारा दायर जनहित याचिका में बताया गया था कि शहर के कई ट्रैफिक सिग्नल लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिससे यातायात बाधित हो रहा है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत संयुक्त बैठक के मिनिट्स पर गौर किया। इसके बाद कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर की यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखी जाए। जहां भी अतिक्रमण या अन्य अवरोधों के कारण ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है, वहां आवश्यक कार्रवाई कर उन्हें हटाया जाए। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। 27 जुलाई की बैठक में लिया गया फैसला प्रदेश सरकार की ओर से हाईकोर्ट में 27 जुलाई 2026 को आयोजित संयुक्त बैठक के मिनिट्स पेश किए गए। कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जबलपुर कलेक्टर एवं जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सह-अध्यक्ष, नगर निगम आयुक्त, जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) शामिल हुए थे। बैठक में निर्णय लिया गया कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी जाएगी। इसके बदले ट्रैफिक पुलिस और स्मार्ट सिटी लिमिटेड प्रत्येक ट्रैफिक सिग्नल के रखरखाव के लिए नगर निगम को सालाना 1 लाख 50 हजार रुपए उपलब्ध कराएंगे। नगर निगम को यह जिम्मेदारी मिलने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। अतिक्रमण हटाने के भी निर्देश डिवीजन बेंच ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहर में यातायात का प्रवाह सुचारु बनाए रखा जाए। जहां भी अतिक्रमण या अन्य अवरोध ट्रैफिक में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं, वहां आवश्यक कार्रवाई कर उन्हें हटाया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण और अन्य कारणों से शहर का ट्रैफिक प्रभावित नहीं होना चाहिए। उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के 10 जुलाई 2026 के आदेश के पालन में 27 जुलाई को संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन नगर निगम को सौंपने पर सहमति बनी। याचिका में क्या कहा गया याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि जबलपुर के विभिन्न चौराहों पर लगाए गए कई ट्रैफिक सिग्नल लंबे समय से बंद पड़े हैं। इससे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है और आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि जब ट्रैफिक सिग्नल चालू थे, तब नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के ई-चालान जारी किए जाते थे, जिससे सरकार को हर महीने लगभग 5 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता था। लंबे समय से सिग्नल बंद होने के कारण जहां नागरिकों को परेशानी हो रही है, वहीं सरकार को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि शहर के ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन तीन अलग-अलग एजेंसियों के पास होने से समन्वय नहीं बन पा रहा है। वर्तमान में 6 ट्रैफिक सिग्नल स्मार्ट सिटी जबलपुर, 5 सिग्नल नगर निगम और 10 ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा किया जा रहा है। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सभी सिग्नलों का संचालन एक ही एजेंसी यानी नगर निगम के पास रहेगा।
