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बिना सरकारी मदद शिक्षक संगठन ने बांटे 4.33 करोड़:दिवंगत कर्मचारी के परिजन की मदद के लिए हर मेंबर ने दिए 170 रुपए

मध्य प्रदेश के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक (PMUMS) के नाम से बनाए गए एक संगठन ने दिवंगत शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को बगैर किसी सरकारी मदद के चार करोड़ 33 लाख रुपए की मदद पहुंचाई है। एक साल पहले शुरू की गई इस मानवीय पहल में अब तक 15 दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को 27.50 लाख रुपए की राहत देने का काम किया है। सामाजिक संवेदना के जरिए शिक्षकों की टीम अपने साथी शिक्षकों को आर्थिक संबल देने का काम कर रही है। PMUMS शिक्षक संगठन ने एक साल पहले यह तय किया कि यदि शिक्षा विभाग अथवा ट्राइबल विभाग में कार्यरत कोई कर्मचारी सेवाकाल के दौरान किसी कारणवश दिवंगत हो जाता है, तो संगठन के सभी पंजीकृत सदस्य मिलकर उनके परिवार को आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं। PMUMS संगठन के भोपाल संभाग अध्यक्ष ऋतुराज तिवारी ने बताया कि इस व्यवस्था में हर पंजीकृत सदस्य मात्र ₹45 से ₹50 तक की न्यूनतम राशि सीधे दिवंगत कर्मचारी के नामांकित (नॉमिनी) परिवारजन के बैंक खाते में ऑनलाइन जमा करता है। इस प्रकार एक परिवार को लगभग ₹ 26 से 27 लाख तक का सहयोग प्राप्त हो जाता है। सहयोग की यह प्रक्रिया हर माह की 5 से 20 तारीख के मध्य संचालित की जाती है तथा संपूर्ण प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है। संगठन की वेबसाइट www.pmums.com⁠ से शिक्षा विभाग एवं ट्राइबल विभाग का कोई भी कर्मचारी निःशुल्क पंजीयन करा सकता है। कोई फंडिंग नहीं सिर्फ 170 रुपए हर मेंबर ने दिए बृजेश कुमार असाटी, सह-संस्थापक कर्मचारी कल्याण कोष, मध्य प्रदेश ने बताया कि प्राथमिक माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षक संगठन (पीएमयूएमएस) के नाम से बने इस संगठन की खास बात यह है कि हम मामूली राशि लेकर लोगों को मदद करते हैं। इसके लिए कोई फंडिंग नहीं की जाती है। जुलाई में अब तक चार शिक्षकों के परिवारों को एक करोड़ 8 लाख 20 हजार रुपए की मदद की है। इसके लिए हमने चार क्यूआर कोड बनाए और संगठन के सभी सदस्यों को बराबर संख्या में क्यूआर कोड भेजकर 170 रुपए की मदद करने के लिए कहा। इससे एक दिवंगत शिक्षक के परिजनों को 27 लाख रुपए से अधिक की मदद मिल गई। PMUMS शिक्षक संगठन की इस पहल से दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को अब तक 4 करोड़ 33 लाख का आर्थिक संबल मिला l जून में इन दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को दी मदद
माह जून 2026 में चार दिवंगत साथियों के परिवारों को सहयोग पूर्ण हुवा है, जिसमें बैतूल के स्व. श्यामकिशोर सोनी के नॉमिनी को 27 लाख 50 हजार, देवास के स्व. चंद्रप्रकाश जोशी की नॉमिनी को 27 लाख 50 हजार, बालाघाट के स्व. कृष्ण कुमार करंडे की नॉमिनी को 27 लाख 40 हजार तथा दमोह के स्व. अमित असाटी की नॉमिनी को 27 लाख रु के साथ कुल 1 करोड़ 9 लाख रुपए सहयोग के रूप में दिए गए हैं। 1.15 लाख शिक्षक और कर्मचारी जुड़े
