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इंदौर निगम की पानी की टंकी में चलता रहा आश्रम:हाईकोर्ट ने पूछा- जिम्मेदार कौन, वर्षों तक कैसे चलता रहा, कार्रवाई में इतनी देर क्यों?

महाराणा प्रताप नगर स्थित नगर निगम की पानी की टंकी परिसर में वर्षों से संचालित हो रहे अवैध वृद्धाश्रम और वहां बुजुर्गों के साथ अमानवीय व्यवहार के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर को निर्देश देते हुए प्रशासन, पुलिस और नगर निगम से जवाब तलब किया कि इस पूरे मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से यह जानना चाहा है कि बिना किसी वैधानिक अनुमति के सरकारी परिसर में वृद्धाश्रम आखिर वर्षों तक कैसे संचालित होता रहा और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। नगर निगम की टंकी परिसर में चल रहा था आश्रम अनुसार महाराणा प्रताप नगर स्थित नगर निगम की पानी की टंकी परिसर में पिछले तीन-चार वर्षों से एक अवैध वृद्धाश्रम संचालित हो रहा था। यहां करीब 27 बुजुर्ग रह रहे थे। बताया गया है कि इस दौरान कुछ वृद्धों की मृत्यु भी हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इसी परिसर में नगर निगम के जलकार्य विभाग का कंट्रोल रूम भी संचालित होता है, जहां नियमित और संविदा कर्मचारी प्रतिदिन मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद किसी अधिकारी ने वरिष्ठ स्तर पर इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं दी। अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल नगर निगम के जलकार्य विभाग के अधिकारी भी समय-समय पर पानी की टंकी का निरीक्षण करने पहुंचते रहे, लेकिन परिसर में चल रहे वृद्धाश्रम पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई। अब हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने की संभावना भी बढ़ गई है। वीडियो सामने आने के बाद खुला मामला मामला तब सामने आया जब एक वृद्ध महिला के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ। आरोप है कि आश्रम में एक नाबालिग द्वारा बुजुर्गों के साथ मारपीट की जाती थी। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन और नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए आश्रम को सील कर दिया। वहां रह रहे सभी वृद्धों को अन्य आश्रमों में स्थानांतरित कर दिया गया। हाईकोर्ट ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासनिक जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। रिपोर्ट में आश्रम के संचालन, प्रशासनिक लापरवाही, अनुमति संबंधी स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा। दूसरी बार सामाजिक सरोकार के मामले में दखल यह पहला अवसर नहीं है जब हाईकोर्ट ने ऐसे मामले में स्वत: संज्ञान लिया हो। इससे पहले युगपुरुष धाम में 17 दिव्यांग बच्चों की मौत के मामले में भी अदालत ने स्वत: संज्ञान लेकर न्याय मित्र नियुक्त किया था। उस मामले में न्याय मित्र ने अपनी रिपोर्ट में उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में भी पर्याप्त चिकित्सा और अन्य सुविधाओं के अभाव की ओर ध्यान दिलाया था। अब महाराणा प्रताप नगर के अवैध वृद्धाश्रम का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर वृद्ध और असहाय लोगों की देखभाल से जुड़े संस्थानों की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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