PMUMS संगठन मे प्रदेशभर से अब तक लगभग 1 लाख 15 हजार शिक्षक एवं शिक्षा, ट्राइबल विभाग के कर्मचारी इस संगठन से पंजीकृत हो चुके हैं। सहयोग अभियान में प्रदेश के विभिन्न जिलों मे अभी तक कुल 15 दिवंगत साथियो के नॉमिनी को 4 करोड़ 33 लाख का सहयोग किया जा चुका है, जो उन परिवारों के सीधे खातों में सहयोग राशि के रूप में पहुंच चुका है। PMUMS संगठन के प्रदेश महामंत्री विनोद राठौर ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस प्रकार की मानवीय पहल पहली बार प्रारंभ की गई है। यदि ऐसी व्यवस्था पूर्व में प्रारंभ हो गई होती, तो प्रदेश के अनेक दिवंगत कर्मचारियों के परिवार आर्थिक रूप से अधिक सशक्त हो सकते थे। उन्होंने बताया कि यह PMUMS संगठन की मानवीय पहल नॉमिनी सहयोग की प्रक्रिया दिसंबर 2025 से प्रारंभ हुई l इस योजना के संस्थापक सतीश खरे द्वारा प्रदेश के सेवारत साथियो के परिवार के बारे मे भी सोचा गया, यह अनुकरणीय है l अब तक इस संगठन के माध्यम से प्रदेश के 15 कर्मचारी परिवारों को कुल ₹4 करोड़ 33 लाख से अधिक का सहयोग प्रदान किया जा चुका है। संस्था के सह संस्थापक और प्रांत अध्यक्ष मुरली मनोहर अजरिया ने समाज के प्रबुद्धजन से इस सेवभावी पहल के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने तथा कर्मचारियों को इससे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही। सवाल-जवाब से जानिए… प्रश्न: पैसे देने की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: दिवंगत शिक्षक साथी के नॉमिनी के बैंक खाते में सहयोग राशि सीधे जमा की जाती है। यह राशि सभी रजिस्टर्ड सदस्यों द्वारा संस्थापक मंडल द्वारा निर्धारित सहयोग राशि के अनुसार प्रदान की जाती है। प्रश्न: पहल कब से शुरू की गई है?
उत्तर: कर्मचारी कल्याण कोष योजना का शुभारंभ 4 मार्च 2025 को संस्थापक सतीश के जन्मदिवस के अवसर पर टीकमगढ़ जिले से किया गया था। प्रश्न: राशि देने के लिए चयन कैसे किया जाता है?
उत्तर: कर्मचारी कल्याण कोष की एक निर्धारित नियमावली है। प्रारंभ में नियम था कि कोई भी रजिस्टर्ड सदस्य 3 माह का लॉक-इन पीरियड पूर्ण कर तथा नियमित सहयोग करते हुए पात्र बनता था। वर्तमान में इस नियम में संशोधन कर पात्रता अवधि 6 माह कर दी गई है। प्रश्न: यह विचार कैसे आया?
उत्तर: हमारे कई परिचित शिक्षक साथी असमय दिवंगत हो जाते थे। हम उनकी आर्थिक सहायता करना चाहते थे, लेकिन व्यक्तिगत रूप से पर्याप्त सहयोग नहीं कर पाते थे। इसी पीड़ा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित होकर इस योजना का निर्माण किया गया। प्रश्न: शुरुआत में लोगों की प्रतिक्रिया कैसी थी?
उत्तर: प्रारंभ में लोगों का विश्वास अपेक्षाकृत कम था, लेकिन योजना की पारदर्शिता और सकारात्मक परिणामों के कारण अब शिक्षक साथी उत्साह एवं प्रेरणा के साथ बड़ी संख्या में इससे जुड़ रहे हैं। प्रश्न: पेंशन की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: पेंशन योजना वर्तमान में विचाराधीन है। इस विषय पर समिति द्वारा कार्य किया जा रहा है और भविष्य में इस संबंध में जानकारी जारी की जाएगी। प्रश्न: संगठन में अभी कितने शिक्षक शामिल हैं?
उत्तर: वर्तमान में मध्य प्रदेश के लगभग 1,15,000 शिक्षक साथी इस योजना से जुड़े हुए हैं। प्रश्न: क्या सेवानिवृत्ति के बाद भी योजना का लाभ मिलता है?
उत्तर: नहीं, इस योजना का लाभ केवल सेवारत शिक्षक साथियों को प्रदान किया जाता है। सेवानिवृत्ति के बाद सदस्य के लिए यह योजना स्वतः समाप्त मानी जाती है। प्रश्न: नियमावली और पात्रता कौन तय करता है?
उत्तर: योजना की नियमावली के अनुसार पात्र दिवंगत सदस्यों के प्रस्ताव जिला टीम द्वारा प्रांतीय आईटी सेल को भेजे जाते हैं। दस्तावेजों के परीक्षण के बाद प्रांतीय आईटी सेल प्रकरण को संस्थापक मंडल के समक्ष प्रस्तुत करती है। पात्र पाए गए दिवंगत शिक्षक साथियों के लिए उनकी मृत्यु दिनांक की वरिष्ठता के आधार पर सहयोग की अपील जारी की जाती है।

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